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1975 का आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय: भाजपा नेता दीपक प्रकाश, NCERT के फैसले का स्वागत

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1975 का आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय: भाजपा नेता दीपक प्रकाश, NCERT के फैसले का स्वागत

सारांश

आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर भाजपा नेता दीपक प्रकाश ने 1975 की उस घटना को लोकतंत्र का काला अध्याय बताया और NCERT द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में इसे शामिल किए जाने के फैसले का स्वागत किया। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को इस सच्चाई से परिचित होना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

भाजपा नेता दीपक प्रकाश ने 25 जून 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय करार दिया।
उन्होंने NCERT द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।
दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका की स्वतंत्रता को कमज़ोर किया गया।
शाह आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने की माँग उठाई।
कांग्रेस द्वारा NCERT के फैसले पर सवाल उठाए जाने को भाजपा ने पार्टी की 'स्वाभाविक असहजता' बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता दीपक प्रकाश ने 25 जून 2025 को कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र और संविधान के इतिहास का सबसे काला अध्याय है, और नई पीढ़ी को इस सच्चाई से परिचित कराना अनिवार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल किए जाने के निर्णय का खुलकर स्वागत किया।

आपातकाल: लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार

दीपक प्रकाश ने कहा कि 25 जून 1975 को कांग्रेस सरकार ने देशभर में आपातकाल लागू कर नागरिक अधिकारों को सीमित कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता एवं गरिमा को कमज़ोर किया गया और सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण हुआ। उनके अनुसार, आपातकाल के विरोध में आवाज़ उठाने वाले लाखों लोगों को जेलों में बंद किया गया, कई लोकतंत्र-सेनानियों ने यातनाएँ झेलीं और अनेक लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

NCERT के फैसले पर भाजपा का समर्थन

दीपक प्रकाश ने कहा कि NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल पर अध्याय शामिल करने का निर्णय वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को देश के इतिहास के उस महत्त्वपूर्ण दौर से परिचित कराने के लिए आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को यह जानना चाहिए कि किस प्रकार उस काल में संविधान की भावना को आघात पहुँचाया गया था। उनके अनुसार, इस अध्याय को पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्र संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्त्व को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

कांग्रेस पर तीखा हमला

भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस आज लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करती है, लेकिन उसी पार्टी ने 1975 में लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का काम किया था। उन्होंने कहा कि NCERT के इस फैसले पर कांग्रेस का असहज होना स्वाभाविक है, क्योंकि आपातकाल उसके शासनकाल का हिस्सा रहा है। दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक इतिहास में कई बार संवैधानिक मर्यादाओं को कमज़ोर करने का प्रयास किया।

शाह आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग

दीपक प्रकाश ने कहा कि आपातकाल के बाद गठित शाह आयोग की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं और नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण तथ्य दर्ज हैं। देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि उस दौर में लोकतंत्र-समर्थक लोगों और आम नागरिकों के साथ क्या हुआ था।

इतिहास से सबक: आगे की राह

दीपक प्रकाश ने कहा कि इतिहास के इन तथ्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना इसलिए ज़रूरी है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा को लेकर समाज अधिक जागरूक बन सके। यह ऐसे समय में आया है जब आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर देशभर में इस विषय पर चर्चा तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि NCERT के पाठ्यक्रम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक बहस पहले से ही जारी है, और आपातकाल अध्याय का समावेश इस बहस को और गहरा करने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वह रिपोर्ट स्वयं दशकों से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है — असली सवाल यह है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने में इतना समय क्यों लगा। इतिहास की यह बहस जब तक दलीय राजनीति से ऊपर नहीं उठती, तब तक इसकी विश्वसनीयता सीमित रहेगी।
RashtraPress
25 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1975 का आपातकाल क्या था और इसे काला अध्याय क्यों कहा जाता है?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने देशभर में आपातकाल लागू किया था, जिसके तहत नागरिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, विपक्षी नेताओं और लाखों लोगों को जेल में बंद किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमज़ोर किए जाने के कारण इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय माना जाता है।
NCERT ने पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल का अध्याय क्यों शामिल किया?
NCERT ने स्कूली पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल से संबंधित अध्याय शामिल करने का निर्णय लिया है ताकि नई पीढ़ी को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की इस महत्त्वपूर्ण घटना से परिचित कराया जा सके। भाजपा नेता दीपक प्रकाश सहित कई नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है।
कांग्रेस ने NCERT के इस फैसले पर क्या रुख अपनाया है?
कांग्रेस ने NCERT के इस निर्णय पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कहना है कि कांग्रेस के लिए इस विषय पर असहज होना स्वाभाविक है, क्योंकि आपातकाल उसी के शासनकाल में लागू हुआ था।
शाह आयोग क्या था और इसकी रिपोर्ट का क्या महत्त्व है?
शाह आयोग आपातकाल के बाद गठित एक जाँच आयोग था, जिसने आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं और नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़े तथ्यों की जाँच की। दीपक प्रकाश ने माँग की है कि इस आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाया जाए ताकि देश की जनता को उस दौर की सच्चाई पता चल सके।
आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर इस बहस का क्या महत्त्व है?
25 जून 2025 को आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ है, जिस अवसर पर देशभर में इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज़ हो गई है। भाजपा इसे कांग्रेस के लोकतंत्र-विरोधी इतिहास के रूप में उजागर कर रही है, जबकि NCERT पाठ्यक्रम में बदलाव ने इस चर्चा को शैक्षणिक आयाम भी दे दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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