6 अक्टूबर 2026
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रिजिजू का कांग्रेस पर पलटवार: 'चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर हमले बंद करो, 2014 से चल रहा है यह ड्रामा'

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रिजिजू का कांग्रेस पर पलटवार: 'चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर हमले बंद करो, 2014 से चल रहा है यह ड्रामा'

सारांश

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि 2014 से चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर सवाल उठाने का यह सिलसिला लोकतंत्र को कमज़ोर करता है। उनका यह बयान कांग्रेस के चुनाव आयोग मार्च के बाद आया है — और यह उन गहरे राजनीतिक मतभेदों की झलक है जो संवैधानिक संस्थाओं की साख को दाँव पर लगा रहे हैं।

मुख्य बातें

किरेन रिजिजू ने 6 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग व सर्वोच्च न्यायालय को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
रिजिजू के अनुसार यह राजनीतिक रवैया 2014 से जारी है और लोकतंत्र को कमज़ोर करता है।
उन्होंने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासनकाल और दो वर्ष के आपातकाल का हवाला देते हुए पार्टी से आत्मनिरीक्षण की माँग की।
रिजिजू ने राहुल गांधी को सोशल मीडिया नैरेटिव छोड़कर जनता के बीच जाकर काम करने की नसीहत दी।
उन्होंने कांग्रेस पर कथित भारत विरोधी विदेशी नैरेटिव को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस और राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने का यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए। कांग्रेस के चुनाव आयोग तक मार्च और इस दौरान विपक्षी सांसदों को रोके जाने के विवाद के बीच रिजिजू की यह तीखी प्रतिक्रिया आई है।

मुख्य आरोप: 2014 से जारी है यही राजनीति

रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी रोज़ चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर आरोप लगाते हैं — और यह क्रम 2014 से अनवरत जारी है। उनके अनुसार, जब भी कांग्रेस को जनादेश नहीं मिलता, वह संवैधानिक संस्थाओं को दोषी ठहराने लगती है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इस तरह चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता रहा और सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बावजूद न्यायपालिका पर भरोसा नहीं जताया गया, तो न तो लोकतंत्र मज़बूत होगा और न ही कांग्रेस का राजनीतिक पुनरुत्थान संभव होगा।

राहुल गांधी को मोदी और BJP कार्यकर्ताओं से सीख लेने की नसीहत

केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं की कार्यशैली से प्रेरणा लें, जो उनके अनुसार व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज और देश की सेवा में समर्पित हैं। रिजिजू ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर नैरेटिव चलाने या राजनीतिक आरोपों से जनसमर्थन नहीं मिलता — इसके लिए जनता के बीच जाकर ज़मीनी काम करना होता है।

कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल: आपातकाल और संविधान

रिजिजू ने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान दो वर्ष आपातकाल लगाया गया और संविधान की प्रस्तावना में बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि जो पार्टी आज लोकतंत्र की दुहाई देती है, उसे अपने अतीत का भी आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए एक बड़े विपक्षी मोर्चे का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही है।

'भारत विरोधी ताकतों का नैरेटिव' — रिजिजू की चेतावनी

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कथित तौर पर कुछ विदेशी ताकतें भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए अलग-अलग नैरेटिव चलाती हैं, और कांग्रेस को ऐसे कथित नैरेटिव को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल से एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका की अपेक्षा की जाती है।

रिजिजू का व्यक्तिगत अनुभव और आगे का रास्ता

रिजिजू ने अपने करीब 25 वर्षों के विपक्ष में रहने के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने गाँव-गाँव पैदल जाकर जनता से जुड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि इसी ज़मीनी जुड़ाव से जनविश्वास मिलता है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और युवा नई सोच के साथ आगे आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और NDA के बीच संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय की कई पीठों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर स्वयं सवाल उठाए हैं। आपातकाल का संदर्भ राजनीतिक रूप से प्रभावी है, पर यह उन ठोस संस्थागत सवालों का जवाब नहीं देता जो विपक्ष उठा रहा है। असली बहस यह होनी चाहिए कि क्या संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना लोकतंत्र को कमज़ोर करती है या उसे जवाबदेह बनाती है — और इस बहस को 'ड्रामा' की संज्ञा देना उसे जल्दबाज़ी में खारिज करना है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी 2014 से लगातार चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर निराधार सवाल उठाते आ रहे हैं। उनके अनुसार यह रवैया लोकतंत्र को कमज़ोर करता है और कांग्रेस के राजनीतिक पुनरुत्थान में भी बाधक है।
यह विवाद किस घटना के बाद उभरा?
कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग तक निकाले गए मार्च और इस दौरान विपक्षी सांसदों को रोके जाने की घटना के बाद रिजिजू ने यह बयान दिया। यह बयान 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आया।
रिजिजू ने कांग्रेस के शासनकाल पर क्या कहा?
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस को देश में 55 वर्ष तक शासन करने का मौका मिला, जिसमें दो वर्ष का आपातकाल भी शामिल था जब संविधान की प्रस्तावना में बदलाव किए गए। उन्होंने कांग्रेस से लोकतंत्र की बात करने से पहले अपने इतिहास का आत्मनिरीक्षण करने को कहा।
रिजिजू ने राहुल गांधी को क्या सलाह दी?
रिजिजू ने राहुल गांधी को सोशल मीडिया नैरेटिव और राजनीतिक आरोपों की जगह जनता के बीच जाकर ज़मीनी काम करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि केवल परिवार विशेष में जन्म लेने से नेतृत्व नहीं मिलता, जनसेवा से विश्वास अर्जित करना होता है।
रिजिजू ने 'भारत विरोधी नैरेटिव' को लेकर क्या कहा?
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर कुछ विदेशी ताकतें भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए नैरेटिव चलाती हैं, और कांग्रेस को ऐसे नैरेटिव का साथी नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सबसे पुराने दल से जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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