10 अगस्त 2026
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आपातकाल के 51 साल: भाजपा का 'संविधान हत्या दिवस', बिहार के 90,000 बूथों समेत देशभर में कार्यक्रम

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आपातकाल के 51 साल: भाजपा का 'संविधान हत्या दिवस', बिहार के 90,000 बूथों समेत देशभर में कार्यक्रम

सारांश

आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ पर भाजपा का 'संविधान हत्या दिवस' महज़ एक स्मरण समारोह नहीं — यह कांग्रेस के 'संविधान बचाओ' आख्यान का सीधा राजनीतिक जवाब है। बिहार के 90,000 बूथों से लेकर हरियाणा के अटल सभागार तक, पार्टी नई पीढ़ी को 1975 का इतिहास याद दिलाने की मुहिम पर है।

मुख्य बातें

भाजपा ने 25 जून 2026 को आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ पर 'संविधान हत्या दिवस' मनाने की घोषणा की।
बिहार में राज्य के लगभग 90,000 बूथों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पटना के ज्ञान भवन में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा लगभग 450 जेपी सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करेंगे।
30 जून से 6 जुलाई तक बिहार के 52 संगठनात्मक जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन होंगे।
हरियाणा में गुरुवार शाम 5 बजे पंचकुला के अटल सभागार में विशेष कार्यक्रम निर्धारित है।
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि आपातकाल में मौलिक अधिकार, प्रेस स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को कुचला गया था।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 जून 2026 को आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ पर 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को गहरी क्षति पहुँचाई थी। इस अवसर पर बिहार, हरियाणा सहित देश के अनेक राज्यों में विशेष आयोजन किए जाएंगे।

मुख्य घटनाक्रम

भाजपा ने इस दिन को स्मरण कार्यक्रमों की एक व्यापक श्रृंखला के साथ चिह्नित करने की योजना बनाई है। बिहार में राज्य के लगभग 90,000 बूथों पर विभिन्न आयोजन होंगे। पटना के ज्ञान भवन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहे लगभग 450 'जेपी सेनानियों' और 'लोकतंत्र सेनानियों' को सम्मानित करेंगे।

भाजपा के बिहार प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल तथा पवन जायसवाल ने संयुक्त प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित किया गया और राजनीतिक सत्ता बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का प्रयास किया गया।

बिहार में विस्तारित कार्यक्रम

पवन जायसवाल ने बताया कि 30 जून से 6 जुलाई तक बिहार के सभी 52 संगठनात्मक जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त भाजपा के युवा और महिला मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के पाँच प्रशासनिक प्रमंडलों में छात्र सम्मेलन भी होंगे। यह आयोजन स्पष्ट रूप से नई पीढ़ी को लक्षित करते हैं, जो 1975 की घटनाओं की प्रत्यक्षदर्शी नहीं है।

हरियाणा में भाजपा की प्रतिक्रिया

हरियाणा में भी भाजपा नेताओं ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे अंधकारमय दौरों में से एक करार दिया। पंचकुला स्थित पार्टी मुख्यालय पंचकमल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यमुनानगर से विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि संविधान बचाने की बात करने वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को पहले आपातकाल के दौरान अपने कार्यों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

अरोड़ा ने आरोप लगाया कि उस दौर में लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला गया, संस्थाओं की स्वायत्तता कमज़ोर की गई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने कहा कि हज़ारों लोकतंत्र सेनानियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया, जबकि मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप थोपी गई। अरोड़ा ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और तत्कालीन भारतीय जनसंघ ने आपातकाल का विरोध करते हुए लोकतंत्र की बहाली के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाए थे।

हरियाणा भाजपा की ओर से गुरुवार शाम 5 बजे पंचकुला स्थित अटल सभागार में एक विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।

आम जनता और नई पीढ़ी पर असर

भाजपा के अनुसार इन आयोजनों का उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को सम्मान देना और नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास तथा उसके दूरगामी परिणामों से परिचित कराना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब संविधान की रक्षा का मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है और दोनों प्रमुख दल — भाजपा और कांग्रेस — एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमज़ोर करने का आरोप लगाते रहे हैं।

क्या होगा आगे

बिहार में 30 जून से 6 जुलाई के बीच 52 जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलनों की श्रृंखला जारी रहेगी। इन कार्यक्रमों के ज़रिए भाजपा 2026 के आगामी चुनावी माहौल में कांग्रेस के 'संविधान बचाओ' आख्यान का प्रतिकार करने की रणनीति पर काम कर रही है — ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह ऐतिहासिक स्मरण लोकतांत्रिक जागरूकता बढ़ाता है या महज़ पार्टी-राजनीति का औज़ार बन कर रह जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संविधान हत्या दिवस' क्या है और भाजपा इसे क्यों मना रही है?
'संविधान हत्या दिवस' भाजपा द्वारा 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल की वर्षगाँठ पर मनाया जाने वाला दिन है। पार्टी का कहना है कि इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को गंभीर क्षति पहुँचाई थी, और इस इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाना ज़रूरी है।
बिहार में 'संविधान हत्या दिवस' पर क्या-क्या कार्यक्रम होंगे?
बिहार में लगभग 90,000 बूथों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। पटना के ज्ञान भवन में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा करीब 450 जेपी सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करेंगे। इसके अलावा 30 जून से 6 जुलाई तक 52 जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन और पाँच प्रमंडलों में छात्र सम्मेलन भी होंगे।
हरियाणा में भाजपा ने आपातकाल पर क्या कहा?
यमुनानगर से विधायक घनश्याम दास अरोड़ा ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकार कुचले गए, मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई और हज़ारों कार्यकर्ताओं को जेल में डाला गया। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि संविधान बचाने की बात करने से पहले वह आपातकाल में अपनी भूमिका पर आत्ममंथन करे। पंचकुला के अटल सभागार में गुरुवार शाम 5 बजे विशेष कार्यक्रम निर्धारित है।
आपातकाल 1975 क्या था और इसका भारतीय लोकतंत्र पर क्या असर पड़ा?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 महीनों तक चला। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और हज़ारों राजनीतिक विरोधियों को बिना मुकदमे के जेल में रखा गया। इसे भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादास्पद अध्यायों में से एक माना जाता है।
भाजपा के इन कार्यक्रमों का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
भाजपा नेताओं का कहना है कि ये आयोजन ऐतिहासिक जागरूकता के लिए हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कांग्रेस के 'संविधान बचाओ' अभियान का प्रत्युत्तर भी है। दोनों दल संविधान को अपने-अपने राजनीतिक आख्यान के केंद्र में रख रहे हैं, जो आगामी चुनावी माहौल में एक प्रमुख विमर्श बनता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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