10 अक्टूबर 2026
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पिछड़ा वर्ग आरक्षण मामले में जगन मोहन रेड्डी का नायडू पर हमला, 'मिस्टर 420' बताया

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पिछड़ा वर्ग आरक्षण मामले में जगन मोहन रेड्डी का नायडू पर हमला, 'मिस्टर 420' बताया

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका खारिज होने के बाद जगन मोहन रेड्डी ने नायडू को 'मिस्टर 420' बताया और बीसी वर्ग को 34% आरक्षण के वादे से मुकरने का आरोप लगाया। यह विवाद स्थानीय निकाय चुनावों में आरक्षण की कानूनी सीमाओं और चुनावी वादों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

वाईएसआरसीपी अध्यक्ष जगन मोहन रेड्डी ने 9 अक्टूबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर सीएम चंद्रबाबू नायडू को 'मिस्टर 420' बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें स्थानीय निकायों में बीसी को 34% आरक्षण देने के उच्च न्यायालय के निर्णय को चुनौती दी गई थी।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को यह आरक्षण रद्द किया था, कहा कुल आरक्षण 50% की सीमा लाँघता है।
मुख्यमंत्री नायडू ने 18 अगस्त को ग्रामीण निकायों में 34% और शहरी निकायों में 33.33% बीसी आरक्षण की घोषणा की थी।
जगन ने विद्या दीवेना और वसति दीवेना योजनाओं के तहत करीब ₹9,000 करोड़ के बकाये का भी मुद्दा उठाया।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 9 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर कड़ा हमला बोला, और उन पर स्थानीय निकायों में पिछड़ा वर्ग (बीसी) को 34 प्रतिशत आरक्षण देने के वादे से मुकरने का आरोप लगाया। जगन ने यह आरोप तब लगाया जब सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसने बीसी आरक्षण को निरस्त कर दिया था।

जगन मोहन रेड्डी का सीधा हमला

पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री नायडू को 'मिस्टर 420' बताया। उन्होंने लिखा, 'चंद्रबाबू नायडू, लोगों से वादे करने और फिर उन्हें धोखा देने के मामले में आप मिस्टर 420 हैं।' जगन ने आगे कहा, 'आपने स्थानीय निकायों में बीसी वर्ग को 34 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया, उसी वादे के ज़रिए उन्हें आकर्षित किया और फिर उनके साथ धोखा किया।'

वाईएसआरसीपी प्रमुख ने नायडू की सरकार पर अन्य मोर्चों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'आपके सुपर सिक्स और सुपर सेवन वादे भी एक और धोखा हैं। हमारी सरकार के दौरान लोगों को मिलने वाली योजनाओं को बंद करना भी धोखा था।' जगन के अनुसार, 'विद्या दीवेना और वसति दीवेना योजनाओं के तहत करीब ₹9,000 करोड़ का बकाया छोड़ देना एक बड़ा विश्वासघात है।'

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के निर्णय

1 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्थानीय निकाय चुनावों में बीसी वर्ग को 34 प्रतिशत आरक्षण देने वाले दो सरकारी आदेशों को निरस्त कर दिया था। अदालत का तर्क था कि इस आरक्षण से कुल आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है।

इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी। इस प्रकार अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्थानीय निकायों में सभी वर्गों को मिलाकर कुल आरक्षण किसी भी स्थिति में 50 प्रतिशत की सीमा नहीं लाँघ सकता।

नायडू ने कब की थी घोषणा

मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को बढ़े हुए आरक्षण की घोषणा करते हुए कहा था कि ग्रामीण स्थानीय निकायों में बीसी वर्ग को 34 प्रतिशत और शहरी स्थानीय निकायों में 33.33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह घोषणा चुनाव-पूर्व बीसी मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में देखी जा रही थी।

राजनीतिक संदर्भ और आगे का रास्ता

जगन मोहन रेड्डी ने मांग की कि मुख्यमंत्री नायडू कम से कम अब पिछड़ा वर्ग से सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। उन्होंने नायडू के 143 वादों वाले चुनावी घोषणापत्र को भी 'सबसे बड़ा धोखा' बताया। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। आलोचकों का कहना है कि आरक्षण की कानूनी सीमाओं की जाँच किए बिना की गई यह घोषणा शुरू से ही न्यायिक चुनौती के लिए असुरक्षित थी। अब देखना यह होगा कि नायडू सरकार बीसी समुदाय को राहत देने के लिए कोई वैकल्पिक नीतिगत मार्ग अपनाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि सुप्रीम कोर्ट का 50% की कुल सीमा का निर्देश वर्षों पुराना और सुस्थापित है। असली सवाल यह है कि क्या यह घोषणा कानूनी सलाह के आधार पर की गई थी या महज चुनावी गणित से प्रेरित थी — और इसकी कीमत बीसी समुदाय को चुकानी पड़ी। जगन की आलोचना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन उनकी अपनी सरकार के दौरान भी इसी प्रकार की न्यायिक जटिलताएँ सामने आई थीं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में बीसी आरक्षण विवाद क्या है?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 18 अगस्त को स्थानीय निकायों में बीसी वर्ग को 34% आरक्षण देने की घोषणा की थी। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर को इसे रद्द कर दिया क्योंकि इससे कुल आरक्षण 50% की सीमा पार हो जाती, और 9 अक्टूबर को सर्वोच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी।
सर्वोच्च न्यायालय ने आंध्र सरकार की याचिका क्यों खारिज की?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्थापित संवैधानिक सिद्धांत के आधार पर याचिका खारिज की, जिसके तहत स्थानीय निकायों में सभी वर्गों का संयुक्त आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता। उच्च न्यायालय पहले ही यही आधार देते हुए बीसी के 34% आरक्षण वाले सरकारी आदेश रद्द कर चुका था।
जगन मोहन रेड्डी ने नायडू पर क्या आरोप लगाए हैं?
जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर पोस्ट कर नायडू को 'मिस्टर 420' बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने बीसी वर्ग को 34% आरक्षण का वादा करके वोट लिए और फिर धोखा दिया। उन्होंने विद्या दीवेना व वसति दीवेना योजनाओं के ₹9,000 करोड़ बकाये और 143 वादों के चुनावी घोषणापत्र को भी निशाना बनाया।
क्या बीसी वर्ग को अब स्थानीय निकायों में कोई आरक्षण नहीं मिलेगा?
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के फैसलों के बाद 34% बीसी आरक्षण वाले सरकारी आदेश निरस्त हो चुके हैं। अब राज्य सरकार को 50% की कुल सीमा के भीतर रहते हुए कोई वैकल्पिक नीतिगत रास्ता निकालना होगा।
इस विवाद का आंध्र प्रदेश की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह मुद्दा आंध्र प्रदेश में बीसी समुदाय, जो एक बड़ा मतदाता वर्ग है, के बीच नायडू सरकार की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष के रूप में वाईएसआरसीपी के लिए यह आरोप राजनीतिक लाभ का अवसर है, विशेष रूप से आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनज़र।
राष्ट्र प्रेस
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