3 नवंबर 2026
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नेशनल कॉन्फ्रेंस का अगा रुहुल्लाह पर पलटवार: 'भाषण मानसिक और नैतिक दिवालियेपन का प्रमाण'

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नेशनल कॉन्फ्रेंस का अगा रुहुल्लाह पर पलटवार: 'भाषण मानसिक और नैतिक दिवालियेपन का प्रमाण'

सारांश

नेशनल कॉन्फ्रेंस और अगा रुहुल्लाह मेहदी के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी ने उनके भाषण को 'दिवालियेपन' बताया और 25 साल की राजनीतिक यात्रा का हवाला देते हुए पूछा — जब पार्टी ने सब दिया, तब जमीर कहाँ था? यह विवाद जम्मू-कश्मीर में विशेष दर्जे और आरक्षण की राजनीति को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 3 नवंबर 2026 को एक्स पर बयान जारी कर अगा रुहुल्लाह मेहदी के भाषण को 'मानसिक और नैतिक दिवालियेपन' करार दिया।
पार्टी ने रुहुल्लाह पर बडगाम उपचुनाव में पार्टी की हार का जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
रुहुल्लाह के सांसद पद से इस्तीफे को पार्टी ने 'देर से उठाया गया कदम' बताया।
पार्टी ने सवाल किया कि उन्होंने विशेष दर्जे के लिए संसद में 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर क्यों नहीं जुटाए, जैसा उन्होंने महाभियोग प्रस्ताव के लिए किया था।
पार्टी ने माना कि आरक्षण संशोधन की फाइल उच्च स्तर पर रोकी गई है, और दावा किया कि रुहुल्लाह ने इस पर केंद्र से कभी जवाब नहीं माँगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि 90 वर्षों की वैचारिक प्रतिबद्धता विशेष दर्जे की कीमत पर नहीं छोड़ी जाएगी।

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) ने 3 नवंबर 2026 को सांसद अगा रुहुल्लाह मेहदी पर तीखा पलटवार करते हुए उनके हालिया भाषण को 'मानसिक और नैतिक दिवालियेपन' का प्रदर्शन करार दिया। पार्टी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी विस्तृत बयान में रुहुल्लाह पर आत्ममुग्धता का आरोप लगाया और कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के खिलाफ उनकी भाषा 'अपमानजनक, अभद्र और असंसदीय' थी। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रुहुल्लाह ने विशेष दर्जे और आरक्षण के मुद्दों पर पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया है।

भाषण पर पार्टी की आपत्ति

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि अगा रुहुल्लाह एक ओर पवित्र कुरान और इंसान की गरिमा की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो उनके अपने घोषित मूल्यों से मेल नहीं खाती। पार्टी ने कहा कि रुहुल्लाह की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा उनके व्यक्तित्व को स्वयं उजागर करती है।

पार्टी ने यह भी रेखांकित किया कि रुहुल्लाह ने वर्ष 2010 की घटनाओं का उल्लेख अब किया, जब उन्हें इसकी राजनीतिक ज़रूरत महसूस हुई। गौरतलब है कि उन्होंने उस वर्ष मंत्री पद पर बने रहकर सामान्य फेरबदल के दौरान हटाए जाने के बाद 2014 का विधानसभा चुनाव भी पार्टी के टिकट पर लड़ा था।

इस्तीफे पर सवाल

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह के सांसद पद से इस्तीफे के फैसले को 'देर से उठाया गया कदम' बताया। पार्टी का आरोप है कि उन्हें एक साल पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था, जब उन्होंने उन ताकतों का साथ देना शुरू किया था जो पार्टी को मिले जनादेश से असहज थीं। पार्टी ने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में रहते हुए रुहुल्लाह बडगाम विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार रहे।

पार्टी ने सवाल किया कि जिस पार्टी ने उन्हें तीन बार विधायक, मंत्री और सांसद बनाया, उसी को नुकसान पहुँचाते समय उनका जमीर कहाँ था?

संसदीय भूमिका पर सवाल

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह के संसदीय कार्यकाल की भी पड़ताल की। पार्टी ने याद दिलाया कि वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने में सफल रहे थे। तब पार्टी ने पूछा कि क्या उन्होंने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे या राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए भी कभी इस तरह का प्रयास किया?

पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या रुहुल्लाह ने संसद में कभी यह मुद्दा उठाया कि केंद्र सरकार और उपराज्यपाल ने निर्वाचित सरकार की शक्तियों को कमजोर किया है और उपराज्यपाल 'रिमोट कंट्रोल' के ज़रिए विभागों को चला रहे हैं।

आरक्षण विवाद और सरकार का पक्ष

पार्टी ने स्वीकार किया कि उपराज्यपाल के शासनकाल में ओपन मेरिट वर्ग के साथ 'गंभीर अन्याय' हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया था और बदलाव का वादा किया था। पार्टी के अनुसार, राज्य सरकार ने आरक्षण व्यवस्था में संशोधन के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित कर महत्वपूर्ण बदलाव भी किए, लेकिन संबंधित फाइल 'उच्च स्तर पर रोक' दी गई है।

पार्टी ने पूछा कि क्या रुहुल्लाह ने संसद में यह प्रश्न उठाया कि जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल के आरक्षण संबंधी फैसले को क्यों रोका गया?

पार्टी की वैचारिक प्रतिबद्धता

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य के दर्जे की बहाली की माँग कभी भी विशेष दर्जे की बहाली की कीमत पर नहीं होगी। पार्टी ने कहा कि निर्वाचित सरकार के गठन के आरंभ में ही विशेष दर्जे का प्रस्ताव प्राथमिकता बनना और मुख्यमंत्री का 15 अगस्त के संबोधन में इसका उल्लेख करना, पार्टी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

पार्टी ने कहा कि 90 वर्षों से अधिक की राजनीतिक विरासत को छोड़ना उनके लिए अपनी विचारधारा को ही छोड़ना होगा। पार्टी ने यह भी कहा कि छीने गए अधिकार वापस पाने के लिए 'कुशल राजनीतिक रणनीति' चाहिए, न कि 'नाटकीय गतिविधियाँ' जो केवल सोशल मीडिया पर लोकप्रियता तो दिला सकती हैं, लेकिन जनता के लिए कोई ठोस परिणाम नहीं देती। इस विवाद के आगे बढ़ने की संभावना है क्योंकि रुहुल्लाह के इस्तीफे के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नई दरारें उभर रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पार्टी यह नहीं बता पाई कि आरक्षण की फाइल 'उच्च स्तर पर' रुकी है तो इसे सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों हुई। रुहुल्लाह की आलोचना में राजनीतिक अवसरवाद की झलक हो सकती है, लेकिन जो सवाल उन्होंने उठाए हैं — संसद में निष्क्रियता, उपराज्यपाल के वर्चस्व पर खामोशी — वे मुख्यधारा की कवरेज में अनुत्तरित रह जाते हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल कॉन्फ्रेंस और अगा रुहुल्लाह मेहदी के बीच विवाद की असली वजह क्या है?
यह विवाद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली और सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर है। रुहुल्लाह ने इन मुद्दों पर निर्वाचित सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया, जिसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीखा पलटवार किया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह के इस्तीफे पर क्या कहा?
पार्टी ने इस्तीफे को 'देर से उठाया गया कदम' बताया और आरोप लगाया कि उन्हें एक साल पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। पार्टी का दावा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में रहते हुए रुहुल्लाह बडगाम विधानसभा उपचुनाव में पार्टी की हार के जिम्मेदार बने।
आरक्षण के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का क्या रुख है?
पार्टी ने माना कि उपराज्यपाल के शासनकाल में ओपन मेरिट वर्ग के साथ अन्याय हुआ। उसने चुनावी वादे के तहत मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित कर संशोधन किए, लेकिन पार्टी के अनुसार संबंधित फाइल 'उच्च स्तर पर रोक' दी गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह की संसदीय भूमिका पर क्या सवाल उठाए?
पार्टी ने पूछा कि जब रुहुल्लाह 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर महाभियोग प्रस्ताव के लिए जुटा सके, तो विशेष दर्जे या राज्य के दर्जे की बहाली के लिए उन्होंने संसद में कोई प्रस्ताव या विधेयक क्यों नहीं लाया। पार्टी ने यह भी पूछा कि उन्होंने उपराज्यपाल द्वारा निर्वाचित सरकार की शक्तियों को कमजोर किए जाने का मुद्दा संसद में क्यों नहीं उठाया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2010 की घटनाओं को लेकर क्या कहा?
पार्टी ने सवाल किया कि रुहुल्लाह को 2010 की घटनाएँ 16 साल बाद 2026 में ही क्यों याद आईं। पार्टी का तर्क है कि वे उस दौरान मंत्री पद पर बने रहे और बाद में 2014 में पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़े, इसलिए यह देर से उठाया गया मुद्दा राजनीतिक सुविधानुसार दिखता है।
राष्ट्र प्रेस
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