इंडो पैसिफिक डायलॉग 2026: जापान ने अमेरिका को बताया भरोसेमंद सहयोगी, भारतीय नौसेना हर महीने जोड़ रही नया युद्धपोत
सारांश
मुख्य बातें
इंडो पैसिफिक रीजनल डायलॉग 2026 में नई दिल्ली के मंच पर 3 नवंबर 2026 को हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और नौसैनिक सहयोग पर गहन विचार विमर्श हुआ। जापान के रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर पीस एंड सिक्योरिटी, टोक्यो के अध्यक्ष हिदेशी तोकुची ने हिंद प्रशांत में नौवहन की स्वतंत्रता और अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को क्षेत्रीय स्थिरता की आधारशिला बताया, जबकि भारतीय नौसेना के पूर्व वाइस एडमिरल संजय महिंद्रू ने कहा कि भारतीय नौसेना अब लगभग हर महीने एक नया युद्धपोत अपने बेड़े में शामिल कर रही है।
जापान का दृष्टिकोण: अमेरिका संग रणनीतिक साझेदारी अपरिहार्य
हिदेशी तोकुची ने संवाद में स्पष्ट किया कि जापान एक समुद्री आवागमन पर निर्भर देश है, इसलिए हिंद प्रशांत क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "जापान संयुक्त राज्य अमेरिका का बेहद करीबी सहयोगी है। हिंद प्रशांत क्षेत्र में, विशेषकर प्रशांत महासागर के पश्चिमी हिस्से में, अमेरिकी सेना की मौजूदगी बहुत महत्वपूर्ण है।"
तोकुची ने यह भी रेखांकित किया कि क्षेत्रीय स्थिरता को मज़बूत करने में जापान की एक प्रमुख भूमिका है — अमेरिका के लिए भरोसेमंद तैनाती का माहौल तैयार करना और उसे पूर्वी एशिया की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में सक्रिय बनाए रखना। उन्होंने माना कि यह दृष्टिकोण भारतीय नज़रिए से थोड़ा भिन्न हो सकता है, जो भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की पारंपरिक नीति का संकेत है।
भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत
पूर्व वाइस एडमिरल संजय महिंद्रू ने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी नौसेनाओं में से एक है और उसकी ज़िम्मेदारियाँ बहुआयामी हैं — युद्ध संचालन से लेकर आपदा राहत, समुद्री डकैती पर नियंत्रण, पड़ोसी छोटे देशों को समुद्री निगरानी में सहयोग और जल सर्वेक्षण तक।
महिंद्रू ने बताया, "पिछले साल और इस साल, लगभग हर महीने कार्वेट श्रेणी से लेकर विध्वंसक श्रेणी तक का एक नया जहाज़ नौसेना के बेड़े में शामिल हो रहा है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि नौसेना चौबीसों घंटे, वर्ष के 365 दिन अपने दायित्वों का निर्वहन करती है, फिर भी क्षमता और ज़िम्मेदारी के बीच का अंतर अभी पूरी तरह नहीं पाटा जा सका है।
छोटे देशों की समुद्री सुरक्षा में भारत की भूमिका
महिंद्रू ने ध्यान दिलाया कि कई छोटे द्वीपीय और तटीय देशों के पास यह जानने की क्षमता नहीं होती कि उनके अनन्य आर्थिक क्षेत्र में कौन से जहाज़ आ जा रहे हैं। ऐसे में भारतीय नौसेना इन देशों को समुद्री सूचना साझाकरण और जल सर्वेक्षण में मदद करती है। यह भूमिका भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति के अनुरूप है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब हिंद प्रशांत में चीन की नौसैनिक उपस्थिति तेज़ी से बढ़ रही है और क्वाड देशों — भारत, अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया — के बीच समन्वय पर नई बहस छिड़ी हुई है।
क्या होगा आगे
इस संवाद से निकलने वाली नीतिगत सिफारिशें भारत जापान द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग की रूपरेखा को और पुख्ता कर सकती हैं। महिंद्रू ने स्पष्ट किया कि भारत की बढ़ती व्यापारिक समृद्धि और समुद्री वाणिज्य के साथ साथ नौसेना का विस्तार भी जारी रहेगा, क्योंकि देश का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर है।