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1975 आपातकाल की 50वीं बरसी: भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर साधा निशाना, जेल-यातनाओं का किया उल्लेख

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1975 आपातकाल की 50वीं बरसी: भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर साधा निशाना, जेल-यातनाओं का किया उल्लेख

सारांश

आपातकाल की बरसी से एक दिन पहले भाजपा ने कांग्रेस पर सबसे तीखा हमला बोला। संजय टंडन और मुख्तार अब्बास नकवी ने 1975 की जेल-यातनाओं, जबरन नसबंदियों और संविधान संशोधन का हवाला देते हुए कांग्रेस से माफी माँगने की माँग की।

मुख्य बातें

भाजपा नेता संजय टंडन ने 25 जून 1975 को 'लोकतंत्र का काला दिवस' बताया और कांग्रेस पर प्रेस दमन व जबरन नसबंदी के आरोप लगाए।
मीसा (MISA) के तहत राजनीतिक व्यक्तियों को 19 महीने तक जेल में रखे जाने का उल्लेख किया गया।
टंडन ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द किए जाने के बाद आपातकाल लगाया गया और संविधान में संशोधन कर शीर्ष पदों के चुनावों को न्यायिक चुनौती से परे कर दिया गया।
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने दावा किया कि वे स्वयं 17 वर्ष की आयु में जेल में थे और 'लाखों लोगों की हत्या' हुई।
नकवी ने कांग्रेस नेताओं से माँग की कि वे संविधान की आड़ लेने से पहले देश से माफी माँगें।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने 25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल की बरसी से एक दिन पहले, 24 जून 2026 को, कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। नेताओं ने आरोप लगाया कि उस दौर में लोकतंत्र का गला घोंटा गया, प्रेस की आज़ादी कुचली गई और लाखों नागरिकों को बिना मुकदमे के जेलों में ठूँसा गया।

मुख्य घटनाक्रम

हिमाचल भाजपा के सह-इंचार्ज संजय टंडन ने कहा कि 25 जून का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक 'काला दिवस' है। उन्होंने कहा, 'इस दिन एक फरमान जारी कर प्रेस को दबा दिया गया, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र के आवाज़ उठाने वाले लोगों को पकड़कर जेलों में भर दिया गया।' टंडन के अनुसार, मीसा (MISA) के तहत राजनीतिक व्यक्तियों को 19 महीने तक जेल में रखा गया और जबरन नसबंदियाँ भी की गईं।

टंडन ने यह भी कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया था। उनके अनुसार, गांधी के पास विकल्प था कि वे पद छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय में अपना मुकदमा लड़तीं, किंतु इसके बजाय उन्होंने आपातकाल की घोषणा कर दी और संविधान में संशोधन करके राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के चुनावों को न्यायिक समीक्षा से परे कर दिया।

नकवी का बयान

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि 25 जून की आधी रात को 'कुर्सी बचाने के लिए संविधान की हत्या करने की कोशिश की गई थी।' उन्होंने यह भी दावा किया कि वे स्वयं 17 वर्ष की आयु में जेल में बंद थे। नकवी के अनुसार, 'लाखों लोगों को जेल में डाला गया और लाखों लोगों की हत्या कर दी गई।' उन्होंने कांग्रेस से माँग की कि जो नेता आज संविधान लेकर घूमते हैं, वे देश से माफी माँगें।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर से आपातकाल की घोषणा करवाई थी, जो 21 महीने तक — मार्च 1977 तक — जारी रही। यह भारत के संसदीय इतिहास का सबसे विवादास्पद अध्याय माना जाता है। मीसा (आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम) के तहत हज़ारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के हिरासत में लिया गया था।

कांग्रेस पर भाजपा का राजनीतिक हमला

भाजपा नेताओं का यह हमला ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार संविधान की रक्षा को अपना प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रही है। टंडन ने कहा, 'लोकतंत्र की हत्या करना कांग्रेस पार्टी की बुनियाद ही रही है।' आलोचकों का कहना है कि भाजपा हर साल इस तारीख का उपयोग कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने के लिए करती है।

आगे क्या

25 जून 2026 को आपातकाल की बरसी पर देशभर में भाजपा और उसके सहयोगी दल 'संविधान बचाओ दिवस' या 'लोकतंत्र बचाओ दिवस' के रूप में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी में हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ठीक उस समय जब कांग्रेस खुद को संविधान-रक्षक के रूप में पेश कर रही है। नकवी का 'लाखों हत्याओं' वाला दावा स्रोत-सत्यापन की माँग करता है, क्योंकि ऐतिहासिक अभिलेखों में आपातकाल के दौरान हिरासत और यातनाएँ दर्ज हैं, लेकिन इस पैमाने पर मौतों का कोई सर्वसम्मत आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। विडंबना यह है कि जो पार्टी आज लोकतंत्र की दुहाई दे रही है, उस पर भी विपक्ष संस्थागत दमन के आरोप लगाता रहा है — इसलिए यह बहस केवल इतिहास की नहीं, वर्तमान की भी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1975 का आपातकाल क्या था और इसे क्यों लगाया गया था?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी, जो मार्च 1977 तक — लगभग 21 महीने — जारी रही। इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उनके चुनाव को रद्द किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया था। इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए और हज़ारों विरोधियों को मीसा के तहत बिना मुकदमे के जेल में डाला गया।
मीसा (MISA) क्या था और इसका आपातकाल से क्या संबंध है?
मीसा यानी 'आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम' एक निवारक हिरासत कानून था जिसके तहत सरकार किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में ले सकती थी। आपातकाल के दौरान इसका व्यापक उपयोग राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को दबाने के लिए किया गया। भाजपा नेता संजय टंडन के अनुसार इसके तहत राजनीतिक व्यक्तियों को 19 महीने तक जेल में रखा गया।
भाजपा नेताओं ने 24 जून 2026 को कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा के संजय टंडन ने आरोप लगाया कि 1975 में प्रेस को दबाया गया, जबरन नसबंदियाँ की गईं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जेलों में यातनाएँ दी गईं। मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान के मूल्यों की 'धज्जियाँ उड़ाईं' और कांग्रेस नेताओं से देश से माफी माँगने की माँग की।
भाजपा ने आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर यह हमला अभी क्यों बोला?
25 जून को आपातकाल की बरसी होती है, और भाजपा हर साल इस तारीख का उपयोग कांग्रेस की लोकतांत्रिक साख पर सवाल उठाने के लिए करती है। यह हमला ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संविधान-रक्षा को अपना प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना रही है, जिससे यह मुद्दा और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
आपातकाल के दौरान संविधान में क्या बदलाव किए गए थे?
भाजपा नेता संजय टंडन के अनुसार, आपातकाल के दौरान संविधान में संशोधन कर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के चुनावों को न्यायिक समीक्षा और चुनौती से परे कर दिया गया था। यह संशोधन लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमज़ोर करने वाला माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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