महाराष्ट्र सीईटी में ₹2,300 करोड़ के घोटाले का आरोप, रोहित पवार ने न्यायिक जांच और मंत्री के इस्तीफे की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) और केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया में कथित तौर पर ₹2,300 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने मामले की तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग करते हुए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और महाराष्ट्र सीईटी आयुक्त दिलीप सरदेसाई के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
आरोपों का केंद्र: एडुस्पार्क और ठेके में हेरफेर
रोहित पवार के अनुसार, एडुस्पार्क नामक एक निजी कंपनी और उससे जुड़ी सहयोगी कंपनियों ने कथित तौर पर धांधली और हेरफेर से भरी निविदा प्रक्रियाओं के ज़रिये सरकारी ठेके हासिल किए। उनके अनुसार, ये ठेके सीईटी परीक्षा प्रबंधन, कौशल विकास परियोजनाओं, शैक्षिक सॉफ्टवेयर और कई राज्य विभागों में बुनियादी ढाँचा सेवाओं से संबंधित थे।
पवार ने ज़ोर देकर कहा कि सीईटी सेल एक सरकारी विभाग है, न कि एमपीएससी जैसा स्वायत्त निकाय — इसलिए इसकी सीधी जवाबदेही राज्य सरकार पर बनती है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई व्यक्ति इस घोटाले में शामिल है, तो वह मंत्री चंद्रकांत पाटिल या उनसे जुड़ा कोई व्यक्ति हो सकता है। उन्होंने वादा किया कि जल्द ही सोशल मीडिया पर उस कथित अज्ञात सहयोगी की पहचान सार्वजनिक की जाएगी।
स्टिंग ऑपरेशन का दावा और एफआईआर का इंतज़ार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक शिक्षक ने दावा किया कि उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन चलाया, जिसमें एक ऐसी एजेंसी का पर्दाफाश हुआ जो कथित तौर पर प्रति छात्र ₹25 लाख लेकर सीईटी परीक्षा में शीर्ष परिणाम की गारंटी देती थी। पवार ने कहा कि मुखबिरों द्वारा पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस आयुक्त कार्यालय को दस्तावेज़ी सबूत सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज नहीं की गई है।
पवार ने पुलिस और राज्य अधिकारियों की प्रस्तुत साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ करने के लिए कड़ी आलोचना की और स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने वाले शिक्षकों के लिए राज्य सुरक्षा की माँग की। उन्होंने सीईटी अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रगति और विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।
प्रमुख मांगें
पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से माँग की कि एडुस्पार्क और उसकी सहयोगी कंपनियों को दिए गए सभी ठेकों की तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और व्यापक फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया जाए। साथ ही उन्होंने माँग की कि आगामी मार्च में होने वाली सीईटी परीक्षाएँ ऑफलाइन मोड में आयोजित की जाएँ, ताकि सॉफ्टवेयर में हेराफेरी और डिजिटल कदाचार को रोका जा सके।
पवार ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार 10 दिनों के भीतर निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो विपक्ष इस मुद्दे को पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक रूप से उठाएगा।
सरकार की प्रतिक्रिया
उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के कार्यालय के सूत्रों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को सभी साक्ष्य सक्षम जांच एजेंसियों को औपचारिक रूप से सौंप देने चाहिए। सूत्रों ने आश्वासन दिया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। हालाँकि, न तो मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से कोई बयान दिया, और न ही इस्तीफे की किसी माँग पर प्रत्यक्ष टिप्पणी की गई।
क्या होगा आगे
यह आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब महाराष्ट्र में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पहले से ही सवालों के घेरे में है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर कई परीक्षाओं में कदाचार के मामले उठने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भरोसे की कमी बढ़ी है। यदि 10 दिनों में सरकार की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो विपक्ष के अगले राजनीतिक अभियान की रूपरेखा स्पष्ट दिखती है।