एनसीईआरटी कक्षा 9 में 'आपातकाल' अध्याय: कांग्रेस, सपा और राजद ने केंद्र पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 25 जून 2026 को राजनीतिक बहस उस समय तेज हो गई जब एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों में 'आपातकाल' का अध्याय शामिल किए जाने की बात सामने आई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने इस निर्णय को लेकर केंद्र सरकार और एनसीईआरटी पर कड़े सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि शिक्षा और इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से पेश करने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस की आपत्ति: इतिहास बदलने का आरोप
कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने सवाल उठाया कि क्या एनसीईआरटी को यह स्मरण है कि देश की स्वाधीनता संग्राम में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की केंद्रीय भूमिका रही थी। उन्होंने आशंका जताई कि क्या अब बचपन से पढ़ाया गया भारतीय इतिहास बदल दिया जाएगा।
माथेर ने यह भी कहा कि दुनिया के अनेक देशों में स्वतंत्रता आंदोलन हुए, किंतु गांधीजी की अहिंसा की विचारधारा अपने आप में अनूठी थी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि एनसीईआरटी इतिहास में बदलाव कर एक भिन्न संस्करण प्रस्तुत कर सकती है।
कांग्रेस नेताओं के अन्य आरोप
कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उसकी नीति लोगों के मन में भ्रम पैदा कर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग अच्छी शिक्षा और रोजगार चाहता है — चाहे वह एनसीईआरटी, सीबीएसई, मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ बोर्ड से पढ़ रहा हो — लेकिन भाजपा बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में भी राजनीति कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कक्षा 9 की पुस्तक में वेदों से जुड़े अध्याय शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों का प्रभाव बढ़ गया है, और वैज्ञानिक सोच की जगह धार्मिक सोच को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
राजद का रुख: सत्ता में जो हो, इतिहास बदलता है
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि जो सरकार सत्ता में होती है, वह अपने नजरिए से इतिहास पढ़ाती है और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब उनकी सरकार आएगी, तो वह भी बदलाव करेगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो मंत्री पेपर लीक जैसी समस्याओं को नहीं रोक पाए, वे बेहतर पाठ्यक्रम कैसे तैयार करवा पाएंगे।
सपा की प्रतिक्रिया: भाजपा पर नैतिक अधिकार का सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि देश आपातकाल के लिए कांग्रेस को कभी माफ नहीं करता और आज भी इस विषय पर कई सवाल उठते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास कांग्रेस से आपातकाल पर सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश 25 जून को आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ मना रहा है। गौरतलब है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलाव का मसला पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष की आपत्तियों के बाद यह देखना होगा कि सरकार और एनसीईआरटी इस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।