जी. किशन रेड्डी का राहुल गांधी पर हमला: '1975 का इतिहास पढ़ें, फिर आपातकाल पर बोलें'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता जी. किशन रेड्डी ने 11 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर तीखा प्रहार किया। रेड्डी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार के मौजूदा कदम आंतरिक और बाहरी खतरों से निपटने के लिए महज एहतियाती उपाय हैं — न कि किसी प्रकार की आपातकाल जैसी स्थिति।
मुख्य बयान: 'यह आपातकाल नहीं, एहतियाती कदम है'
रेड्डी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह आपातकाल नहीं है, यह एक एहतियाती कदम है।' उन्होंने आरोप लगाया कि कई देश-विरोधी और अंतरराष्ट्रीय ताकतें मनगढ़ंत और बेबुनियाद मुद्दों का सहारा लेकर भारत को अस्थिर करने की साजिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी से कहना चाहता हूं कि हमें लोकतंत्र या आपातकाल के नाम पर किसी सबक की जरूरत नहीं है।'
1975 के आपातकाल का संदर्भ
रेड्डी ने राहुल गांधी पर सीधे निशाना साधते हुए कांग्रेस को 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के 'काले अध्याय' की याद दिलाई। उन्होंने कहा, 'आप ही लोग थे जिन्होंने 1975 में देश के लोगों के अधिकार छीन लिए थे। बयानों के ज़रिए मीडिया का गला घोंटा था, लाखों लोगों को जेल में डाल दिया था और सभी राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों पर रोक लगा दी थी।' उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को उस दौर की पीड़ा और जनता की तकलीफों का कोई अंदाज़ा नहीं है।
रेड्डी ने यह भी कहा, 'कांग्रेस पार्टी को पहले यह समझना चाहिए कि राहुल गांधी को यह भी नहीं पता कि आपातकाल क्या था। राहुल गांधी को सबसे पहले यह सीखना चाहिए।' गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे विवादास्पद दौर माना जाता है, और BJP समय-समय पर इसे कांग्रेस की 'तानाशाही प्रवृत्ति' के प्रमाण के तौर पर उठाती रही है।
तेलंगाना में विपक्ष पर दमन का आरोप
BJP के वरिष्ठ नेता ने क्षेत्रीय राजनीति की ओर रुख करते हुए राहुल गांधी को सीधे तेलंगाना आने की चुनौती दी। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार BJP को राज्य में एक भी कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं देती।
रेड्डी ने कहा, 'तेलंगाना में हर कार्यक्रम के लिए हमें इजाज़त लेने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ता है, चाहे हम जनहित के मुद्दों पर कोई रचनात्मक और शांतिपूर्ण कार्यक्रम ही क्यों न करना चाहें। हमारे हजारों कार्यकर्ताओं को रात के 1 बजे घर में नज़रबंद कर दिया जाता है।' उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी पहले अपनी सरकार का आचरण देखें और उसके बाद दिल्ली की बात करें।
सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब केंद्र और विपक्ष के बीच सुरक्षा उपायों और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर तनाव चरम पर है। कांग्रेस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं है जब BJP ने कांग्रेस की आलोचना का जवाब देने के लिए 1975 के आपातकाल का संदर्भ दिया हो — यह रणनीति BJP की दीर्घकालिक राजनीतिक लामबंदी का हिस्सा रही है।
आगे क्या
रेड्डी के बयानों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया आने की संभावना है, विशेष रूप से तेलंगाना में विपक्ष पर दमन के आरोपों को लेकर। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकाल का मुद्दा आगामी चुनावी मौसम में दोनों दलों के बीच एक प्रमुख विवाद बिंदु बना रहेगा।