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गैंगस्टर हिमांशु भाऊ की विदेश में गिरफ्तारी: पूर्व डीसीपी एलएन राव बोले — फरार अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

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गैंगस्टर हिमांशु भाऊ की विदेश में गिरफ्तारी: पूर्व डीसीपी एलएन राव बोले — फरार अपराधियों पर कसेगा शिकंजा

सारांश

विदेश में बैठकर आपराधिक साम्राज्य चलाने वाले गैंगस्टर हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी को पूर्व डीसीपी एलएन राव ने ऐतिहासिक सफलता बताया। इंटरपोल और CBI की भूमिका अहम रही। अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू होगी और विदेशों में छिपे अन्य अपराधियों पर भी शिकंजा कसेगा।

मुख्य बातें

कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसके एक साथी को विदेश में ABI द्वारा गिरफ्तार किया गया; इंटरपोल और CBI की सूचना निर्णायक रही।
पूर्व डीसीपी एलएन राव ने इसे हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और भारतीय एजेंसियों की संयुक्त बड़ी सफलता बताया।
हिमांशु भाऊ ने कथित तौर पर 17-18 वर्ष की उम्र में अपराध की दुनिया में प्रवेश किया और विदेश से नेटवर्क संचालित करता था।
इस गिरफ्तारी का असर विदेशों में बैठे अन्य फरार अपराधियों पर पड़ेगा; सभी के खिलाफ प्रत्यर्पण संधि के तहत कार्रवाई संभव।
दिल्ली मेट्रो की नई दिल्ली-IGI एयरपोर्ट लाइन पर पोस्टर लगाने का मामला कानूनी अपराध; जाँच स्पेशल सेल को सौंपी गई।

कुख्यात गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को विदेश में गिरफ्तार किए जाने की कार्रवाई को दिल्ली पुलिस के पूर्व उप-पुलिस आयुक्त एलएन राव ने हरियाणा पुलिस, दिल्ली पुलिस और भारतीय एजेंसियों की बड़ी संयुक्त सफलता करार दिया है। उनके अनुसार, इंटरपोल और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के सहयोग से मिली सूचना के आधार पर हिमांशु भाऊ और उसके एक साथी को दबिश देकर पकड़ा गया। इस गिरफ्तारी से अब प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू होगी और विदेशों में बैठे अन्य वांछित अपराधियों पर भी दबाव बढ़ेगा।

कैसे हुई गिरफ्तारी

पूर्व डीसीपी एलएन राव ने बताया कि हिमांशु भाऊ को ABI (संबंधित विदेशी एजेंसी) द्वारा गिरफ्तार किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा पुलिस ने सूचना मिलते ही तत्काल संबंधित जानकारी साझा की, जिससे कार्रवाई संभव हो सकी। राव ने हरियाणा पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बेहद तेज़ी से कदम उठाए।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई अपराधियों को विदेशों से भारत लाया जा चुका है। राव ने बताया कि वे स्वयं एक उग्रवाद से जुड़े आरोपी को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से भारत लेकर आए थे। यह पूरी प्रक्रिया भारत और संबंधित देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधियों पर आधारित होती है।

हिमांशु भाऊ का आपराधिक ग्राफ

राव के अनुसार, हिमांशु भाऊ ने कथित तौर पर 17-18 वर्ष की अल्पायु में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था। जुवेनाइल कानून के अपेक्षाकृत लचीले प्रावधानों का लाभ उठाते हुए वह तेज़ी से बड़े अपराधियों की श्रेणी में शामिल हो गया। बाद में वह विदेश चला गया और वहीं से अपने आपराधिक नेटवर्क को निर्देशित करता रहा।

राव ने बताया कि हिमांशु के गैंग में बड़ी संख्या में सदस्य शामिल हैं, जिन्हें वह विदेश से निर्देश देता था। ये सदस्य ज़मीन पर रहकर गोलीबारी, धमकी देने और उगाही जैसी आपराधिक गतिविधियाँ अंजाम देते थे।

अन्य फरार अपराधियों पर असर

पूर्व डीसीपी एलएन राव ने कहा कि इस गिरफ्तारी का प्रभाव उन तमाम गैंगस्टरों पर पड़ेगा जो विदेशों में बैठकर आपराधिक गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी वांछित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई होनी है — किसी मामले में समय अधिक लग सकता है, किसी में कम।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इंटरपोल के माध्यम से विदेशों में छिपे अपराधियों की धरपकड़ के प्रयास तेज़ कर रही हैं। राव ने कहा कि यदि किसी वांछित अपराधी के विदेश में होने की सूचना मिलती है, तो इंटरपोल के माध्यम से उसे पकड़ा जा सकता है।

