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एनसीईआरटी पाठ्यक्रम विवाद: कांग्रेस बोली — एकतरफा इतिहास नहीं, सब कुछ पढ़ाओ

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एनसीईआरटी पाठ्यक्रम विवाद: कांग्रेस बोली — एकतरफा इतिहास नहीं, सब कुछ पढ़ाओ

सारांश

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पुस्तक में आपातकाल पर अध्याय जोड़े जाने से नई दिल्ली में सियासी तूफान आ गया है। कांग्रेस एकतरफा इतिहास का आरोप लगा रही है, BJP इसे लोकतांत्रिक शिक्षा की ज़रूरत बता रही है — असली सवाल यह है कि पाठ्यपुस्तकें तय कौन करे और किसके हित में।

मुख्य बातें

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) और चुनाव आयोग पर नए अध्याय शामिल किए हैं।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने एकतरफा इतिहास पढ़ाने का विरोध किया और बिहार चुनाव में ₹10,000 के कथित ट्रांसफर का मुद्दा उठाया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि पाठ्यक्रम में बच्चों को विशेष वैचारिक दिशा में ढालने का प्रयास हो रहा है।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल और प्रवक्ता आर.पी.
सिंह ने बदलावों का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक शिक्षा के लिए ज़रूरी बताया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर भी BJP ने निशाना साधा।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) पर नया अध्याय जोड़े जाने के बाद नई दिल्ली में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस कदम को ऐतिहासिक सच्चाई से छात्रों को अवगत कराने की पहल बता रही है, जबकि विपक्षी कांग्रेस का आरोप है कि पाठ्यक्रम में केवल चुनिंदा घटनाएँ शामिल की जा रही हैं।

कांग्रेस का पक्ष: संतुलित इतिहास की माँग

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि यदि नई पीढ़ी को इमरजेंसी के बारे में पढ़ाया जा रहा है, तो अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को भी पाठ्यक्रम में स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा, 'केवल एकपक्षीय इतिहास नहीं पढ़ाया जाना चाहिए, बल्कि हाल के वर्षों में हुई घटनाओं पर भी चर्चा होनी चाहिए।'

मनोज कुमार ने BJP सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, 'आप अब युवा पीढ़ी को इमरजेंसी के बारे में बताने की कोशिश कर रहे हैं। मैं यह पूछना चाहता हूं कि एक और बात भी जोड़ी जानी चाहिए कि बिहार में चुनाव कैसे हुए और आपने चुनाव में कैसे धांधली की। चुनाव के दौरान आपने सरकारी खजाने से लोगों के बैंक खातों में 10,000-10,000 रुपये ट्रांसफर किए और चुनाव को प्रभावित किया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि मध्य प्रदेश और झारखंड में चुनाव आचरण को लेकर भी सवाल उठाए जाने चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के बयान के संदर्भ में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में वैज्ञानिक सोच और तार्किक दृष्टिकोण विकसित करना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान शैक्षणिक ढाँचे में बच्चों को एक विशेष वैचारिक दिशा में ढालने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।

BJP का बचाव: लोकतांत्रिक शिक्षा की ज़रूरत

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने एनसीईआरटी द्वारा चुनाव आयोग (ECI) पर शामिल किए गए अध्याय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय कदम है क्योंकि इससे छात्रों को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। खंडेलवाल ने कहा कि अब तक कई ऐसी बातें पढ़ाई जाती थीं जो देश के हित में नहीं थीं, इसलिए पाठ्यक्रम में सुधार आवश्यक था।

BJP प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि जब छात्र 18 वर्ष के होकर मतदान के योग्य बनेंगे, तब उनके पास चुनावी प्रक्रिया की बेहतर समझ होगी, जिससे वे एक जिम्मेदार मतदाता बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि कक्षा 9 की पुस्तक में चुनाव आयोग पर शामिल अध्याय विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी है।

राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर भी तकरार

इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी बिना पूर्व सूचना के विदेश गए हों और उनकी यात्राओं को लेकर अक्सर स्पष्टता नहीं होती।

विवाद का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर यह पहली बार नहीं है कि सियासी घमासान मचा हो। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में इतिहास की पाठ्यपुस्तकों की सामग्री और उनकी निष्पक्षता पर बहस तेज़ है। आलोचकों का कहना है कि पाठ्यक्रम निर्माण में राजनीतिक हस्तक्षेप शैक्षणिक स्वायत्तता के लिए खतरा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे दीर्घकालीन सुधार की प्रक्रिया बताता है। यह विवाद आने वाले समय में संसद के भीतर और बाहर और अधिक तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो असली पीड़ित वह छात्र होता है जिसे निष्पक्ष और समग्र शिक्षा मिलनी चाहिए। एनसीईआरटी की स्वायत्तता पर सवाल उठना ज़रूरी है — क्योंकि जब पाठ्यक्रम बदलाव संसद की बहस का विषय बन जाए, तो यह शैक्षणिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक संकेत है। कांग्रेस की 'संतुलित इतिहास' की माँग तब तक विश्वसनीय नहीं लगती जब तक वह अपने शासनकाल के विवादास्पद पाठ्यक्रम निर्णयों पर भी जवाब दे।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में क्या बदलाव किए हैं?
एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में आपातकाल (इमरजेंसी) और चुनाव आयोग पर नए अध्याय शामिल किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को देश के लोकतांत्रिक इतिहास और चुनावी प्रक्रिया से अवगत कराना बताया गया है।
कांग्रेस एनसीईआरटी के इस बदलाव का विरोध क्यों कर रही है?
कांग्रेस का कहना है कि पाठ्यक्रम में केवल एकतरफा इतिहास शामिल किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने माँग की कि यदि इमरजेंसी पढ़ाई जाए, तो हाल के वर्षों की अन्य विवादास्पद घटनाएँ भी पाठ्यक्रम में जोड़ी जाएँ।
BJP ने एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम बदलाव का समर्थन क्यों किया?
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल और प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा कि इन अध्यायों से छात्रों को लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान प्रक्रिया की बेहतर समझ मिलेगी। उनका तर्क है कि 18 वर्ष की आयु में मतदाता बनने से पहले छात्रों को यह ज्ञान होना ज़रूरी है।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम विवाद में राहुल गांधी का नाम क्यों आया?
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने इसी बहस के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी अक्सर बिना पूर्व सूचना के विदेश चले जाते हैं और उनकी अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं होती।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलाव का छात्रों पर क्या असर होगा?
नए अध्यायों से कक्षा 9 के छात्रों को आपातकाल के इतिहास और चुनाव आयोग की भूमिका की जानकारी मिलेगी। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि पाठ्यक्रम में राजनीतिक हस्तक्षेप शैक्षणिक निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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