किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर हमला: 'PM मोदी से निस्वार्थ सेवा सीखें, ड्रामा बंद करें'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला और कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं से निस्वार्थ सेवा की सीख लेनी चाहिए। यह बयान उस दिन आया जब विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे।
विपक्ष का प्रदर्शन और सरकार की प्रतिक्रिया
'इंडिया' गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च निकाला, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस प्रदर्शन को रिजिजू ने सिरे से 'ड्रामा' करार दिया।
रिजिजू ने कहा, 'हर दिन कांग्रेस पार्टी, राहुल गांधी और उनके सहयोगी यही ड्रामा करते रहते हैं और चुनाव आयोग तथा सुप्रीम कोर्ट पर हमला करते हैं। अब इसे बंद करने का समय आ गया है। यह ड्रामा 2014 से लगातार चल रहा है। आखिर यह कब तक चलेगा?'
राहुल गांधी को सीधी सलाह
रिजिजू ने राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'मैं खास तौर पर राहुल गांधी से कहना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री मोदी से सीखें और BJP कार्यकर्ताओं से सीखें, जो लगातार और निस्वार्थ भाव से अपने लिए नहीं, बल्कि समाज और देश के लिए काम करते हैं। आपको भी ऐसा ही करना चाहिए। यह ड्रामा बंद कीजिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी लगातार जनता की सेवा करेंगे तो लोग उन पर भरोसा करेंगे, जबकि इस तरह का प्रदर्शन और राजनीतिक नैरेटिव उन्हें कोई मदद नहीं देगा। रिजिजू ने यह भी जोड़ा कि उन्होंने स्वयं विपक्ष में रहते हुए 25 वर्षों तक गाँवों में जनसेवा की है।
कांग्रेस पर ऐतिहासिक प्रहार
रिजिजू ने आरोप लगाया कि जो पार्टी लोकतंत्र की दुहाई दे रही है, उसी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में देश पर आपातकाल थोपा और उसी दौरान संविधान की प्रस्तावना में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश पर 55 वर्षों तक शासन करने का अवसर मिला — यह उसी दल का चरित्र है।
गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर यह 'आपातकाल' वाला हमला BJP नेताओं द्वारा बार-बार दोहराया जाने वाला राजनीतिक नैरेटिव है, जिसे विशेष रूप से संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े विवादों के दौरान उठाया जाता है।
संवैधानिक संस्थाओं पर विश्वास का सवाल
रिजिजू ने कहा कि लोकतंत्र में जनता की सेवा करने पर जनादेश मिलता है — जनादेश न मिलने पर चुनाव आयोग को दोष देना और सर्वोच्च न्यायालय पर हमला करना न तो लोकतंत्र को मजबूत करेगा और न ही कांग्रेस को पुनर्जीवित करेगा। उन्होंने चेताया कि चुनाव आयोग और सरकार को 'चोर' कहना किसी भी दल के हित में नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर टकराव गहराता जा रहा है।
विकसित भारत और नई राजनीति का दावा
रिजिजू ने कहा कि देश बदल चुका है और अब 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अब कोई व्यक्ति केवल किसी खास परिवार में जन्म लेने के आधार पर प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह सोशल मीडिया पर नैरेटिव बनाने के बजाय 'सेवा' का मार्ग अपनाए और 'भारत विरोधी ताकतों के नैरेटिव को बढ़ावा देना बंद करे।'