प्रकाश रेड्डी का केजरीवाल पर हमला: इमरजेंसी का इतिहास नहीं, कांग्रेस से समर्थन लेकर बने थे CM
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रकाश रेड्डी ने 11 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद से आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल पर तीखा पलटवार किया। रेड्डी ने कहा कि केजरीवाल को आपातकाल (इमरजेंसी) का वास्तविक इतिहास ज्ञात नहीं है और उन्हें इस विषय पर वरिष्ठ नेताओं से जानकारी लेनी चाहिए। यह प्रतिक्रिया मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के संदर्भ में आई है।
विरोध प्रदर्शन पर BJP का रुख
प्रकाश रेड्डी ने कहा कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पहले हुए प्रदर्शनों को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने सीजेपी (CJP) के इस विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। दिल्ली पुलिस ने भी इसे अनुमति देने से इनकार किया था। उनके अनुसार, ऐसे में आयोजकों को प्रदर्शन रद्द कर देना चाहिए था। उन्होंने कहा, 'यदि प्रदर्शनकारियों को भारतीय संविधान और व्यवस्था पर थोड़ा भी भरोसा होता, तो वे यह आंदोलन वापस ले लेते।'
केजरीवाल पर इमरजेंसी ज्ञान का सवाल
रेड्डी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल आपातकाल के दौर में सक्रिय नेता नहीं थे, इसलिए संभव है कि उन्हें उस काल की घटनाओं की पूरी जानकारी न हो। उन्होंने केजरीवाल को सलाह दी कि वे वरिष्ठ नेताओं से मिलकर जानें कि 1975-77 के आपातकाल में वास्तव में क्या हुआ था। रेड्डी ने आरोप लगाया कि उस दौरान कांग्रेस ने संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया था।
कांग्रेस समर्थन और केजरीवाल के सीएम बनने का जिक्र
BJP नेता ने केजरीवाल के राजनीतिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि वे वर्ष 2013 में कांग्रेस के बाहरी समर्थन से दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे। रेड्डी ने इसे लेकर केजरीवाल के वर्तमान राजनीतिक रुख को विरोधाभासी बताया और कहा कि जो दल आज कांग्रेस की नीतियों की आलोचना करते हैं, उन्हीं के समर्थन से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था।
पिनाराई विजयन की हिरासत और वामपंथी दलों पर आरोप
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जाते वक्त केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को हिरासत में लिया गया था। रेड्डी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने यह कदम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया। उन्होंने सीपीआई (एम), सीपीआई और AAP द्वारा इस आंदोलन को समर्थन दिए जाने पर भी आपत्ति जताई।
विपक्षी एकता पर BJP का आरोप
रेड्डी ने आरोप लगाया कि इन दलों की वैचारिक दिशा एक जैसी है और ये मिलकर भारतीय लोकतंत्र, देश की अखंडता तथा राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने सीजेपी को एक ऐसे दल के रूप में वर्णित किया जिसकी पहचान और सदस्यता मुख्यतः सोशल मीडिया तक सीमित है। गौरतलब है कि CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष पहले से ही पक्षपात के आरोप लगाता रहा है, जिसे वे और सरकार दोनों नकारते रहे हैं।
यह टकराव ऐसे समय में आया है जब CEC की नियुक्ति और चुनावी स्वायत्तता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठा सकता है।