अगा सैयद रुहुल्लाह का नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा पलटवार: अनुच्छेद 370 और चुनावी वादों पर घेरा
सारांश
मुख्य बातें
सांसद अगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के कार्यालय ने 3 नवंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत बयान जारी कर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। बयान में पार्टी पर अनुच्छेद 370 की बहाली समेत अपने चुनावी वादों से मुकरने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया गया। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में यह जुबानी जंग तेज़ी से नया मोड़ ले रही है।
विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला
रुहुल्लाह के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि कुरान का संदर्भ सबसे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने उठाया था और रुहुल्लाह ने केवल उसका जवाब दिया। कार्यालय ने कहा कि पार्टी उनके जवाब से इसलिए नाराज़ है, क्योंकि उसने नेतृत्व को असहज कर दिया। बयान में यह भी कहा गया कि पार्टी का साहस तभी सामने आता है, जब उससे सवाल पूछे जाते हैं।
कार्यालय ने तंज़ कसते हुए कहा कि एनसी को उस व्यक्ति पर तो गुस्सा आता है जो उसे उसके वादे याद दिलाए, लेकिन जम्मू-कश्मीर के अधिकार छीनने वालों के प्रति कोई आक्रोश नज़र नहीं आता।
अनुच्छेद 370 पर सीधा सवाल
बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस से पूछा गया कि जब उसने चुनाव के दौरान अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए वोट माँगे थे, तो जीत के बाद यह कहना क्यों शुरू हो गया कि जिसने इसे हटाया वही इसे वापस नहीं लाएगा। कार्यालय ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उस समय केंद्र की सत्ता में थी और एनसी को पहले से पता था कि उसे किससे बातचीत करनी होगी — फिर चुनाव के बाद रुख क्यों बदला?
कार्यालय ने यह भी सवाल किया कि क्या एनसी के नेताओं ने संसद में रुहुल्लाह के भाषण ध्यान से सुने हैं, या उनका अध्ययन केवल उन्हीं बातों तक सीमित है जो पार्टी नेतृत्व को सुकून देती हैं।
आरक्षण और 2010 का संदर्भ
कार्यालय ने दिसंबर 2024 की उस घटना का उल्लेख किया, जब अगा सैयद रुहुल्लाह मुख्यमंत्री आवास के बाहर छात्रों के साथ आरक्षण-विरोधी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। बयान में कहा गया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आरक्षण से जुड़ी विसंगतियाँ दूर करने का वादा किया था, लेकिन अब केवल एक समिति और 'लंबित फाइल' का हवाला दिया जा रहा है।
कार्यालय ने माँग की कि पार्टी निर्णय, उसकी तारीखों और प्रस्ताव से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि छात्रों को पता चल सके कि क्या प्रस्तावित हुआ, कब भेजा गया और अब तक क्या लंबित है। वर्ष 2010 की घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा गया कि रुहुल्लाह तत्कालीन सरकार का हिस्सा थे और उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है — लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से ऐसी स्वीकारोक्ति कहाँ है?
सीट वापसी और राजनीतिक स्वतंत्रता का दावा
बयान में कहा गया कि अगा सैयद रुहुल्लाह ने वह सीट लौटा दी जिसे पार्टी बार-बार उनके खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही थी, जबकि पार्टी के नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गए। कार्यालय ने दोटूक कहा कि रुहुल्लाह का राजनीतिक अस्तित्व किसी नेता की देन नहीं है — वोट और सीटें जनता की हैं।
एनसी नेतृत्व पर यह भी आरोप लगाया गया कि वह सार्वजनिक पद को 'पारिवारिक विरासत' समझता है और सवाल उठाने वालों को 'एहसान फरामोश' करार देता है।
ब्रिटेन पर तंज़ और आगे की राह
बयान के अंत में रुहुल्लाह के कार्यालय ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली जाकर नेताओं को शॉल भेंट करना और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों की बहाली का जनादेश साथ लेकर सत्ता में आना — यह किस तरह की राजनीतिक कुशलता है? ब्रिटेन और लंदन का ज़िक्र करते हुए एनसी नेतृत्व के 'ब्रिटिश समर्थक' पर तंज़ कसा गया और कहा गया कि उन्हें लंदन वापस भेजने के लिए प्रथम श्रेणी के टिकट का खर्च रुहुल्लाह खुद उठाएंगे।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन के बाद से ही पार्टी के भीतर और बाहर दोनों तरफ से चुनावी वादों की जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में एनसी के नेतृत्व की ओर से इस पर औपचारिक प्रतिक्रिया की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।