रिजिजू का कांग्रेस पर पलटवार: 'चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर हमले बंद करो, 2014 से चल रहा है यह ड्रामा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस और राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने का यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए। कांग्रेस के चुनाव आयोग तक मार्च और इस दौरान विपक्षी सांसदों को रोके जाने के विवाद के बीच रिजिजू की यह तीखी प्रतिक्रिया आई है।
मुख्य आरोप: 2014 से जारी है यही राजनीति
रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी रोज़ चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय पर आरोप लगाते हैं — और यह क्रम 2014 से अनवरत जारी है। उनके अनुसार, जब भी कांग्रेस को जनादेश नहीं मिलता, वह संवैधानिक संस्थाओं को दोषी ठहराने लगती है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इस तरह चुनाव आयोग को निशाना बनाया जाता रहा और सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों के बावजूद न्यायपालिका पर भरोसा नहीं जताया गया, तो न तो लोकतंत्र मज़बूत होगा और न ही कांग्रेस का राजनीतिक पुनरुत्थान संभव होगा।
राहुल गांधी को मोदी और BJP कार्यकर्ताओं से सीख लेने की नसीहत
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं की कार्यशैली से प्रेरणा लें, जो उनके अनुसार व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज और देश की सेवा में समर्पित हैं। रिजिजू ने कहा कि केवल सोशल मीडिया पर नैरेटिव चलाने या राजनीतिक आरोपों से जनसमर्थन नहीं मिलता — इसके लिए जनता के बीच जाकर ज़मीनी काम करना होता है।
कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल: आपातकाल और संविधान
रिजिजू ने कांग्रेस के 55 वर्षों के शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान दो वर्ष आपातकाल लगाया गया और संविधान की प्रस्तावना में बदलाव किए गए। उन्होंने कहा कि जो पार्टी आज लोकतंत्र की दुहाई देती है, उसे अपने अतीत का भी आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए एक बड़े विपक्षी मोर्चे का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही है।
'भारत विरोधी ताकतों का नैरेटिव' — रिजिजू की चेतावनी
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कथित तौर पर कुछ विदेशी ताकतें भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए अलग-अलग नैरेटिव चलाती हैं, और कांग्रेस को ऐसे कथित नैरेटिव को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल से एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका की अपेक्षा की जाती है।
रिजिजू का व्यक्तिगत अनुभव और आगे का रास्ता
रिजिजू ने अपने करीब 25 वर्षों के विपक्ष में रहने के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने गाँव-गाँव पैदल जाकर जनता से जुड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि इसी ज़मीनी जुड़ाव से जनविश्वास मिलता है। साथ ही उन्होंने कहा कि देश 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और युवा नई सोच के साथ आगे आ रहे हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और NDA के बीच संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक तनाव एक बार फिर चरम पर है।