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एनसीईआरटी कमेटी विवाद: विपक्ष का आरोप — शैक्षिक संस्थानों में RSS का एजेंडा थोपा जा रहा है

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एनसीईआरटी कमेटी विवाद: विपक्ष का आरोप — शैक्षिक संस्थानों में RSS का एजेंडा थोपा जा रहा है

सारांश

एनसीईआरटी की नई राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक समिति में RSS से जुड़े सदस्यों की कथित नियुक्ति पर कांग्रेस, RJD और SP ने एक सुर में सरकार को घेरा। विपक्ष का आरोप है कि यह शिक्षा व्यवस्था पर व्यवस्थित वैचारिक कब्जे की कड़ी है।

मुख्य बातें

एनसीईआरटी की नई राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक समिति में RSS से जुड़े सदस्यों को शामिल किए जाने का विपक्ष ने आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर , सांसद जेबी माथर , उदित राज और अजय कुमार लल्लू ने सरकार पर शैक्षिक संस्थाओं के 'भगवाकरण' का आरोप लगाया।
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि युवा पीढ़ी ईमानदार परीक्षा प्रणाली और रोजगारोन्मुख शिक्षा चाहती है, वैचारिक थोपाव नहीं।
SP प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने RSS के ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए संगठन की देशभक्ति की साख पर सवाल उठाए।
BJP और RSS की ओर से इस विशेष आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नई दिल्ली, 20 अगस्त: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और अन्य विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक निर्माण समिति में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े सदस्यों को शामिल किए जाने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम शैक्षिक संस्थानों में RSS के वैचारिक एजेंडे को संस्थागत रूप देने की एक सुनियोजित कोशिश है।

मुख्य आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि

विपक्षी नेताओं के अनुसार, एनसीईआरटी की राजनीति विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक तैयार करने वाली समिति में ऐसे सदस्यों को जगह दी गई है, जिनका RSS से सीधा जुड़ाव बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह पैटर्न नया नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में पाठ्यक्रम से मुगल इतिहास को हटाने और अन्य बदलावों को लेकर भी विवाद उठ चुके हैं।

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा, 'मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं है। आरएसएस-भाजपा हमारे देश की हर संस्था पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। जब तक हमारी सरकार वापस नहीं आती, हमें यह सब सहना होगा।'

सांसदों की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा, 'पिछले 12 सालों से भाजपा सरकार के तहत एक पैटर्न देखा जा रहा है। चाहे एनसीईआरटी की किताबें हों, यूनिवर्सिटीज हों, वाइस-चांसलर हों या इतिहास की किताबें, हम देख रहे हैं कि शैक्षिक संस्थानों में RSS का एजेंडा शामिल किया जा रहा है।'

कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखे शब्दों में कहा, 'अब एनसीईआरटी को आरएसएस का केंद्र कहा जाना चाहिए। देशभर के वाइस-चांसलर, प्रोफेसर और शिक्षण संस्थानों पर कब्जा किया जा रहा है। अगर मध्यकालीन इतिहास से मुगल इतिहास को हटा दिया जाए, तो फिर क्या बचेगा।'

कांग्रेस नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित मंत्रालयों में — चाहे राज्य स्तर हो या केंद्र स्तर — बोर्ड, संस्थान, शिक्षा, स्वास्थ्य और आयोगों के निदेशकों के पदों पर RSS से जुड़े लोगों की नियुक्ति का सिलसिला जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि संविधान और जन-संस्थाओं पर व्यवस्थित हमला हो रहा है।

राजद और सपा का रुख

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, 'हम सवाल क्यों न उठाएं? आप उन्हीं लोगों और संगठनों को शामिल कर रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया है। जेन-जी एक ईमानदार परीक्षा प्रणाली, रोजगार दिलाने वाली शिक्षा व्यवस्था और सबको साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था चाहते हैं। नागपुर में ट्रेनिंग पाए लोगों को लाकर आप अपने ही फायदे के लिए काम कर रहे हैं, इसे बंद करें।'

समाजवादी पार्टी (SP) के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा, 'इससे ज्यादा देश का दुर्भाग्य नहीं हो सकता है। उन्होंने 52 साल तक तिरंगे को अपने घर पर नहीं फहराया, वे देशभक्ति का सर्टिफिकेट दे रहे हैं।' उल्लेखनीय है कि ये सभी आरोप विपक्षी नेताओं के हैं; BJP और RSS की ओर से इस विशेष विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

व्यापक संदर्भ: शिक्षा और वैचारिक बहस

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बदलावों को लेकर — विशेष रूप से मुगल काल के अध्यायों की कटौती और नागरिक शास्त्र की पुनर्संरचना को लेकर — पहले से ही व्यापक बहस चल रही है। गौरतलब है कि शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम निर्माण में वैचारिक प्रभाव का सवाल भारत में दशकों पुरानी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहेंगे। एनसीईआरटी की समिति की संरचना और पाठ्यपुस्तक की अंतिम विषयवस्तु पर निर्णय आने वाले महीनों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक 'वैचारिक नियुक्ति' के आरोप को काटना मुश्किल होगा। दूसरी ओर, विपक्ष की आलोचना भी तब अधिक विश्वसनीय होगी जब वह ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत करे, न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीईआरटी कमेटी विवाद क्या है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि एनसीईआरटी की नई राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक बनाने वाली समिति में RSS से जुड़े सदस्यों को शामिल किया गया है। यह विवाद 20 अगस्त 2026 को तब सामने आया जब कांग्रेस, RJD और SP के नेताओं ने इस पर एक साथ सवाल उठाए।
विपक्ष ने इस मामले में क्या-क्या आरोप लगाए हैं?
विपक्ष का आरोप है कि पिछले 12 वर्षों में शिक्षा, विश्वविद्यालयों और नियामक संस्थाओं में RSS समर्थित व्यक्तियों की नियुक्ति एक सुनियोजित पैटर्न का हिस्सा है। आलोचकों ने मुगल इतिहास को पाठ्यक्रम से हटाने का भी उदाहरण दिया।
BJP या RSS ने इन आरोपों पर क्या कहा?
इस विशेष विवाद पर BJP और RSS की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की ओर से समिति की संरचना पर कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में बदलाव का यह मुद्दा कितना पुराना है?
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में वैचारिक प्रभाव को लेकर बहस दशकों पुरानी है। हालिया वर्षों में मुगल काल के अध्यायों की कटौती और नागरिक शास्त्र की पुनर्संरचना को लेकर विशेष रूप से विवाद बढ़ा है।
इस विवाद का छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि पाठ्यपुस्तक समिति की संरचना वैचारिक आधार पर तय होती है, तो इसका सीधा असर करोड़ों छात्रों के पाठ्यक्रम पर पड़ सकता है। विपक्ष का तर्क है कि इससे इतिहास और राजनीति विज्ञान की निष्पक्ष शिक्षा प्रभावित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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