3 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजनारायण बसु की 200वीं जयंती: RSS सरकार्यवाह ने राष्ट्रीय चेतना के पितामह को किया नमन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजनारायण बसु की 200वीं जयंती: RSS सरकार्यवाह ने राष्ट्रीय चेतना के पितामह को किया नमन

सारांश

राष्ट्रीय चेतना के पितामह राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर RSS सरकार्यवाह ने नमन किया। श्री अरविंद के नाना, 'हिंदू मेला' के प्रेरणास्रोत और स्वदेशी भावना के अग्रदूत बसु के विचारों की गूँज आज भी भारतीय सांस्कृतिक विमर्श में सुनाई देती है।

मुख्य बातें

RSS सरकार्यवाह ने 3 नवंबर 2026 को समाज सुधारक राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बसु का जन्म 7 दिसंबर 1826 को बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बोराल गाँव में हुआ था।
उन्होंने महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और नशामुक्ति के लिए उल्लेखनीय सामाजिक सुधार कार्य किए।
1867 में हिंदू मेला के माध्यम से स्वदेशी भावना और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई।
1873 में 'द सुपीरियरिटी ऑफ हिंदुइज्म' और 1880 के दशक में 'वृद्धा हिंदुर आशा' जैसी प्रभावशाली रचनाएँ कीं।
वे महर्षि श्री अरविंद के नाना थे; रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद उनसे प्रेरणा लेते थे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह ने 3 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत और समाज सुधारक राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सरकार्यवाह ने कहा कि बसु ने भारतीय शिक्षित समाज में राष्ट्रीय चेतना, सांस्कृतिक गौरव और आत्मसम्मान की भावना जागृत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, और उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

कौन थे राजनारायण बसु

राजनारायण बसु का जन्म 7 दिसंबर 1826 को बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बोराल गाँव में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उन्होंने संस्कृत स्कूल में अध्यापन किया और अपना संपूर्ण जीवन सामाजिक सुधार को समर्पित कर दिया। उन्होंने गरीबों के उत्थान, नशामुक्ति, महिला शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के लिए अथक प्रयास किए। इस दिशा में स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने अपने भाई का विवाह एक विधवा से कराया था।

राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में योगदान

सरकार्यवाह के बयान के अनुसार, ब्रिटिश आक्रमण ने भारतीय शिक्षित समाज को उसकी सभ्यतागत जड़ों से दूर कर दिया था। ऐसे विकट समय में बसु ने शिक्षित वर्ग में आत्मगौरव और आत्मविश्वास की भावना विकसित करने के लिए निरंतर कार्य किया। उनका दृढ़ मत था कि इन गुणों के बिना किसी भी राष्ट्र का उत्थान संभव नहीं है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने 'प्रॉस्पेक्टस ऑफ ए सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ नेशनल फीलिंग' नामक प्रारूप तैयार किया था।

उनके प्रयासों से 1867 में नबगोपाल मित्र द्वारा आरंभ हिंदू मेला राष्ट्रीय चेतना के प्रसार का एक सशक्त मंच बना। बसु ने इस मंच के माध्यम से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की पुरजोर वकालत की और स्वदेशी भावना को समाज में स्थापित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण काम किया। वे मातृभाषा को आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार मानते थे।

साहित्यिक एवं वैचारिक विरासत

1873 में बसु ने 'द सुपीरियरिटी ऑफ हिंदुइज्म' नामक महत्त्वपूर्ण पुस्तक की रचना की, जिसमें हिंदू संस्कृति की दार्शनिक शक्ति और विशिष्टताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। वे हिंदू धर्म को भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का आधार मानते थे। उन्होंने सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय जागरण के लिए 'महा हिंदू समिति' की परिकल्पना भी की थी, जिसे उन्होंने 1880 के दशक में प्रकाशित अपनी चर्चित पुस्तिका 'वृद्धा हिंदुर आशा' (एक वृद्ध हिंदू की आशा) में विस्तार से रखा। उन्हें भारतीय राष्ट्रीय चेतना के पितामह के रूप में भी जाना जाता है।

