आपातकाल वर्षगांठ पर राजीव चंद्रशेखर का आह्वान: संविधान की रक्षा रोज़ करें, साल में एक बार नहीं
सारांश
मुख्य बातें
केरल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने 26 जून 2026 को 1975 के आपातकाल की वर्षगांठ पर तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा हर नागरिक की सामूहिक और निरंतर जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दायित्व किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक भारतीय नागरिक को इसे प्रतिदिन निभाना होगा।
आपातकाल को बताया संवैधानिक ढाँचे पर गंभीर हमला
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि लगभग पाँच दशक पूर्व तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल भारत के संवैधानिक ढाँचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सबसे गंभीर हमलों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उठाए गए कदम राष्ट्रीय सुरक्षा या राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि 'एक राजनीतिक दल और एक राजनीतिक परिवार' को बचाने के लिए थे। गौरतलब है कि यह वर्षगांठ हर साल उस दिन मनाई जाती है जब 25 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी।
मौलिक अधिकारों के दमन पर चिंता
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित मौलिक अधिकारों को कुचलने के लिए क्रूर बल का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता पर उस दौर में लगाए गए अंकुश आज भी यह याद दिलाते हैं कि संवैधानिक अधिकारों के किसी भी हनन के प्रति सतर्क रहना क्यों ज़रूरी है।
समकालीन मुद्दों से जोड़ा संवैधानिक सुरक्षा का सवाल
चंद्रशेखर ने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार और संपत्ति अधिकारों से जुड़े उभरते मुद्दों पर चिंता जताई। वक्फ संपत्ति विवाद पर चल रही बहस का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि संपत्ति से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा का पालन बिना किसी समझौते के होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र प्रेस अपरिहार्य है।
संविधान पर सवाल उठाने वालों के सत्ता में होने पर उठाए सवाल
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि जिन संगठनों ने खुलेआम भारतीय संविधान को चुनौती दी थी या उसे नकारा था, वे आज मुख्यधारा की राजनीति और सत्ता के पदों पर काबिज हो गए हैं। यह टिप्पणी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी, हालाँकि उन्होंने किसी संगठन का नाम नहीं लिया।
नागरिकों से निरंतर सतर्कता का आग्रह
चंद्रशेखर ने कहा कि 'जो इतिहास से सबक नहीं सीखते, वे उसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं' — और यह चेतावनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 1975 में थी। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि संवैधानिक मूल्यों को एक साझा राष्ट्रीय दायित्व मानें और आपातकाल की वर्षगांठ को महज एक वार्षिक स्मरण तक सीमित न रखें। यह ऐसे समय में आया है जब देश में संविधान और नागरिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।