आपातकाल की 51वीं बरसी: 'कांग्रेस आज भी तानाशाही मानसिकता से ग्रसित' — योगी, फडणवीस समेत कई मुख्यमंत्रियों ने लोकतंत्र सेनानियों को नमन किया
सारांश
मुख्य बातें
25 जून 2025 को देश भर में आपातकाल की 51वीं बरसी मनाई जा रही है — वह दिन जब 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने देश पर आपातकाल थोपा था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है। गुरुवार को इस अवसर पर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि दी और कांग्रेस पर तीखे प्रहार किए।
योगी आदित्यनाथ का तीखा प्रहार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, '25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है, जब आपातकाल थोपकर देश की संवैधानिक आत्मा को कुचलने का प्रयास किया गया।' उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में कांग्रेस द्वारा थोपे गए आपातकाल के अंधकार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व नागरिक अधिकारों को गहरी चोट पहुँचाई। योगी ने उस कठिन दौर में यातनाएँ सहकर लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी सेनानियों को 'कोटिशः नमन' किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 25 जून 1975 की वह रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के निर्णय ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को गहरी चोट पहुँचाई। उस दौर में नागरिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर ताले लगाए गए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया गया। सत्ता के अहंकार में लिया गया यह निर्णय कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा प्रतीक है। दुर्भाग्य से कांग्रेस आज भी इसी मानसिकता से ग्रसित है।' गुप्ता ने यह भी कहा कि यह दिवस लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा के संकल्प को और मज़बूत करने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की प्रतिक्रिया
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि आपातकाल को 1975 में आज ही के दिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा देश पर थोपा गया था — वह दौर जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का खुलेआम दमन किया गया। उन्होंने यातनाओं और दमन के बावजूद लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करने वाले सभी लोकतंत्र सेनानियों और राष्ट्रभक्तों को नमन किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा, '25 जून 1975 का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। कांग्रेस सरकार द्वारा सत्ता के अहंकार में लगाए गए आपातकाल ने संविधान की मूल भावना, नागरिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर आघात पहुँचाया।' सैनी ने 'संविधान हत्या दिवस' पर लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए बलिदान देने वाले सभी सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पोस्ट किया, '25 जून 1975, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक काला अध्याय, जब संवैधानिक मूल्यों को कुचला गया और देश पर आपातकाल थोपा गया।' उन्होंने तानाशाही के खिलाफ डटे रहने वाले देशभक्तों को नमन करते हुए संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक आदर्शों को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराने का आह्वान किया।
आपातकाल का ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 महीनों तक — मार्च 1977 तक — लागू रहा। इस दौरान मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस सेंसरशिप लागू की गई और हज़ारों विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के जेल में डाल दिया गया। यह 51वीं बरसी ऐसे समय में आई है जब भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
BJP शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एकजुट प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि पार्टी 'संविधान हत्या दिवस' को एक सुनियोजित राजनीतिक आख्यान के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस की ओर से अभी तक इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे पर किस प्रकार अपना पक्ष रखता है।