दिल्ली मेट्रो पोस्टर मामले पर राव का बयान

पूर्व डीसीपी राव ने दिल्ली मेट्रो की नई दिल्ली-IGI एयरपोर्ट लाइन पर ट्रेन के अंदर पोस्टर लगाए जाने के मामले को भी कानूनी अपराध करार दिया। उन्होंने कहा कि इसी कारण दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है और पोस्टर लगाने वालों की पहचान की जा रही है।

राव के अनुसार, स्पेशल सेल को यह जाँच इसलिए सौंपी गई है क्योंकि यह देखा जाना ज़रूरी है कि पोस्टरों का उद्देश्य किसी चुनी हुई सरकार को बदनाम करना था, सरकारी कामकाज को प्रभावित करने का प्रयास था, या फिर कोई अन्य मंशा थी। उन्होंने कहा कि स्पेशल सेल के पास जाँच का व्यापक अनुभव है और वह शीघ्र ही साजिश का पर्दाफाश करेगी।

आगे की राह

राव ने बताया कि हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद उससे विस्तृत पूछताछ होगी, जिससे उसके नेटवर्क, उसके सहयोगियों और संचालन के तरीके के बारे में और अधिक जानकारी सामने आएगी। प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित देश में कानूनी औपचारिकताएँ कितनी जल्दी पूरी होती हैं। दिल्ली मेट्रो पोस्टर मामले में भी जाँच के नतीजे जल्द सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा प्रत्यर्पण प्रक्रिया की गति और उसके नेटवर्क के विघटन में होगी — क्योंकि भारत में ऐसे कई मामले हैं जहाँ गिरफ्तारी के बाद भी कानूनी पेचीदगियों के कारण अपराधी वर्षों तक विदेश में रहे। दिल्ली मेट्रो पोस्टर मामले में स्पेशल सेल की तैनाती यह संकेत देती है कि जाँच एजेंसियाँ इसे महज़ शरारत नहीं, बल्कि संभावित राजनीतिक साजिश के नज़रिए से देख रही हैं — जो एक संवेदनशील दावा है और जिसे साक्ष्य के आधार पर ही स्थापित किया जाना चाहिए। जुवेनाइल कानून की 'लचीलेपन' वाली टिप्पणी एक पुरानी बहस को फिर से उठाती है कि क्या किशोर अपराधियों के लिए मौजूदा कानूनी ढाँचा पर्याप्त निवारक है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को किसने और कहाँ गिरफ्तार किया?
हिमांशु भाऊ को विदेश में ABI (संबंधित विदेशी एजेंसी) द्वारा गिरफ्तार किया गया। इंटरपोल और CBI की सूचना के आधार पर यह कार्रवाई हुई और उसके एक साथी को भी पकड़ा गया।
हिमांशु भाऊ को भारत कब तक लाया जाएगा?
पूर्व डीसीपी एलएन राव के अनुसार, प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारत लाने में लगने वाला समय संबंधित देश में कानूनी औपचारिकताओं की गति पर निर्भर करेगा।
हिमांशु भाऊ का आपराधिक इतिहास क्या है?
कथित तौर पर हिमांशु भाऊ ने 17-18 वर्ष की उम्र में अपराध की दुनिया में प्रवेश किया। बाद में विदेश जाकर वह वहीं से अपने गैंग को निर्देश देता था, जिसके सदस्य गोलीबारी, धमकी और उगाही जैसे अपराध अंजाम देते थे।
दिल्ली मेट्रो पोस्टर मामले की जाँच किसे सौंपी गई है?
दिल्ली पुलिस ने यह मामला स्पेशल सेल को सौंपा है। पूर्व डीसीपी एलएन राव के अनुसार, ट्रेन के अंदर पोस्टर लगाना कानूनी अपराध है और जाँच में पोस्टरों की सामग्री, उद्देश्य और उनके पीछे के लोगों की पहचान की जाएगी।
इस गिरफ्तारी का अन्य फरार अपराधियों पर क्या असर पड़ेगा?
पूर्व डीसीपी एलएन राव के अनुसार, यह कार्रवाई विदेशों में बैठकर आपराधिक गतिविधियाँ चलाने वाले सभी गैंगस्टरों के लिए कड़ा संदेश है। इंटरपोल के माध्यम से अन्य वांछित अपराधियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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