हिमांशु भाऊ अमेरिकी ICE हिरासत में: हरियाणा का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर नेवादा में पकड़ा गया
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मोस्ट वांटेड भगोड़ों में शुमार हरियाणा का गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और उसका सहयोगी नीरज फरीदपुरिया अमेरिका के इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की हिरासत में हैं। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। दोनों को नेवादा के हेंडरसन डिटेंशन सेंटर, 18 ईस्ट बेसिक रोड में रखा गया है, जो लास वेगास के बाहर स्थित है।
गिरफ्तारी का विवरण
अमेरिकी सरकार के ऑनलाइन बंदी लोकेटर की शुक्रवार रात की जाँच में दो भारतीय मूल के व्यक्ति — हिमांशु सिगरोहा और नीरज कौशिक — ICE हिरासत में दर्ज मिले। अधिकारियों के अनुसार ये दोनों ही भाऊ और फरीदपुरिया हैं। उनके मामले लास वेगास स्थित ICE के एनफोर्समेंट एंड रिमूवल ऑपरेशंस (ERO) कार्यालय द्वारा संभाले जा रहे हैं।
भाऊ को 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को लास वेगास में ट्रैक करके गिरफ्तार किया गया। फरीदपुरिया को इस साल की शुरुआत में हिरासत में लेकर जमानत पर रिहा किया गया था, लेकिन एंकल मॉनिटर हटाने के बाद उसे फिर से पकड़ा गया।
हिमांशु भाऊ की आपराधिक पृष्ठभूमि
भाऊ का असली नाम हिमांशु रिटोलिया है और वह हरियाणा के रोहतक का रहने वाला है। उसके खिलाफ अगस्त 2023 से इंटरपोल का रेड नोटिस जारी है। भारत में वह 18 मामलों में वांटेड है — जिनमें हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, धमकी और जालसाजी के आरोप शामिल हैं।
गौरतलब है कि भाऊ गैंग का उत्तर भारत में कई हाई-प्रोफाइल अपराधों से संबंध रहा है। गैंग ने अगस्त 2025 में यूट्यूबर एल्विश यादव के गुरुग्राम स्थित घर के बाहर फायरिंग की जिम्मेदारी ली थी।
ICE हिरासत बनाम प्रत्यर्पण: कौन-सा रास्ता तेज़
1997 की भारत-अमेरिका प्रत्यर्पण संधि के तहत आधिकारिक प्रत्यर्पण में लंबी अदालती प्रक्रिया लगती है। इसके विपरीत, अमेरिकी इमिग्रेशन प्रणाली के माध्यम से निष्कासन की प्रक्रिया अक्सर तेज़ साबित हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जाँच एजेंसियाँ वांटेड भगोड़ों को वापस लाने के लिए औपचारिक प्रत्यर्पण के बजाय इमिग्रेशन रूट का सहारा ले रही हैं।
इसका सबसे ताजा उदाहरण अनमोल बिश्नोई का है, जिसे 2024 में अमेरिका में हिरासत में लिया गया और 19 नवंबर 2025 को भारत निर्वासित किया गया। नई दिल्ली पहुँचने पर उसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार कर लिया।
भारत की अगली कार्रवाई
रिपोर्टों के अनुसार भारत भाऊ की निर्वासन प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश कर रहा है और अधिकारियों की एक टीम अमेरिका रवाना हो सकती है। हालाँकि दोनों में से किसी के खिलाफ अमेरिका में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और ICE या FBI ने गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
भाऊ और फरीदपुरिया का भविष्य उनके इमिग्रेशन मामलों के नतीजे पर निर्भर करेगा — जिसमें अमेरिकी इमिग्रेशन जज के सामने शरण या अन्य राहत के लिए उनके किसी भी दावे की सुनवाई भी शामिल है। भारतीय जाँच एजेंसियों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी रहेगी।