25 जून: आपातकाल का काला अध्याय — रामकृपाल यादव बोले, इंदिरा गांधी ने छीना था लोकतांत्रिक हक
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने 25 जून को संविधान हत्या दिवस पर कहा कि यह तारीख देश के इतिहास में एक काला अध्याय के रूप में दर्ज है, क्योंकि इसी दिन कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू कर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार छीन लिए थे। उन्होंने यह बात पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कही।
संविधान हत्या दिवस पर मंत्री की प्रतिक्रिया
रामकृपाल यादव ने कहा, 'आज का दिन इतिहास में काला दिन है। इसी दिन कांग्रेस पार्टी की इंदिरा गांधी ने सारी मर्यादाओं को लांघकर जबरदस्ती आपातकाल लागू किया और लोगों का लोकतांत्रिक हक छीन लिया था।' उन्होंने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में पूरे देश में आज काला दिवस मनाया जा रहा है। पटना के ज्ञानभवन में आयोजित कार्यक्रम में BJP अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी शामिल होने वाले हैं।
जेपी नड्डा के पटना दौरे का महत्व
नड्डा के दौरे पर रामकृपाल यादव ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के रूप में जगत प्रकाश नड्डा कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि नड्डा का पटना से विशेष लगाव है क्योंकि उनका जन्म यहीं हुआ था और उन्होंने यहीं से पढ़ाई की, इसके बाद वे अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश गए और वहाँ अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।
भरत तिवारी एनकाउंटर: न्यायिक जांच का आदेश
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कैबिनेट बैठक में इस मामले की न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'न्यायिक जांच होगी और जो भी इस मामले में संलिप्त पाए जाएंगे, उन्हें सजा मिलेगी।' इससे पहले प्रथम दृष्टया जांच में एसडीपीओ और थानेदार की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, जिसके आधार पर उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है।
तेजस्वी यादव के बयान पर पलटवार
विपक्षी नेता तेजस्वी यादव द्वारा इसे 'फेक एनकाउंटर' बताए जाने पर रामकृपाल यादव ने कहा, 'तेजस्वी यादव की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। वह प्रतिपक्ष में हैं, तो कुछ न कुछ बोलेंगे ही।' उन्होंने दावा किया कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार में कानून का राज स्थापित हो रहा है और जो भी पुलिस को चुनौती देगा, उसे कड़ी सजा मिलेगी।
आगे क्या होगा
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच के बाद ही अंतिम सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का केंद्र बना हुआ है।