10 अगस्त 2026
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आपातकाल की 51वीं बरसी: 'कांग्रेस आज भी तानाशाही मानसिकता से ग्रसित' — योगी, फडणवीस समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया

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आपातकाल की 51वीं बरसी: 'कांग्रेस आज भी तानाशाही मानसिकता से ग्रसित' — योगी, फडणवीस समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया

सारांश

आपातकाल की 51वीं बरसी पर 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने एकजुट होकर लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया और कांग्रेस को 'तानाशाही मानसिकता' से ग्रसित बताया — BJP का यह सुनियोजित राजनीतिक आख्यान 1975 की विरासत को आज की राजनीति से जोड़ता है।

मुख्य बातें

25 जून 2025 को देश में आपातकाल की 51वीं बरसी 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाई गई।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस द्वारा 1975 में थोपे गए आपातकाल को 'संवैधानिक आत्मा को कुचलने का प्रयास' बताया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस 'आज भी तानाशाही मानसिकता से ग्रसित है।' राजस्थान के भजनलाल शर्मा , हरियाणा के नायब सिंह सैनी और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस ने भी लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि दी।
आपातकाल 25 जून 1975 से मार्च 1977 तक 21 महीने लागू रहा था; इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित किए गए थे।

25 जून 2025 को देश भर में आपातकाल की 51वीं बरसी मनाई जा रही है — वह दिन जब 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपा था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है। गुरुवार को इस अवसर पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए।

योगी आदित्यनाथ का तीखा प्रहार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, '25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब आपातकाल थोपकर देश की संवैधानिक आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया।' उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में कांग्रेस द्वारा थोपे गए आपातकाल के अंधकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों को गहरी चोट पहुँचाई। योगी ने उस कठिन दौर में यातनाएँ सहकर लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी सेनानियों को 'कोटिशः नमन' किया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून 1975 की वह रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के निर्णय ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुँचाई। उस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर ताले लगाए गए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया। सत्ता के अहंकार में लिया गया यह निर्णय कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। दुर्भाग्य से कांग्रेस आज भी इसी मानसिकता से ग्रसित है।' गुप्ता ने यह भी कहा कि यह दिवस लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के संकल्प को और मज़बूत करने की प्रेरणा देता है।

राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि आपातकाल को 1975 में आज ही के दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश पर थोपा गया था — वह दौर जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का खुलेआम दमन किया गया। उन्होंने यातनाओं और दमन के बावजूद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों और राष्ट्रभक्तों को नमन किया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, '25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। कांग्रेस सरकार द्वारा सत्ता के अहंकार में लगाए गए आपातकाल ने संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुँचाया।' सैनी ने 'संविधान हत्या दिवस' पर लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए बलिदान देने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, '25 जून 1975, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय, जब संवैधानिक मूल्यों को कुचला गया और देश पर आपातकाल थोपा गया।' उन्होंने तानाशाही के खिलाफ डटे रहने वाले देशभक्तों को नमन करते हुए संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक आदर्शों को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराने का आह्वान किया।

आपातकाल का ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 महीनों तक — मार्च 1977 तक — लागू रहा। इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस सेंसरशिप लागू की गई और हज़ारों विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के जेल में डाल दिया गया। यह 51वीं बरसी ऐसे समय में आई है जब भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।

आगे का राजनीतिक परिदृश्य

BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एकजुट प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि पार्टी 'संविधान हत्या दिवस' को एक सुनियोजित राजनीतिक आख्यान के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे पर किस प्रकार अपना पक्ष रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कांग्रेस को संवैधानिक मूल्यों के विरोधी के रूप में स्थापित करने की कोशिश करता है। विडंबना यह है कि जो दल लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का दावा करते हैं, उन पर भी समय-समय पर प्रेस स्वतंत्रता और न्यायपालिका की स्वायत्तता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इतिहास को राजनीतिक हथियार बनाने की यह प्रवृत्ति तब तक अधूरी रहेगी, जब तक वर्तमान में लोकतांत्रिक जवाबदेही के ठोस मानक स्थापित नहीं होते।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपातकाल की 51वीं बरसी पर 'संविधान हत्या दिवस' क्या है?
'संविधान हत्या दिवस' वह नाम है जो BJP सरकार ने 25 जून को दिया है — उस दिन की याद में जब 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपा था। यह दिन आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के रूप में मनाया जाता है।
1975 का आपातकाल कब से कब तक लागू रहा?
1975 का आपातकाल 25 जून 1975 को लागू हुआ और मार्च 1977 तक — कुल 21 महीनों तक — चला। इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और हज़ारों विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के जेल में डाला गया।
किन मुख्यमंत्रियों ने आपातकाल की बरसी पर प्रतिक्रिया दी?
25 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की रेखा गुप्ता, राजस्थान के भजनलाल शर्मा, हरियाणा के नायब सिंह सैनी और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस ने एक्स पर पोस्ट कर लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया और कांग्रेस की आलोचना की।
रेखा गुप्ता ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 1975 का आपातकाल कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है और दुर्भाग्य से कांग्रेस आज भी इसी मानसिकता से ग्रसित है। उन्होंने कहा कि उस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर ताले लगाए गए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया।
आपातकाल की बरसी का राजनीतिक महत्त्व क्या है?
BJP के लिए यह दिन कांग्रेस को लोकतंत्र-विरोधी साबित करने का एक प्रमुख राजनीतिक अवसर है। 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में इसे आधिकारिक दर्जा देकर पार्टी ऐतिहासिक घटना को समकालीन राजनीतिक विमर्श से जोड़ती है, जिससे यह चुनावी आख्यान का हिस्सा बन जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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