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संविधान हत्या दिवस: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा — 1975 आपातकाल में संवैधानिक मूल्यों की हुई थी कठोर परीक्षा

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संविधान हत्या दिवस: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा — 1975 आपातकाल में संवैधानिक मूल्यों की हुई थी कठोर परीक्षा

सारांश

51 साल बाद भी 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे चुभने वाला घाव है। उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'संविधान हत्या दिवस' पर उन नायकों को नमन किया जिन्होंने नागरिक स्वतंत्रताओं के निलंबन के बीच संविधान की रक्षा की — और BJP ने बिहार से हरियाणा तक इस याद को ताज़ा रखा।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन ने 25 जून 2025 को 'संविधान हत्या दिवस' पर 1975 आपातकाल में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि दी।
राधाकृष्णन ने एक्स पर लिखा कि आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित की गईं और लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमज़ोर की गईं।
1975 का आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक — 21 महीने — चला था।
भारत इस वर्ष आपातकाल की 51वीं बरसी मना रहा है।
BJP ने बिहार , हरियाणा और देश के कई हिस्सों में देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 25 जून 2026 को 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर उन सभी साहसी नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद रखी। उन्होंने इस दिन को भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया, जब नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित कर दी गई थीं।

एक्स पर उपराष्ट्रपति का संदेश

राधाकृष्णन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'संविधान हत्या दिवस' पर, मैं उन सभी बहादुर लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जो भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक — 1975 में घोषित आपातकाल — के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अडिग रहे और हमारे संविधान की भावना को सुरक्षित रखा।'

उन्होंने आगे कहा, 'आपातकाल उस समय की एक गंभीर याद दिलाता है, जब संवैधानिक मूल्यों की कड़ी परीक्षा हुई थी। नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित कर दी गई थीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई थी और हमारे लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए महत्वपूर्ण संस्थाओं को कमज़ोर किया गया था।'

संविधान के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता का आह्वान

उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे संविधान को अपना मार्गदर्शक मानते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराएँ। उन्होंने कहा, 'आइए हम इन मूल्यों पर आधारित भारत का निर्माण जारी रखें।'

भाजपा का देशव्यापी आयोजन

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार, हरियाणा और देश के कई अन्य हिस्सों में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया। पार्टी ने कई कार्यक्रमों की योजना बनाई, जिनमें लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर आपातकाल के प्रभाव को उजागर किया गया। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत 1975 के आपातकाल की 51वीं बरसी मना रहा है।

1975 का आपातकाल: एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 मार्च 1977 तक — यानी 21 महीने — लागू रहा। इस दौरान संविधान के तहत प्रमुख लोकतांत्रिक मानदंडों और नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया था। इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे विवादास्पद और सत्तावादी घटनाओं में से एक माना जाता है।

आगे का संदेश

यह दिवस हर वर्ष एक अनुस्मारक के रूप में मनाया जाता है — इस संकल्प के साथ कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा किसी भी परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता रहे। उपराष्ट्रपति का यह संदेश संविधान की आत्मा को जीवित रखने की सामूहिक जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक औज़ार भी बन चुका है — और यह तथ्य दोनों पक्षों के लिए असहज सवाल खड़े करता है। उपराष्ट्रपति का संदेश संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान करता है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं पूछती कि आज की तारीख में उन्हीं मूल्यों — अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की स्वायत्तता, प्रेस की आज़ादी — की स्थिति क्या है। 1975 की याद ज़रूरी है, पर वह याद तभी सार्थक होती है जब वह आत्म-परीक्षण को भी प्रेरित करे, न केवल विरोधी दल की आलोचना को।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संविधान हत्या दिवस' क्या है और यह कब मनाया जाता है?
'संविधान हत्या दिवस' प्रत्येक वर्ष 25 जून को मनाया जाता है — उस दिन की याद में जब 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा की थी। इस दिन लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा का संकल्प दोहराया जाता है।
1975 का भारतीय आपातकाल कितने समय तक चला और इसका क्या असर पड़ा?
1975 का आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने चला। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित कर दी गईं, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किया गया — इसे स्वतंत्र भारत का सबसे विवादास्पद दौर माना जाता है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'संविधान हत्या दिवस' पर क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने एक्स पर पोस्ट कर 1975 आपातकाल के दौरान संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाले सभी नागरिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आपातकाल उस समय की गंभीर याद दिलाता है जब नागरिक स्वतंत्रताएँ निलंबित थीं और लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमज़ोर की गई थीं।
BJP ने 'संविधान हत्या दिवस' पर क्या कार्यक्रम आयोजित किए?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिहार , हरियाणा और देश के अनेक हिस्सों में देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए। इन आयोजनों में लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर आपातकाल के प्रभाव को उजागर किया गया।
2025 में आपातकाल की कौन-सी बरसी मनाई जा रही है?
2025 में भारत 1975 के आपातकाल की 51वीं बरसी मना रहा है। आपातकाल 25 जून 1975 को लागू हुआ था, इसलिए 25 जून 2025 को इसके 50 वर्ष पूरे होने पर यह दिवस विशेष महत्व के साथ मनाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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