महान विभूतियों पर प्रभाव

बयान में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि राजनारायण बसु महर्षि श्री अरविंद के नाना थे। उनके विचारों और राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का युवा अरविंद पर गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ा था। रवींद्रनाथ टैगोर, स्वामी विवेकानंद और सिस्टर निवेदिता सहित भारतीय राष्ट्रीय पुनर्जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी अनेक महान विभूतियाँ उनका गहन सम्मान करती थीं और उनके जीवन एवं विचारों से प्रेरणा ग्रहण करती थीं।

आज भी प्रासंगिक हैं उनके विचार

सरकार्यवाह ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि बसु के विचार और दर्शन आत्मगौरव, सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता के महत्त्व की निरंतर याद दिलाते हैं। गौरतलब है कि यह श्रद्धांजलि ऐसे समय में दी गई है जब भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को लेकर व्यापक सार्वजनिक विमर्श के दौर से गुज़र रहा है। राष्ट्र उनके अमूल्य योगदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मातृभाषा और हिंदू सांस्कृतिक एकता की विरासत को संघ की वर्तमान विचारधारा से जोड़ती है। यह उल्लेखनीय है कि बसु को मुख्यधारा के इतिहास-लेखन में वह स्थान नहीं मिला जो उनके प्रभाव के अनुरूप होना चाहिए था — जबकि श्री अरविंद जैसे उनके वैचारिक उत्तराधिकारियों की चर्चा व्यापक है। 200वीं जयंती पर यह पुनर्स्मरण बसु की विरासत के पुनर्मूल्यांकन का अवसर हो सकता है, बशर्ते इसके साथ शैक्षणिक और सामाजिक विमर्श भी हो — केवल संस्थागत श्रद्धांजलि तक यह सीमित न रहे।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनारायण बसु कौन थे और उन्हें 'राष्ट्रीय चेतना का पितामह' क्यों कहा जाता है?
राजनारायण बसु 19वीं सदी के बंगाली समाज सुधारक, शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी विचारक थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासनकाल में भारतीय समाज में सांस्कृतिक आत्मगौरव और राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का अग्रणी कार्य किया। स्वदेशी भावना, मातृभाषा प्रेम और हिंदू सांस्कृतिक पुनर्जागरण में उनके योगदान के कारण उन्हें यह उपाधि दी जाती है।
राजनारायण बसु का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
राजनारायण बसु का जन्म 7 दिसंबर 1826 को बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बोराल गाँव में हुआ था। इस वर्ष 2026 में उनकी 200वीं जयंती मनाई जा रही है।
राजनारायण बसु और श्री अरविंद का क्या संबंध था?
राजनारायण बसु महर्षि श्री अरविंद के नाना थे। बसु के राष्ट्रवादी विचारों और दर्शन का युवा अरविंद पर गहरा और स्थायी प्रभाव पड़ा, जो आगे चलकर भारत के महानतम आध्यात्मिक एवं राजनीतिक विचारकों में से एक बने।
हिंदू मेला क्या था और इसमें राजनारायण बसु की क्या भूमिका थी?
हिंदू मेला 1867 में नबगोपाल मित्र द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजन था, जो राष्ट्रीय चेतना के प्रसार का महत्त्वपूर्ण मंच बना। राजनारायण बसु ने इस मंच के माध्यम से स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग की वकालत की और स्वदेशी भावना को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया।
RSS सरकार्यवाह ने राजनारायण बसु की 200वीं जयंती पर क्या कहा?
RSS सरकार्यवाह ने अपने बयान में कहा कि राजनारायण बसु ने भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के गौरवशाली अध्याय में राष्ट्रीय चेतना, आत्मगौरव और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव को पुनर्स्थापित करने में अतुलनीय योगदान दिया। उन्होंने कहा कि बसु के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और राष्ट्र उनके योगदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले