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आपातकाल के 51 साल: भाजपा विधायक संजय गुप्ता बोले — इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए रौंदा लोकतंत्र

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आपातकाल के 51 साल: भाजपा विधायक संजय गुप्ता बोले — इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए रौंदा लोकतंत्र

सारांश

आपातकाल की 51वीं बरसी पर BJP विधायक संजय गुप्ता ने पटना में कहा — इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र को रौंदा, मौलिक अधिकार छीने और निर्दोषों को जेल भेजा। साथ ही भरत तिवारी एनकाउंटर पर न्यायिक जाँच और पुलिसकर्मियों के निलंबन का बचाव किया।

मुख्य बातें

BJP विधायक संजय गुप्ता ने 25 जून 2025 को पटना में 'संविधान हत्या दिवस' पर आपातकाल को लोकतंत्र का 'काला अध्याय' बताया।
गुप्ता के अनुसार, 1975 का आपातकाल राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं, बल्कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद इंदिरा गांधी की सत्ता बचाने की कोशिश थी।
आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का हनन, बिना प्रक्रिया के गिरफ्तारियाँ और न्यायालय जाने के अधिकार पर रोक लगाई गई।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जाँच की घोषणा हुई और संबंधित पुलिसकर्मी निलंबित ।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की आलोचना पर गुप्ता का पलटवार — NDA सरकार जीरो टॉलरेंस और सुशासन पर चलती है।

पटना में 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक संजय गुप्ता ने 25 जून 2025 को कहा कि आज से ठीक 51 वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस सरकार ने सत्ता के लोभ में देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र की आत्मा को कुचल दिया था। उनके अनुसार, यह दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है।

आपातकाल क्यों लगा — असली कारण

संजय गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 1975 का आपातकाल न तो राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत थी, न ही किसी विदेशी आक्रमण की प्रतिक्रिया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के संसदीय निर्वाचन को अवैध ठहराए जाने के बाद, सत्ता बचाने की नीयत से यह असंवैधानिक कदम उठाया गया। उनके शब्दों में, यह 'सत्ता लोलुपता और अनैतिक कारणों' से लादा गया आपातकाल था।

मौलिक अधिकारों का हनन और दमन

गुप्ता ने बताया कि आपातकाल के दौरान राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के जेलों में ठूँस दिया गया और उन्हें यातनाएँ दी गईं। उन्होंने कहा कि नागरिकों से न्यायालय जाने का अधिकार तक छीन लिया गया था — जो संविधान की मूल भावना के सीधे विरुद्ध था। गुप्ता ने इस दिन को याद करने का उद्देश्य बताते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी तानाशाही दोबारा न पनपे, इसके लिए यह स्मरण ज़रूरी है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर प्रतिक्रिया

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भी संजय गुप्ता ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए न्यायिक जाँच की घोषणा की है और संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जाँच पूरी होने पर सच्चाई सामने आएगी।

भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी के उस बयान पर — कि तीन दिन में न्याय न मिला तो वे सड़क पर उतरेंगे — गुप्ता ने कहा कि सरकार न्याय देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित की जा रही है।

तेजस्वी यादव पर पलटवार

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने कहा कि 'जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार न्याय, विकास और सुशासन के सिद्धांत पर चलती है और यहाँ जीरो टॉलरेंस की नीति लागू है — जो पिछली सरकारों से इसे अलग करती है।

आगे क्या

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जाँच जारी है और उसके निष्कर्ष सार्वजनिक होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं, 'संविधान हत्या दिवस' की राजनीतिक प्रासंगिकता को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका असली मकसद कांग्रेस को 1975 की विरासत से जोड़े रखना है। लेकिन इस बार भरत तिवारी एनकाउंटर के साथ इसका जोड़ना दिलचस्प है — एक तरफ 1975 में सत्ता के दुरुपयोग की निंदा, दूसरी तरफ अपनी सरकार के पुलिस एनकाउंटर का बचाव। आलोचक पूछ सकते हैं कि जीरो टॉलरेंस की नीति एनकाउंटर से पहले क्यों नहीं दिखी। न्यायिक जाँच और निलंबन स्वागत योग्य कदम हैं, पर जवाबदेही की असली परीक्षा उनके निष्कर्षों में होगी।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संविधान हत्या दिवस' क्या है और यह 25 जून को क्यों मनाया जाता है?
'संविधान हत्या दिवस' 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल की वर्षगाँठ पर मनाया जाता है। BJP इस दिन को लोकतंत्र पर हुए उस हमले की याद के रूप में चिह्नित करती है, जब मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे।
1975 का आपातकाल किस कारण लगाया गया था?
BJP विधायक संजय गुप्ता के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी के संसदीय निर्वाचन को अवैध ठहराया था, जिसके बाद सत्ता बचाने के लिए आपातकाल लागू किया गया। यह राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी आक्रमण की स्थिति नहीं थी।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
संजय गुप्ता के बयान के अनुसार, इस मामले में न्यायिक जाँच की घोषणा की गई है और इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
काशीनाथ तिवारी ने क्या माँग रखी है?
भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने कहा है कि यदि तीन दिन में न्याय नहीं मिला तो वे सड़क पर उतरेंगे। BJP विधायक संजय गुप्ता ने आश्वस्त किया है कि सरकार निष्पक्ष जाँच के लिए प्रतिबद्ध है।
तेजस्वी यादव और BJP के बीच इस मुद्दे पर क्या विवाद है?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर सरकार की आलोचना की, जिस पर संजय गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि 'शीशे के घरों में रहने वाले दूसरों पर पत्थर न फेंकें।' गुप्ता ने NDA सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए पिछली सरकारों के कार्यकाल से तुलना की।
राष्ट्र प्रेस
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