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आपातकाल पर कांग्रेस देश से माफी माँगे — भाजपा नेता गौरव वल्लभ का तीखा हमला

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आपातकाल पर कांग्रेस देश से माफी माँगे — भाजपा नेता गौरव वल्लभ का तीखा हमला

सारांश

आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर BJP नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस को घेरा — 1975 की 'संवैधानिक हत्या' के लिए सार्वजनिक माफी की माँग की, राहुल गांधी को 'माफीवीर' कहा और एनसीईआरटी के नए आपातकाल अध्याय को ऐतिहासिक ज़रूरत बताया।

मुख्य बातें

BJP नेता गौरव वल्लभ ने 25 जून 2025 को कांग्रेस से 1975 के आपातकाल के लिए देशवासियों से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
उन्होंने जयराम रमेश के BJP पर दो-तिहाई बहुमत के आरोप को खारिज करते हुए कांग्रेस पर संविधान और मौलिक अधिकारों को कमज़ोर करने का पलटवार किया।
राहुल गांधी द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में 2018 के मानहानि मामले में लिखित माफीनामा दाखिल करने पर वल्लभ ने उन्हें 'माफीवीर' कहा।
वल्लभ ने एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल अध्याय शामिल किए जाने का समर्थन किया, इसे युवा पीढ़ी की शिक्षा के लिए ज़रूरी बताया।
यह बयान आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ के अवसर पर आया, जब BJP इस दिन को 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में मनाती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता गौरव वल्लभ ने 25 जून 2025 को नई दिल्ली में एक तीखे बयान में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के लिए देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो पार्टी लोकतंत्र का गला घोंट चुकी हो, उसे संविधान पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है।

आपातकाल और कांग्रेस पर आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा BJP पर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाने के जवाब में वल्लभ ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1975 में संविधान को समाप्त करने की योजना बनाई, संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर किया और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए। उनके अनुसार, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का वह काला अध्याय है जिसे याद कर उस दौर के गवाहों की आज भी रूह काँप जाती है।

वल्लभ ने कहा कि जयराम रमेश और कांग्रेस के अन्य नेताओं को अपने घरों के बाहर खड़े होकर हाथ जोड़कर देश से माफी माँगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मौलिक अधिकारों को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा था।

राहुल गांधी और जबलपुर हाईकोर्ट माफीनामा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में लिखित माफीनामा दाखिल करने पर वल्लभ ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए माफी माँगना कोई नई बात नहीं — वह पहले बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं और बाद में अदालतों के हस्तक्षेप के बाद खेद जताते हैं।

वल्लभ ने राफेल मुद्दे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध टिप्पणियों, वीर सावरकर पर दिए गए बयानों और अब कार्तिकेय सिंह मामले का हवाला देते हुए राहुल गांधी को व्यंग्य में 'माफीवीर' की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि देश अब परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति से आगे बढ़ चुका है।

एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में आपातकाल अध्याय

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल पर अध्याय शामिल किए जाने के फैसले का वल्लभ ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी, जेन-अल्फा और मिलेनियल्स सहित युवा पीढ़ी को यह जानना ज़रूरी है कि 25 जून 1975 को देश में क्या हुआ था और किस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा मौलिक अधिकारों को चुनौती दी गई थी।

उनके अनुसार, पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से यह इतिहास नई पीढ़ी तक पहुँचना चाहिए ताकि वे समझ सकें कि देशवासियों ने किस प्रकार लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की।

राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर BJP और कांग्रेस के बीच इतिहास की व्याख्या को लेकर राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। गौरतलब है कि 25 जून को हर वर्ष BJP 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में चिह्नित करती है। वल्लभ के इस बयान से आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच आपातकाल की विरासत पर बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि आपातकाल की 50वीं वर्षगाँठ पर BJP की सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है — जिसमें एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, अदालती माफीनामे और संसदीय बहस को एक साथ पिरोकर कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में धकेला जा रहा है। विडंबना यह है कि BJP जिस 'संविधान की रक्षा' का दावा करती है, उस पर विपक्ष और नागरिक समाज के कई वर्गों के अपने सवाल हैं। 'माफीवीर' जैसे व्यंग्यात्मक शब्द मीडिया में तो चलते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 1975 की ऐतिहासिक जवाबदेही की माँग को आज की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से अलग रखा जा सकता है — या दोनों एक-दूसरे में घुलमिल गई हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरव वल्लभ ने कांग्रेस से आपातकाल पर माफी माँगने की माँग क्यों की?
BJP नेता गौरव वल्लभ ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के BJP पर दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के आरोप के जवाब में यह माँग रखी। उनका कहना है कि जिस पार्टी ने 1975 में आपातकाल लगाकर संविधान और मौलिक अधिकारों को कुचला, उसे संविधान पर उपदेश देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
राहुल गांधी ने जबलपुर हाईकोर्ट में किस मामले में माफीनामा दाखिल किया?
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह से जुड़े 2018 के मानहानि मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में लिखित माफीनामा दाखिल किया और खेद व्यक्त किया। गौरव वल्लभ ने इसे राहुल गांधी की 'पहले आरोप, बाद में माफी' की कार्यशैली का एक और उदाहरण बताया।
एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल अध्याय क्यों जोड़ा गया?
एनसीईआरटी ने नई पाठ्यपुस्तक में 25 जून 1975 के आपातकाल पर एक अध्याय शामिल किया है ताकि युवा पीढ़ी को उस दौर की घटनाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर पड़े प्रभाव की जानकारी मिल सके। गौरव वल्लभ ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि जेन-ज़ी और मिलेनियल्स सहित सभी युवाओं को यह इतिहास जानना ज़रूरी है।
1975 का आपातकाल क्या था और इसे क्यों याद किया जाता है?
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो 21 महीने तक चला। इस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और विपक्षी नेताओं को जेल भेजा गया। BJP इसे 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में चिह्नित करती है।
गौरव वल्लभ ने राहुल गांधी को 'माफीवीर' क्यों कहा?
वल्लभ ने कहा कि राहुल गांधी राफेल मुद्दे, PM मोदी के विरुद्ध टिप्पणियों, वीर सावरकर पर बयानों और अब कार्तिकेय सिंह मामले सहित कई मौकों पर माफी माँग चुके हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी पहले बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं और फिर अदालती दबाव में खेद व्यक्त करते हैं — इसीलिए उन्होंने व्यंग्य में 'माफीवीर' शब्द का प्रयोग किया।
राष्ट्र प्रेस
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