आपातकाल पर कांग्रेस देश से माफी माँगे — भाजपा नेता गौरव वल्लभ का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता गौरव वल्लभ ने 25 जून 2025 को नई दिल्ली में एक तीखे बयान में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के लिए देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो पार्टी लोकतंत्र का गला घोंट चुकी हो, उसे संविधान पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
आपातकाल और कांग्रेस पर आरोप
कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा BJP पर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाने के जवाब में वल्लभ ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1975 में संविधान को समाप्त करने की योजना बनाई, संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर किया और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए। उनके अनुसार, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है जिसे याद कर उस दौर के गवाहों की आज भी रूह काँप जाती है।
वल्लभ ने कहा कि जयराम रमेश और कांग्रेस के अन्य नेताओं को अपने घरों के बाहर खड़े होकर हाथ जोड़कर देश से माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मौलिक अधिकारों को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा था।
राहुल गांधी और जबलपुर हाईकोर्ट माफीनामा
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में लिखित माफीनामा दाखिल करने पर वल्लभ ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए माफी माँगना कोई नई बात नहीं — वह पहले बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं और बाद में अदालतों के हस्तक्षेप के बाद खेद जताते हैं।
वल्लभ ने राफेल मुद्दे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध टिप्पणियों, वीर सावरकर पर दिए गए बयानों और अब कार्तिकेय सिंह मामले का हवाला देते हुए राहुल गांधी को व्यंग्य में 'माफीवीर' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देश अब परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति से आगे बढ़ चुका है।
एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में आपातकाल अध्याय
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अध्याय शामिल किए जाने के फैसले का वल्लभ ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी, जेन-अल्फा और मिलेनियल्स सहित युवा पीढ़ी को यह जानना ज़रूरी है कि 25 जून 1975 को देश में क्या हुआ था और किस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा मौलिक अधिकारों को चुनौती दी गई थी।
उनके अनुसार, पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से यह इतिहास नई पीढ़ी तक पहुँचना चाहिए ताकि वे समझ सकें कि देशवासियों ने किस प्रकार लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर BJP और कांग्रेस के बीच इतिहास की व्याख्या को लेकर राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। गौरतलब है कि 25 जून को हर वर्ष BJP 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में चिह्नित करती है। वल्लभ के इस बयान से आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच आपातकाल की विरासत पर बहस और तेज होने की संभावना है।