10 अगस्त 2026
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संविधान हत्या दिवस: BJP अध्यक्ष नितिन नवीन बोले — 25 जून को मनाना इतिहास के साथ न्याय

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संविधान हत्या दिवस: BJP अध्यक्ष नितिन नवीन बोले — 25 जून को मनाना इतिहास के साथ न्याय

सारांश

आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने 25 जून को 'संविधान हत्या दिवस' मनाने के केंद्र सरकार के निर्णय को ऐतिहासिक न्याय बताया। साथ ही उन्होंने कांग्रेस से बिना शर्त माफी की माँग करते हुए कहा कि लोकतंत्र पर हमला करने वाली पार्टी आज उसकी रक्षक बनने का दावा नहीं कर सकती।

मुख्य बातें

BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने 25 जून 2026 को एक्स पर पोस्ट करते हुए 'संविधान हत्या दिवस' मनाने के केंद्र सरकार के फैसले को इतिहास के साथ न्याय बताया।
12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित किया था, जिसके बाद आपातकाल लगाया गया।
नवीन के अनुसार, लोकनायक जयप्रकाश नारायण , अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित हज़ारों लोकतंत्र सेनानियों को जेल भेजा गया था।
उन्होंने कांग्रेस से आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी माँगने की माँग की।
RSS और ABVP की भूमिका को नवीन ने भारतीय राजनीति का 'स्वर्णिम अध्याय' करार दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 25 जून 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस तारीख को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का केंद्र सरकार का निर्णय इतिहास के साथ सच्चा न्याय है। उनके अनुसार, दशकों तक 1975 के आपातकाल के काले अध्याय को देश की सामूहिक स्मृति से जानबूझकर मिटाने की कोशिश होती रही।

आपातकाल की पृष्ठभूमि और संवैधानिक संकट

नितिन नवीन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, "यह दिवस आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं की याद दिलाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।" उन्होंने कहा कि 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित कर दिया था, जिसके बाद राष्ट्रीय हित की बजाय सत्ता बचाने को प्राथमिकता दी गई।

नवीन के अनुसार, एक व्यक्ति की सत्ता बचाने के लिए पूरे देश की आज़ादी को बंधक बना लिया गया और डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा स्थापित संवैधानिक मूल्यों तथा लोकतांत्रिक सिद्धांतों को कुचलने की कोशिश की गई।

लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष

BJP अध्यक्ष ने दावा किया कि आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने वाले बड़ी संख्या में नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित हज़ारों लोकतंत्र सेनानी कारागार में डाले गए।

उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई, जबरन नसबंदी अभियान चलाए गए, मौलिक अधिकार छीने गए और मीसा जैसे कानूनों के ज़रिए नागरिक स्वतंत्रताओं को दबाया गया। नवीन के अनुसार, सत्ता को निरंकुश बनाने के लिए संविधान में कई संशोधन किए गए और न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करने की कोशिश हुई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की सराहना करते हुए नवीन ने कहा कि RSS के हज़ारों स्वयंसेवकों ने भूमिगत रहकर लोकतंत्र की रक्षा की, जबकि ABVP ने छात्र शक्ति को संगठित कर जनजागरण अभियान चलाया। उन्होंने यह भी कहा कि उस संघर्ष के दौर में युवा प्रचारक नरेंद्र मोदी गिरफ्तारी से बचते हुए भेष बदलकर आंदोलन का संदेश घर-घर पहुँचाते रहे।

कांग्रेस पर सीधा निशाना

नितिन नवीन ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आपातकाल लगाने वाली पार्टी आज खुद को लोकतंत्र की सबसे बड़ी रक्षक बताने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनावी नतीजे अनुकूल नहीं आते तो विपक्ष चुनाव आयोग पर सवाल उठाता है, ईवीएम को निशाना बनाता है और जब अदालतों के फैसले राजनीतिक हितों के अनुरूप नहीं होते तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं।

उन्होंने सवाल किया, "सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आज संविधान की बात करने वाली पार्टी ने आपातकाल के लिए देश से बिना शर्त माफी क्यों नहीं मांगी? अगर संविधान की सच में चिंता होती तो सबसे पहले लोकतंत्र की हत्या जैसे उस अपराध के लिए देश से क्षमा मांगनी चाहिए थी।"

संविधान हत्या दिवस का महत्व

नवीन ने केंद्र सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह दिवस केवल अतीत की याद दिलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संविधान, लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क और समर्पित रहने का संकल्प भी मज़बूत करता है। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर राष्ट्रीय विमर्श तेज़ हो गया है और विभिन्न राजनीतिक दल इस ऐतिहासिक घटना की अपनी-अपनी व्याख्या प्रस्तुत कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका मूल्यांकन इस बात से होगा कि यह दिवस केवल विपक्ष पर हमले का मंच बनता है या सचमुच लोकतांत्रिक चेतना जगाने का माध्यम। BJP का कांग्रेस से माफी की माँग करना स्वाभाविक है, परंतु आलोचकों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा का दायित्व हर सत्तारूढ़ दल पर समान रूप से लागू होता है। आपातकाल की विरासत पर राष्ट्रीय सहमति तभी बनेगी जब इसे दलीय श्रेय की राजनीति से ऊपर उठाकर संवैधानिक शिक्षा से जोड़ा जाए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संविधान हत्या दिवस' क्या है और इसे कब मनाया जाता है?
'संविधान हत्या दिवस' केंद्र सरकार द्वारा 25 जून को मनाया जाने वाला दिवस है, जो 1975 में इसी तारीख को लगाए गए आपातकाल की याद में घोषित किया गया है। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन के अनुसार, यह निर्णय उन लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को ऐतिहासिक मान्यता देता है जिन्हें आपातकाल के दौरान जेल भेजा गया था।
1975 का आपातकाल क्यों लगाया गया था?
नितिन नवीन के बयान के अनुसार, 12 जून 1975 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध घोषित किया, जिसके बाद सत्ता बचाने के उद्देश्य से आपातकाल लगाया गया। इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित किए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और मीसा जैसे कानूनों से नागरिक स्वतंत्रताएँ दबाई गईं।
BJP अध्यक्ष ने कांग्रेस से क्या माँग की?
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने माँग की कि कांग्रेस आपातकाल लगाने के लिए देश से बिना शर्त माफी माँगे। उनका तर्क है कि जो पार्टी लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला कर चुकी है, वह बिना क्षमायाचना के आज खुद को संविधान की रक्षक नहीं बता सकती।
आपातकाल के दौरान किन नेताओं को जेल भेजा गया था?
नितिन नवीन के अनुसार, लोकनायक जयप्रकाश नारायण , अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी सहित हज़ारों लोकतंत्र सेनानियों को आपातकाल के दौरान कारागार में डाला गया था। उन्होंने RSS और ABVP के कार्यकर्ताओं की भूमिका को भी इस प्रतिरोध का अहम हिस्सा बताया।
नरेंद्र मोदी की आपातकाल के दौरान क्या भूमिका बताई गई है?
नितिन नवीन के दावे के अनुसार, आपातकाल के दौरान युवा प्रचारक के रूप में नरेंद्र मोदी गिरफ्तारी से बचते हुए भेष बदलकर लोकतंत्र आंदोलन का संदेश घर-घर पहुँचाते रहे। यह दावा BJP अध्यक्ष के एक्स पोस्ट में किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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