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आपातकाल लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा प्रहार था: जेपी नड्डा का पटना में आक्रामक हमला

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आपातकाल लोकतंत्र और संविधान पर सबसे बड़ा प्रहार था: जेपी नड्डा का पटना में आक्रामक हमला

सारांश

आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर पटना में BJP का 'संविधान हत्या दिवस' — केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 1975 की उस रात को लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताया और कांग्रेस से माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने 25 जून 2025 को पटना में 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम को संबोधित किया।
उनके दावे के अनुसार, आपातकाल के दौरान 1.31 लाख लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाला गया।
1.10 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई; 80 लाख मामले अकेले 1975-76 में।
दिल्ली में 1.50 लाख मकान ध्वस्त, 7 लाख बेघर, 300 से अधिक पत्रकार जेल में बंद रहे।
42वें संविधान संशोधन से जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 से 6 वर्ष किया गया।
नड्डा ने कांग्रेस से आपातकाल के लिए देश से माफी माँगने की माँग की।

केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने 25 जून 2025 को पटना में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम में कहा कि 25 जून 1975 को लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार था। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की इस लड़ाई की जड़ें बिहार और पटना की मिट्टी में हैं, इसलिए इस आयोजन का ऐतिहासिक महत्व और भी गहरा है।

पटना आयोजन का ऐतिहासिक संदर्भ

नड्डा ने कहा कि देशभर में BJP की ओर से 'संविधान हत्या दिवस' पर कार्यक्रम हो रहे हैं, परंतु पटना का यह आयोजन विशेष है। उनके अनुसार, गांधी मैदान — जो ज्ञान भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित है — उस ऐतिहासिक जनांदोलन का साक्षी है, जहाँ 5 जून 1974 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि 18 मार्च 1974 और 5 जून 1974 की घटनाएँ उस जनांदोलन की नींव के पत्थर साबित हुईं। नड्डा ने स्वयं स्वीकार किया कि वे छात्र जीवन में इस आंदोलन का हिस्सा रहे और उस दौर के प्रत्यक्षदर्शी हैं।

आपातकाल के दौरान हुए अत्याचार

नड्डा ने आपातकाल काल के दौरान हुई ज्यादतियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उनके दावों के अनुसार, उस दौरान 1.31 लाख लोगों को बिना किसी न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाला गया। उन्होंने यह भी कहा कि 1.10 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी कराई गई, जिनमें से करीब 80 लाख मामले अकेले 1975-76 में हुए। इसके अलावा, दिल्ली में 1.50 लाख मकान तोड़े गए और 7 लाख लोग बेघर हुए, जबकि 300 से अधिक पत्रकार जेलों में बंद रहे। उन्होंने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई और नागरिक अधिकारों को पूरी तरह कुचल दिया गया।

संविधान संशोधन और सत्ता का दुरुपयोग

नड्डा ने आरोप लगाया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी अनियमितताओं का दोषी ठहराए जाने के बाद सत्ता बचाने के लिए आपातकाल थोपा गया, जो करीब 21 महीने तक चला। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान 42वाँ संविधान संशोधन लाकर जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया और कई संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से ऊपर रखने की कोशिश की गई।

कांग्रेस पर सीधा निशाना

नड्डा ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान बचाने की बात करते हैं, उन्हें पहले आपातकाल के लिए देश से माफी माँगनी चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल संविधान की रक्षा को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं।

नई पीढ़ी को जागरूक करने का संकल्प

नड्डा ने जेपी आंदोलन के सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि 'संविधान हत्या दिवस' मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति सजग बनाना है। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन ने लोकतंत्र पर हुए इस प्रहार का मुंहतोड़ जवाब दिया था, यह याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि वह संघर्ष आज भी प्रासंगिक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आयोजन उस आख्यान को पलटने की कोशिश है। नड्डा के आँकड़े — 1.31 लाख गिरफ्तारियाँ, 1.10 करोड़ नसबंदियाँ — स्रोत-आधारित हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है। असली सवाल यह है कि क्या यह स्मरण केवल चुनावी हथियार है, या इसके साथ नागरिक स्वतंत्रता की संस्थागत सुरक्षा की कोई ठोस प्रतिबद्धता भी जुड़ती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संविधान हत्या दिवस' क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है?
'संविधान हत्या दिवस' प्रतिवर्ष 25 जून को मनाया जाता है — उस तारीख की याद में जब 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया था। BJP इस दिन को लोकतंत्र और संविधान पर हुए हमले के प्रतीक के रूप में मनाती है और नई पीढ़ी को उस दौर से अवगत कराने का लक्ष्य रखती है।
1975 के आपातकाल के दौरान कितने लोग प्रभावित हुए थे?
जेपी नड्डा के दावों के अनुसार, आपातकाल के दौरान 1.31 लाख लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेल में डाला गया, 1.10 करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी हुई, दिल्ली में 1.50 लाख मकान तोड़े गए और 300 से अधिक पत्रकार कारावास में रहे। ये आँकड़े BJP नेताओं द्वारा उद्धृत किए गए हैं।
42वाँ संविधान संशोधन क्या था और आपातकाल से इसका क्या संबंध है?
आपातकाल के दौरान लाए गए 42वें संविधान संशोधन ने जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया और कई संवैधानिक पदों को न्यायिक समीक्षा से ऊपर रखने का प्रयास किया। आलोचकों ने इसे संविधान की मूल भावना के विरुद्ध बताया था।
जेपी नड्डा ने कांग्रेस से क्या माँग की?
नड्डा ने कांग्रेस से माँग की कि जो लोग आज संविधान बचाने की बात करते हैं, उन्हें पहले 1975 के आपातकाल के लिए देश से सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपातकाल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले के बाद थोपा गया जिसमें इंदिरा गांधी को चुनावी अनियमितताओं का दोषी ठहराया गया था।
बिहार और पटना का आपातकाल विरोधी आंदोलन में क्या महत्व है?
नड्डा के अनुसार, लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई की नींव बिहार में पड़ी, जहाँ 5 जून 1974 को गांधी मैदान, पटना में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था। 18 मार्च 1974 और 5 जून 1974 की घटनाएँ उस जनांदोलन की आधारशिला बनीं जिसने अंततः आपातकाल को समाप्त कराने में भूमिका निभाई।
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