भाजपा एनसीईआरटी की किताबों का उपयोग राजनीतिक टूल के रूप में कर रही है: सुरेंद्र राजपूत
सारांश
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लखनऊ, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एनसीईआरटी की किताबों का जिक्र करते हुए भाजपा पर कटाक्ष किया है।
लखनऊ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि एनसीईआरटी की किताबों का भाजपा के लोग एक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। वे इतिहास को मिटा रहे हैं, जो कि गंभीरता से विचार करने योग्य है। कांग्रेस के नेताओं ने देश को स्वतंत्रता दिलाई है। एनसीईआरटी की किताबों में यह उल्लेख होना चाहिए कि तत्कालीन जनसंघ, हिंदू महासभा या आरएसएस ने स्वतंत्रता आंदोलन में क्यों भाग नहीं लिया। ये लोग अंग्रेजों से पेंशन क्यों लेते थे, क्यों अंग्रेजी सेनाओं में भारतीयों की भर्ती के लिए प्रेरित करते थे, और 'भारत छोड़ो आंदोलन' का विरोध क्यों किया। अगर ये बातें एनसीईआरटी की किताबों में लिखी जाएंगी तो यह और भी बेहतर होगा। समय आने पर यह भी लिखा जाएगा।
केरल के नाम को केरलम किए जाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि यह भाजपा की दोहरी नीति का एक हिस्सा है। भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनावी कारणों से वे केरल का नाम केरलम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल का नाम क्यों नहीं बदल रहे हैं। निश्चित रूप से केंद्र सरकार को ममता बनर्जी के उचित सवालों का उत्तर देना चाहिए।
शंकराचार्य के मामले में कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हम धर्म और सनातन के साथ हैं। जो लोग बदनाम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कांग्रेस जन जागरण अभियान चलाएगी। भाजपा सनातन विरोधी है।
उन्होंने कहा कि असम पूरी तरह से अराजकता और जंगलराज की गिरफ्त में है। वहां एक भ्रष्ट व्यक्ति मुख्यमंत्री है, जो महिलाओं की सुरक्षा से बिल्कुल भी चिंतित नहीं है। वे सिर्फ भ्रष्टाचार करना चाहते हैं। राहुल गांधी और मुसलमानों को निशाना बनाकर सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि इजरायल के पीएम भारत का दौरा स्थगित कर देते हैं, और हमारे पीएम इजरायल जा रहे हैं। आखिर वे क्या करने जा रहे हैं? इजरायल के अमेरिका के साथ संबंध हैं। भारत-अमेरिका व्यापार सौदे से व्यापारियों और किसानों के साथ धोखा हुआ है। ट्रंप बार-बार कहते हैं कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को रोकवाया। सरकार को बताना चाहिए कि आखिर ऑपरेशन सिंदूर क्यों रोका गया? हमारी सेना पीओके पर कब्जा करने के लिए तैयार थी।