संविधान हत्या दिवस: BJP अध्यक्ष नितिन नवीन बोले — 25 जून को मनाना इतिहास के साथ न्याय
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 25 जून 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस तारीख को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का केंद्र सरकार का निर्णय इतिहास के साथ सच्चा न्याय है। उनके अनुसार, दशकों तक 1975 के आपातकाल के काले अध्याय को देश की सामूहिक स्मृति से जानबूझकर मिटाने की कोशिश होती रही।
आपातकाल की पृष्ठभूमि और संवैधानिक संकट
नितिन नवीन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, "यह दिवस आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं की याद दिलाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।" उन्होंने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया था, जिसके बाद राष्ट्रीय हित की बजाय सत्ता बचाने को प्राथमिकता दी गई।
नवीन के अनुसार, एक व्यक्ति की सत्ता बचाने के लिए पूरे देश की आज़ादी को बंधक बना लिया गया और डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कुचलने की कोशिश की गई।
लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष
BJP अध्यक्ष ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने वाले बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित हज़ारों लोकतंत्र सेनानी कारागार में डाले गए।
उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, जबरन नसबंदी अभियान चलाए गए, मौलिक अधिकार छीने गए और मीसा जैसे कानूनों के ज़रिए नागरिक स्वतंत्रताओं को दबाया गया। नवीन के अनुसार, सत्ता को निरंकुश बनाने के लिए संविधान में कई संशोधन किए गए और न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश हुई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की सराहना करते हुए नवीन ने कहा कि RSS के हज़ारों स्वयंसेवकों ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा की, जबकि ABVP ने छात्र शक्ति को संगठित कर जनजागरण अभियान चलाया। उन्होंने यह भी कहा कि उस संघर्ष के दौर में युवा प्रचारक नरेंद्र मोदी गिरफ्तारी से बचते हुए भेष बदलकर आंदोलन का संदेश घर-घर पहुँचाते रहे।
कांग्रेस पर सीधा निशाना
नितिन नवीन ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आपातकाल लगाने वाली पार्टी आज खुद को लोकतंत्र की सबसे बड़ी रक्षक बताने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनावी नतीजे अनुकूल नहीं आते तो विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है, ईवीएम को निशाना बनाता है और जब अदालतों के फैसले राजनीतिक हितों के अनुरूप नहीं होते तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं।
उन्होंने सवाल किया, "सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आज संविधान की बात करने वाली पार्टी ने आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी? अगर संविधान की सच में चिंता होती तो सबसे पहले लोकतंत्र की हत्या जैसे उस अपराध के लिए देश से क्षमा मांगनी चाहिए थी।"
संविधान हत्या दिवस का महत्व
नवीन ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की याद दिलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क और समर्पित रहने का संकल्प भी मज़बूत करता है। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ हो गया है और विभिन्न राजनीतिक दल इस ऐतिहासिक घटना की अपनी-अपनी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं।