कांग्रेस ने संविधान की धज्जियां उड़ाईं, आपातकाल उसका सबसे बड़ा पाप: सुरेश खन्ना
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 25 जून 2025 को लखनऊ में कहा कि 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय है और कांग्रेस पार्टी ने हमेशा व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए संविधान को रौंदा है। उन्होंने एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल को शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए इसे भावी पीढ़ियों के लिए आवश्यक पाठ बताया।
संविधान पर हमले का आरोप
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, 'संविधान पर सबसे बड़ा हमला कांग्रेस पार्टी ने ही किया था। जब वह सत्ता में थी, तो उसने अपने निजी हितों के लिए इमरजेंसी लागू करके संविधान को पूरी तरह नजरअंदाज किया और उसे तहस-नहस कर दिया, जिससे पूरा देश एक जेल में बदल गया।' उन्होंने कहा कि उस दौर में देश के लाखों लोग जेल में बंद कर दिए गए थे।
1977 के चुनाव और कांग्रेस की हार
खन्ना ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि आपातकाल के बाद हुए 1977 के आम चुनाव में जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 528 में से मात्र 153 सीटें कांग्रेस को मिलीं और जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ। उनके अनुसार, यह जनादेश लोकतंत्र की पुनर्स्थापना का प्रतीक था।
एनसीईआरटी पाठ्यक्रम और कांग्रेस का विरोध
एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल और वेदों को शामिल किए जाने पर कांग्रेस के विरोध को लेकर खन्ना ने कहा, 'अच्छी शिक्षा, जिस माध्यम से मिले, वह दी जानी चाहिए। जो हमारी नीति निर्माता हैं, उन्होंने मंथन करने के बाद ही दोनों विषयों को एनसीईआरटी की नई किताबों में शामिल करने का निर्णय लिया होगा।' उन्होंने एक्स पर लिखा कि 25 जून 1975 'संविधान हत्या दिवस' था और उस तानाशाही के विरुद्ध संघर्ष करने वाली हर आवाज को नमन किया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया
इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।' पाठक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने नेताओं की कुर्सी बचाने के लिए लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया और आज भी जहाँ वह सत्ता में है, वहाँ जनहित की अनदेखी हो रही है।
आगे का राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 25 जून को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय स्तर पर तीखी नोकझोंक जारी है। गौरतलब है कि BJP ने इस तिथि को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक दुराग्रह बताती है। आने वाले दिनों में यह विमर्श विधानसभा सत्रों और चुनावी प्रचार में भी केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।