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राहुल गांधी जिन्ना की राह पर: लोढ़ा का बड़ा आरोप, विदेशी ताकतों पर भी निशाना

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राहुल गांधी जिन्ना की राह पर: लोढ़ा का बड़ा आरोप, विदेशी ताकतों पर भी निशाना

सारांश

महाराष्ट्र मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने राहुल गांधी की तुलना सीधे जिन्ना से की — यह महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि विपक्ष के संवैधानिक संस्थाओं पर हमले को राष्ट्रविरोधी षड्यंत्र बताने की सुनियोजित कोशिश है।

मुख्य बातें

मंगल प्रभात लोढ़ा ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह 1945-47 में जिन्ना की तरह अराजकता फैला रहे हैं।
लोढ़ा ने कहा कि विदेशी ताकतें राहुल गांधी की मदद कर रही हैं और उन्हें उजागर किया जाना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के संवैधानिक पद की रक्षा को सरकार की जिम्मेदारी बताया।
दीया मिर्जा विवाद में हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए दिवाली परंपराओं की भावना को भी अहम बताया।
25 करोड़ लोगों के गरीबी रेखा से ऊपर आने का दावा करते हुए मोदी और फडणवीस सरकार का बचाव किया।
एनसीपी आंतरिक विवाद और संजय राउत की टिप्पणियों से खुद को अलग रखा।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने 3 नवंबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह देश में अराजकता फैलाने और संवैधानिक व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। लोढ़ा ने कहा कि राहुल गांधी का यह आचरण 1945-47 के दौरान मुहम्मद अली जिन्ना द्वारा अपनाई गई रणनीति से मिलता-जुलता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें इस कथित षड्यंत्र में राहुल गांधी की मदद कर रही हैं।

चुनाव आयोग विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया

चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को लेकर लोढ़ा ने कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं और ऐसे पदों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। भाजपा का इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देना इसीलिए ज़रूरी है, क्योंकि अराजकता फैलाने वाली ताकतों से संवैधानिक पदों को सुरक्षित रखना अनिवार्य है।

लोढ़ा ने देश की जनता से अपील की कि वे ऐसी कथित साजिश को समय रहते पहचानें। उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी ताकतें इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और उन्हें सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर तनाव बढ़ रहा है।

मोदी और फडणवीस का बचाव

लोढ़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि उनका 'अपराध' केवल इतना है कि उन्होंने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य निर्धारित किया और उसकी दिशा में ठोस कदम उठाए। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं, आयात में कमी आई है और निर्यात में वृद्धि हुई है।

मंत्री ने यह भी कहा कि देश की आत्मनिर्भरता और विदेश नीति पहले से कहीं अधिक मज़बूत हुई है और अब भारतीय पासपोर्ट को दुनियाभर में सम्मान मिल रहा है। गौरतलब है कि ये दावे सरकार के आधिकारिक आँकड़ों पर आधारित बताए जा रहे हैं।

दीया मिर्जा विवाद और हाईकोर्ट फैसले पर रुख

दीया मिर्जा से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट के फैसले पर लोढ़ा ने कहा कि वह अदालत के निर्णय का सम्मान करते हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संस्था — चाहे सरकार हो या कोई संगठन — को हज़ारों वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दिवाली जैसे त्योहारों से जुड़ी परंपराएँ और संस्कार समाज की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं और लोगों को अपने त्योहार मनाने का अधिकार मिलना चाहिए। इस बयान को हाईकोर्ट के आदेश और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

एनसीपी विवाद और संजय राउत से दूरी

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के आंतरिक विवाद पर संजय राउत की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर लोढ़ा ने खुद को इससे अलग रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के प्रवक्ता इस पर उचित जवाब दे चुके हैं और आगे भी देंगे। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से इस विवाद में प्रवेश करने से इनकार किया, यह कहते हुए कि संजय राउत रोज़ाना बयानबाज़ी करते हैं और हर बयान का जवाब दिया जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार लोढ़ा का यह कदम महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर अनावश्यक खींचतान से बचने की रणनीति को दर्शाता है। आने वाले दिनों में इन आरोप-प्रत्यारोपों के राजनीतिक असर पर नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय राजनीतिक विमर्श के तेज़ी से ध्रुवीकरण का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर विपक्ष-सत्ता संघर्ष चरम पर है। लोढ़ा के बयान में 'विदेशी ताकतों' का अस्पष्ट उल्लेख बिना किसी साक्ष्य के किया गया है, जो इसे आरोप की बजाय राजनीतिक आख्यान-निर्माण के करीब ले जाता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात से चूक जाती है कि यह बयान उस व्यापक भाजपा रणनीति का हिस्सा है जो संवैधानिक संस्थाओं पर हर आलोचना को 'देशविरोधी षड्यंत्र' के फ्रेम में पेश करती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंगल प्रभात लोढ़ा ने राहुल गांधी की तुलना जिन्ना से क्यों की?
लोढ़ा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के ज़रिए वैसी ही अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं जैसी 1945-47 में जिन्ना ने की थी। उनके अनुसार यह संवैधानिक व्यवस्था को तोड़ने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का षड्यंत्र है।
लोढ़ा ने किन विदेशी ताकतों का ज़िक्र किया?
लोढ़ा ने विदेशी ताकतों का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि कुछ विदेशी शक्तियाँ राहुल गांधी की इस कथित मुहिम में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया जाना चाहिए, हालाँकि उन्होंने कोई ठोस साक्ष्य नहीं दिया।
ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर भाजपा का क्या रुख है?
लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार एक संवैधानिक पद पर हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे पदों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि अराजकता फैलाने वाली ताकतों से संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा करना अनिवार्य है।
दीया मिर्जा विवाद में हाईकोर्ट के फैसले पर लोढ़ा का क्या कहना है?
लोढ़ा ने हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हज़ारों वर्षों की धार्मिक परंपराओं और भावनाओं को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि लोगों को दिवाली जैसे त्योहार अपनी परंपराओं के अनुसार मनाने का अधिकार मिलना चाहिए।
एनसीपी के आंतरिक विवाद पर लोढ़ा ने क्या कहा?
लोढ़ा ने एनसीपी के आंतरिक विवाद और संजय राउत की टिप्पणियों पर व्यक्तिगत रूप से कोई टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के प्रवक्ता इस पर उचित जवाब दे रहे हैं और वह इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते।
राष्ट्र प्रेस
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