आपातकाल की 51वीं बरसी: PM मोदी बोले — 'कभी माफ न करें, कभी न भूलें', कांग्रेस पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 जून 2026 को 1975 के आपातकाल की 51वीं बरसी पर इस दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय करार दिया। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि इस दाग को बार-बार स्मरण करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी इस मार्ग पर चलने का साहस न कर सके। मोदी की यह टिप्पणी सीधे तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर लक्षित थी।
इंस्टाग्राम पर 'संविधान हत्या दिवस' पोस्ट
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को इंस्टाग्राम पर हैशटैग 'संविधान हत्या दिवस' के साथ एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा: 'क्या आप जानते हैं कि हमारे लोकतांत्रिक इतिहास में 25 जून इतना महत्वपूर्ण क्यों है?' उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आपातकाल की घोषणा का ऐतिहासिक अंश भी साझा किया, जिसमें उन्हें कहते सुना गया — 'राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।' इस पोस्ट को उन्होंने शीर्षक दिया: 'आपातकाल की 51वीं बरसी — जानिए क्यों इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय माना जाता है।'
मुख्य आरोप: संविधान और न्यायपालिका पर हमला
मोदी ने अपने संदेश में कहा, 'आपातकाल लगाने वालों ने न सिर्फ हमारे संविधान की हत्या की, बल्कि उनका इरादा न्यायपालिका को भी अपना गुलाम बनाए रखने का था।' उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें जंजीरों में बांधा गया था और अनेक लोगों को कठोर यातनाएं दी गईं। मीसा (Maintenance of Internal Security Act) के तहत मनमाने ढंग से गिरफ्तारियाँ की गईं, छात्रों को परेशान किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया।
उन्होंने कहा, 'देश के मीडिया को दबोच दिया गया था। पूरे हिंदुस्तान को जेलखाना बना दिया गया था — और सिर्फ इसलिए कि किसी की सत्ता चली न जाए।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल आपातकाल की वर्षगाँठ को लेकर अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।
जनशक्ति को दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आपातकाल को बहुत निकट से देखा है। उन्होंने उस दौर के प्रतिरोध को याद करते हुए कहा, 'जाति, पंथ व संप्रदाय से ऊपर उठकर देश ने उस समय चुनाव में नतीजा दिया था, लोकतंत्र के लिए वोट किया था और लोकतंत्र को पुनः स्थापित किया था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्मरण किसी को भला-बुरा कहने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को सतर्क करने के लिए है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2023 से 25 जून को आधिकारिक रूप से 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मान्यता दी है — एक कदम जिसे कांग्रेस ने राजनीति से प्रेरित बताया था।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने आपातकाल की वर्षगाँठ पर भाजपा (BJP) की आलोचना को राजनीतिक विक्षेपण करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दल इस दिन का उपयोग चुनावी आख्यान गढ़ने के लिए करता है, जबकि वर्तमान प्रेस स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।
आगे की राह
यह बरसी ऐसे समय में आई है जब 2027 के विधानसभा चुनाव कई राज्यों में निकट हैं और आपातकाल का राजनीतिक इतिहास एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में है। प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश आने वाले महीनों में भाजपा के चुनावी अभियान की दिशा तय कर सकता है।