एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक विवाद: पूर्व अधिकारी वेद प्रकाश बोले — विशेषज्ञ की योग्यता विचारधारा नहीं, शोध से परखें
सारांश
मुख्य बातें
एनसीईआरटी के पूर्व अधिकारी वेद प्रकाश ने 21 अगस्त को कहा कि कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीति विज्ञान पाठ्यपुस्तक टीम के पुनर्गठन को लेकर उठ रहे राजनीतिक सवाल उचित नहीं हैं, क्योंकि किसी विशेषज्ञ की पहचान उसके वैचारिक जुड़ाव से नहीं, बल्कि संबंधित विषय में उसके शोध और योगदान से होनी चाहिए। नई दिल्ली में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का राजनीतिकरण किसी भी रूप में उचित नहीं है।
विवाद की पृष्ठभूमि
टेक्स्ट बुक टीम के कुछ सदस्यों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से कथित जुड़ाव को लेकर विपक्षी हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं। वेद प्रकाश ने इन आरोपों को नया नहीं बताया — उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2000 में तैयार हुए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) पर 'सैफ्रनाइजेशन' के आरोप लगे थे, जबकि 2005 में यूपीए सरकार के समय हुए बदलावों पर 'लेफ्टिज्म' के। यह ऐसे समय में आया है जब नई शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 3 से 12वीं तक की पाठ्यपुस्तकों के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया चल रही है।
विशेषज्ञ चयन की प्रक्रिया क्या है
वेद प्रकाश ने बताया कि पाठ्यपुस्तक समिति का गठन किसी एक व्यक्ति के निर्णय से नहीं होता। पहले एक उच्चस्तरीय समिति नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर परामर्श देती है। इसके बाद एनसीईआरटी का संबंधित विभाग — जैसे सामाजिक विज्ञान विभाग — विशेषज्ञों से सलाह लेकर कार्यदल तैयार करता है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चुनते समय प्राथमिक आधार उसका शैक्षणिक शोध, विषयगत अनुभव और क्षेत्र में योगदान होता है — न कि राजनीतिक या वैचारिक संबद्धता।
सामग्री की बहु-स्तरीय समीक्षा
वेद प्रकाश ने यह भी स्पष्ट किया कि विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार की गई सामग्री सीधे अंतिम रूप नहीं लेती। वह पहले एक कोर ग्रुप के पास जाती है, जहाँ आंतरिक परीक्षण होता है। फिर अंतिम स्तर की समिति उसकी समीक्षा करती है। इसके बाद निगरानी समिति की स्वीकृति के बाद ही पुस्तक प्रिंटिंग के लिए भेजी जाती है। उनके अनुसार इस बहु-स्तरीय प्रक्रिया के कारण किसी एक व्यक्ति की वैचारिक पृष्ठभूमि का पाठ्यसामग्री पर प्रभाव पड़ना आसान नहीं है।
नई पाठ्यपुस्तकों पर आकलन
वेद प्रकाश ने नई एनसीईआरटी पुस्तकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक जो किताबें देखी हैं, वे रटने की संस्कृति से हटकर समझ और जिज्ञासा को केंद्र में रखती हैं। विशेष रूप से कक्षा 9वीं और 10वीं की पुस्तकों में विद्यार्थियों को विषय पर सवाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने मौजूदा पाठ्यक्रम को अब तक के बेहतर पाठ्यक्रमों में से एक बताया।
शिक्षा नीति में स्थिरता की ज़रूरत
वेद प्रकाश ने 1986 की शिक्षा नीति और 2020 की नई शिक्षा नीति के बीच के लंबे अंतराल का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा नीति को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय सभी दलों को मिलकर एक दीर्घकालिक और स्थिर नीति तैयार करनी चाहिए। उनका कहना था कि जरूरत के अनुसार समय-समय पर अद्यतन किए जाने चाहिए, लेकिन हर सरकार बदलने पर पाठ्यक्रम बदलने की प्रवृत्ति शिक्षा व्यवस्था को कमज़ोर करती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई पाठ्यपुस्तकें कक्षाओं में किस हद तक अपेक्षित परिणाम दे पाती हैं।