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किशन रेड्डी का राहुल गांधी पर प्रहार: 'संस्थाओं को कमज़ोर करना कांग्रेस की राजनीतिक साज़िश'

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किशन रेड्डी का राहुल गांधी पर प्रहार: 'संस्थाओं को कमज़ोर करना कांग्रेस की राजनीतिक साज़िश'

सारांश

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने राहुल गांधी पर सीधा प्रहार किया — आरोप लगाया कि वे चुनाव आयोग, सीएजी, सर्वोच्च न्यायालय और सेना को केवल तब निशाना बनाते हैं जब फैसले उनके विरुद्ध होते हैं। रेड्डी ने इसे 'राजनीतिक दिवालियेपन' की साज़िश करार दिया।

मुख्य बातें

किशन रेड्डी ने 9 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
रेड्डी ने कहा कि चुनाव आयोग , सीएजी , सर्वोच्च न्यायालय और संसद को बदनाम करना कांग्रेस के 'राजनीतिक दिवालियेपन' का प्रतिबिंब है।
राफेल सौदे पर सीएजी रिपोर्ट को 'चौकीदार महालेखा परीक्षक' कहने की घटना का विशेष उल्लेख किया गया।
आईआईटी , भारतीय सांख्यिकी संस्थान , केंद्रीय विश्वविद्यालयों और भारतीय सेना को निशाना बनाने पर भी आपत्ति जताई गई।
2013 में यूपीए अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़ने और पी.वी.
नरसिम्हा राव के अंतिम संस्कार विवाद का ऐतिहासिक संदर्भ भी दिया गया।

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 9 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की यह प्रवृत्ति बन गई है कि जब संवैधानिक संस्थाएँ उनके पक्ष में काम करती हैं तो वे उन्हें लोकतांत्रिक बताते हैं, और जब विपरीत होती हैं तो उन पर प्रहार करते हैं। रेड्डी ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग, सीएजी, न्यायपालिका और संसद को बदनाम करना कांग्रेस पार्टी के 'राजनीतिक दिवालियेपन' का प्रतिबिंब है।

चुनाव आयोग पर आरोपों का जवाब

केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'यदि देश की जनता आपको बार-बार संवैधानिक रूप से कई चुनावों में नकार रही है क्योंकि उन्हें आप पर विश्वास नहीं है, तो यह चुनाव आयोग की गलती नहीं है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का काम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, न कि किसी पार्टी को जिताना। रेड्डी ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी के मौजूदा आरोप उसी राजनीतिक साज़िश का हिस्सा हैं जो वे वर्षों से चलाते आ रहे हैं।

सर्वोच्च न्यायालय और सीएजी पर टिप्पणी

रेड्डी ने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले राहुल गांधी के पक्ष में नहीं आते, तब उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाना विपक्ष के नेता की ज़िम्मेदारी के साथ 'अपमानजनक' है। उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे का उदाहरण देते हुए कहा कि जब नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट उनके आरोपों के पक्ष में नहीं आई, तो उन्होंने उसे व्यंग्यपूर्वक 'चौकीदार महालेखा परीक्षक' की रिपोर्ट करार दिया। गौरतलब है कि यह देश की सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था पर सीधा प्रहार था।

शिक्षण संस्थानों और सेना पर कथित हमले

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने आईआईटी, भारतीय सांख्यिकी संस्थान और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को भी राजनीतिक आलोचना का निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों को भ्रष्टाचार का केंद्र बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया गया। रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय सशस्त्र बलों और भारतीय सेना को भी इसी रणनीति के तहत बदनाम किया गया है।

विदेशी मंचों के इस्तेमाल पर आपत्ति

रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक विचारों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों, अंतरराष्ट्रीय मंचों और विदेशी मीडिया का इस्तेमाल किया, जिससे भारत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशों में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को लेकर नकारात्मक चित्रण देश के विकास और निवेश में बाधक बनता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सक्रिय कूटनीति चला रहा है।

कांग्रेस के अपने नेताओं पर ऐतिहासिक संदर्भ

केंद्रीय मंत्री ने 2013 की उस घटना का उल्लेख किया जब तत्कालीन यूपीए सरकार के अध्यादेश को राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से फाड़कर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपमानित किया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के निधन पर उनके पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय न ले जाने का भी संदर्भ दिया। रेड्डी ने कहा कि ये घटनाएँ देश की जनता भूली नहीं हैं और यह राहुल गांधी की अपने ही पार्टी नेताओं के प्रति 'लापरवाही का प्रमाण' है। आने वाले समय में इस राजनीतिक वाक्-युद्ध के और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न उसका खंडन। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि क्या इन संस्थाओं की आलोचना के पीछे कोई ठोस आधार भी है। असली सवाल यह है कि सत्तारूढ़ दल की आलोचना और संस्थाओं की आलोचना को एक ही तराजू पर तौलना कितना न्यायसंगत है — यह बहस अभी अनुत्तरित है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशन रेड्डी ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग, सीएजी, सर्वोच्च न्यायालय और संसद जैसी संवैधानिक संस्थाओं को केवल तब निशाना बनाते हैं जब उनके फैसले कांग्रेस के पक्ष में नहीं होते। उन्होंने इसे राजनीतिक लाभ के लिए चलाई जा रही साज़िश करार दिया।
रेड्डी ने चुनाव आयोग को लेकर क्या कहा?
रेड्डी ने कहा कि चुनाव आयोग का काम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, न कि किसी पार्टी या नेता को जिताना। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि जनता का विश्वास जीतना उनकी ज़िम्मेदारी है, न कि चुनाव आयोग की।
राफेल और सीएजी विवाद का इस संदर्भ में क्या उल्लेख किया गया?
रेड्डी ने कहा कि राफेल सौदे पर सीएजी रिपोर्ट जब राहुल गांधी के आरोपों के पक्ष में नहीं आई, तो उन्होंने उसे व्यंग्यपूर्वक 'चौकीदार महालेखा परीक्षक' की रिपोर्ट कहा। उनके अनुसार यह देश की सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था की विश्वसनीयता पर सीधा हमला था।
रेड्डी ने किन शिक्षण संस्थानों का ज़िक्र किया?
रेड्डी ने आईआईटी, भारतीय सांख्यिकी संस्थान और केंद्रीय विश्वविद्यालयों का नाम लेते हुए कहा कि इन्हें भ्रष्टाचार का केंद्र बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास किया गया। उनका आरोप था कि इससे इन वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थानों की साख को नुकसान पहुँचा।
रेड्डी ने 2013 और पी.वी. नरसिम्हा राव का ज़िक्र क्यों किया?
रेड्डी ने 2013 में यूपीए अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़कर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपमानित करने और पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के निधन पर उनके पार्थिव शरीर को पार्टी कार्यालय न ले जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि यह राहुल गांधी की अपने ही नेताओं के प्रति लापरवाही को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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