इमरजेंसी पर NCERT अध्याय: आव्हाड बोले — इतिहास एकपक्षीय न हो, RSS की भूमिका भी दर्ज हो
सारांश
मुख्य बातें
एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने 25 जून 2025 को मुंबई में स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों में इमरजेंसी से जुड़े अध्याय को शामिल करना गलत नहीं है, लेकिन इतिहास को केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास में हर उस व्यक्ति और संगठन की भूमिका भी दर्ज होनी चाहिए जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को प्रभावित किया — चाहे वह समर्थन में हो या विरोध में।
आव्हाड का रुख: इतिहास पूरा पढ़ाओ, आधा नहीं
आव्हाड ने कहा कि इतिहास में यह भी दर्ज होना चाहिए कि किसने ब्रिटिश शासन का समर्थन किया, किसने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया और किन लोगों ने अंग्रेजों से माफी मांगी। उनके अनुसार, जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि देश के इतिहास के हर दौर में किसकी क्या भूमिका रही। आव्हाड ने यह भी माना कि इमरजेंसी एक गलती थी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वयं इसे स्वीकार किया था।
यह ऐसे समय में आया है जब 25 जून को इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर देशभर में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। गौरतलब है कि एनसीईआरटी ने हाल ही में कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इमरजेंसी काल को विस्तार से शामिल किया है, जिसे लेकर विपक्षी दलों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं।
लोकसभा स्पीकर पर आव्हाड का कटाक्ष
शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर दल-बदल कानून के तहत बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग के सवाल पर आव्हाड ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'ओम बिरला और न्याय देंगे। बिरला और न्याय का कोई संबंध है क्या।' यह टिप्पणी स्पीकर की निष्पक्षता पर सीधा सवाल उठाती है और सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति विपक्ष के गहरे अविश्वास को दर्शाती है।
नीलम गोर्हे का समर्थन: लोकतंत्र की रक्षा के लिए ज़रूरी है यह अध्याय
शिवसेना एमएलसी नीलम गोर्हे ने एनसीईआरटी के इस फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी का दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय था जब तानाशाही जैसी स्थिति पैदा हो गई थी — लोगों को बिना स्पष्ट कारण के गिरफ्तार किया जाता था और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे। गोर्हे के अनुसार, नई पीढ़ी को इस काल की जानकारी होना इसलिए ज़रूरी है ताकि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं का महत्व समझ सकें।
स्पीकर पर गोर्हे का भरोसा
शिवसेना यूबीटी सांसदों को लोकसभा स्पीकर से न्याय मिलने की उम्मीद के सवाल पर गोर्हे ने कहा कि ओम बिरला एक अनुभवी व्यक्ति हैं और जो भी निर्णय होगा, वह नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार लिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि स्पीकर वही फैसला करेंगे जो उचित होगा — एक रुख जो आव्हाड की तीखी टिप्पणी से बिल्कुल अलग है।
इमरजेंसी की वर्षगांठ पर यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, खासकर जब विधानसभा और संसद के सत्र नज़दीक हों।