10 अगस्त 2026
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एनसीईआरटी कक्षा 9 में 'आपातकाल' अध्याय: कांग्रेस, सपा और राजद ने केंद्र पर साधा निशाना

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एनसीईआरटी कक्षा 9 में 'आपातकाल' अध्याय: कांग्रेस, सपा और राजद ने केंद्र पर साधा निशाना

सारांश

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में 'आपातकाल' अध्याय जोड़ने पर कांग्रेस, राजद और सपा ने केंद्र पर इतिहास को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। विपक्ष का सवाल — क्या पाठ्यपुस्तकें अब सत्ता के एजेंडे का माध्यम बन रही हैं?

मुख्य बातें

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में 'आपातकाल' का अध्याय जोड़ा गया, जिसपर राजनीतिक विवाद छिड़ा।
कांग्रेस राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने आशंका जताई कि स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं की भूमिका से जुड़े इतिहास को बदला जा सकता है।
कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भाजपा पर बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में राजनीति करने का आरोप लगाया।
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर पेपर लीक न रोक पाने का हवाला देते हुए पाठ्यक्रम सुधार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस से आपातकाल पर सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है।
यह विवाद 25 जून को आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ के अवसर पर सामने आया।

नई दिल्ली में 25 जून 2026 को राजनीतिक बहस उस समय तेज हो गई जब एनसीईआरटी (NCERT) की कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तकों में 'आपातकाल' का अध्याय शामिल किए जाने की बात सामने आई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं ने इस निर्णय को लेकर केंद्र सरकार और एनसीईआरटी पर कड़े सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि शिक्षा और इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से पेश करने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस की आपत्ति: इतिहास बदलने का आरोप

कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने सवाल उठाया कि क्या एनसीईआरटी को यह स्मरण है कि देश की स्वाधीनता संग्राम में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की केंद्रीय भूमिका रही थी। उन्होंने आशंका जताई कि क्या अब बचपन से पढ़ाया गया भारतीय इतिहास बदल दिया जाएगा।

माथेर ने यह भी कहा कि दुनिया के अनेक देशों में स्वतंत्रता आंदोलन हुए, किंतु गांधीजी की अहिंसा की विचारधारा अपने आप में अनूठी थी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि एनसीईआरटी इतिहास में बदलाव कर एक भिन्न संस्करण प्रस्तुत कर सकती है।

कांग्रेस नेताओं के अन्य आरोप

कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उसकी नीति लोगों के मन में भ्रम पैदा कर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की है। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग अच्छी शिक्षा और रोजगार चाहता है — चाहे वह एनसीईआरटी, सीबीएसई, मध्य प्रदेश या छत्तीसगढ़ बोर्ड से पढ़ रहा हो — लेकिन भाजपा बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में भी राजनीति कर रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कक्षा 9 की पुस्तक में वेदों से जुड़े अध्याय शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों का प्रभाव बढ़ गया है, और वैज्ञानिक सोच की जगह धार्मिक सोच को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

राजद का रुख: सत्ता में जो हो, इतिहास बदलता है

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि जो सरकार सत्ता में होती है, वह अपने नजरिए से इतिहास पढ़ाती है और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब उनकी सरकार आएगी, तो वह भी बदलाव करेगी। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि जो मंत्री पेपर लीक जैसी समस्याओं को नहीं रोक पाए, वे बेहतर पाठ्यक्रम कैसे तैयार करवा पाएंगे।

सपा की प्रतिक्रिया: भाजपा पर नैतिक अधिकार का सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि देश आपातकाल के लिए कांग्रेस को कभी माफ नहीं करता और आज भी इस विषय पर कई सवाल उठते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास कांग्रेस से आपातकाल पर सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश 25 जून को आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ मना रहा है। गौरतलब है कि एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलाव का मसला पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। विपक्ष की आपत्तियों के बाद यह देखना होगा कि सरकार और एनसीईआरटी इस पर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस समस्या की जड़ को उजागर करता है — पाठ्यपुस्तकें दलीय एजेंडे का अखाड़ा बन चुकी हैं। विपक्ष की आपत्तियाँ जायज़ हो सकती हैं, लेकिन जब विरोध करने वाले खुद भविष्य में यही करने की बात स्वीकार करें, तो बहस की विश्वसनीयता कमज़ोर पड़ जाती है। असली ज़रूरत एक स्वायत्त, गैर-राजनीतिक पाठ्यक्रम समीक्षा तंत्र की है — जो अभी तक किसी भी सरकार की प्राथमिकता नहीं रही।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीईआरटी कक्षा 9 की किताब में 'आपातकाल' का अध्याय क्यों जोड़ा गया?
एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की पाठ्यपुस्तक में 'आपातकाल' से संबंधित अध्याय शामिल किया है, हालांकि इस निर्णय के पीछे का आधिकारिक कारण अभी तक विस्तार से सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब देश आपातकाल की 51वीं वर्षगाँठ मना रहा है।
कांग्रेस ने एनसीईआरटी के इस फैसले पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य जेबी माथेर ने आशंका जताई कि स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं — जैसे गांधी, नेहरू, पटेल और बोस — से जुड़े इतिहास को बदला जा सकता है। कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भाजपा पर बच्चों की पाठ्यपुस्तकों में राजनीति करने का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी का इस विवाद पर क्या कहना है?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि देश आपातकाल के लिए कांग्रेस को माफ नहीं करता, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर कांग्रेस से सवाल पूछने का नैतिक अधिकार नहीं है।
राजद ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम बदलाव पर क्या रुख अपनाया?
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि सत्ता में जो भी होता है, वह अपने नजरिए से इतिहास पढ़ाता है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधा और कहा कि जो पेपर लीक नहीं रोक सके, वे बेहतर पाठ्यक्रम कैसे तैयार करवाएंगे।
क्या एनसीईआरटी की किताबों में वेदों से जुड़े अध्याय भी जोड़े गए हैं?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत के अनुसार, कक्षा 9 की पुस्तक में वेदों से संबंधित अध्याय भी शामिल किए गए हैं। उन्होंने इसे वैज्ञानिक सोच की जगह धार्मिक सोच को बढ़ावा देने की कोशिश बताया, हालांकि एनसीईआरटी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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