इमरजेंसी की 51वीं बरसी: दिलीप जायसवाल बोले — जनता न भूले 1975 का काला अध्याय, इसीलिए BJP मनाती है संविधान हत्या दिवस
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने 25 जून 2026 को पटना में इमरजेंसी की 51वीं बरसी के अवसर पर कहा कि 1975 में कांग्रेस शासन में लोकतंत्र के साथ जो हुआ, उसे देश कभी नहीं भूल सकता और इसीलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर वर्ष 'संविधान हत्या दिवस' मनाती है। इसके साथ ही उन्होंने नीट की दोबारा परीक्षा के सफल आयोजन और भरत तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी।
इमरजेंसी और संविधान हत्या दिवस
जायसवाल ने कहा, "जून 1975 का दौर कांग्रेस और इंदिरा गांधी के कार्यकाल का एक काला अध्याय है, जब लोकतंत्र की हत्या की गई थी — उसको देश कभी नहीं भूल सकता।" उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्षों तक हिंसा की खबरें आने के बावजूद BJP और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने वहां की चुनी हुई सरकार को नहीं गिराया और न ही राष्ट्रपति शासन लगाया। उनके अनुसार यह तुलना 1975 की उस घटना को और स्पष्ट करती है जब जनता के अधिकार सीधे छीन लिए गए थे।
गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 महीनों तक चली। केंद्र सरकार ने इस तिथि को आधिकारिक रूप से 'संविधान हत्या दिवस' घोषित किया है।
नीट पुनर्परीक्षा का सफल आयोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीट की दोबारा परीक्षा की पूरी टीम की सराहना किए जाने पर जायसवाल ने कहा कि इस मामले में गलत जानकारी फैलाने के लिए विदेशी एजेंसियों समेत इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया था। उन्होंने कहा, "140 करोड़ की आबादी वाले इतने बड़े देश में इस परीक्षा का सफल आयोजन वाकई तारीफ के काबिल है।"
भरत तिवारी हत्याकांड: न्यायिक जांच को मंजूरी
बिहार कैबिनेट ने भरत तिवारी हत्याकांड की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की नियुक्ति को बुधवार की कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी। जायसवाल ने कहा, "हाईकोर्ट के जज अब इस मामले की जांच करेंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।"
NCERT पाठ्यक्रम में वेदों का समावेश
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में वेदों को शामिल किए जाने पर जायसवाल ने कहा, "देश की सनातन संस्कृति को पढ़ना अच्छी बात है। अगर हम अपनी संस्कृति को भूल जाएंगे तो देश कैसे बचेगा।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब NCERT के पाठ्यक्रम में बदलावों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज़ होने की संभावना है।