क्वाड की 11वीं बैठक: मोटेगी बोले — स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक के लिए व्यावहारिक सहयोग और मजबूत होगा
सारांश
मुख्य बातें
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने 26 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की 11वीं बैठक में कहा कि यह बैठक दुनिया को एक 'स्पष्ट और मजबूत संदेश' देती है — क्वाड समूह एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए व्यावहारिक सहयोग को और प्रगाढ़ करेगा। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों की इस उच्चस्तरीय बैठक में समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, आर्थिक सुरक्षा और नई तकनीकों पर केंद्रित एजेंडे पर विस्तृत चर्चा हुई।
मोटेगी का संबोधन: व्यक्तिगत लगाव और रणनीतिक संकल्प
बैठक के शुरुआती भाषण में मोटेगी ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बैठक आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, 'सितंबर 2019 में पहली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में मैं शामिल हुआ था, इसलिए मुझे इस बैठक से खास लगाव है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह 11वीं बैठक दुनिया को यह संदेश देती है कि क्वाड एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करेगा।
FOIP को अपडेट करने की ज़रूरत: बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था
मोटेगी ने कहा कि फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) की अवधारणा को आए केवल दस वर्ष हुए हैं, लेकिन इस दौरान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं। उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची के हवाले से कहा कि FOIP को अपडेट करने का अर्थ है कि इंडो-पैसिफिक के देश अपनी क्षमता और मजबूती बढ़ाएं, ताकि वे अपने भविष्य के फैसले स्वयं ले सकें — जिसमें आर्थिक सुरक्षा भी शामिल है। मोटेगी ने बैठक में इस विषय पर खुलकर चर्चा और क्वाड सहयोग को और तेज करने की इच्छा जताई।
जयशंकर की प्राथमिकताएँ: सप्लाई चेन से लेकर समुद्री सुरक्षा तक
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक में कहा कि 18 महीनों से कम समय में यह तीसरी बार है जब क्वाड विदेश मंत्री एक मेज पर बैठे हैं — यह स्वयं में क्वाड की सक्रियता का प्रमाण है। उन्होंने रेखांकित किया कि चर्चा का मुख्य केंद्र इंडो-पैसिफिक रहेगा और मंत्रियों को सप्लाई चेन की मजबूती, कनेक्टिविटी में बाधाएं, उत्पादन व संसाधनों का केंद्रीकरण तथा जरूरी बुनियादी ढाँचे की कमी जैसे मुद्दों पर ध्यान देना होगा।
जयशंकर ने कहा कि इंडो-पैसिफिक की अपनी विशिष्ट चुनौतियाँ हैं — रणनीतिक भरोसा बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक विकल्पों को बढ़ावा देना और सहयोग की भावना को मजबूत करना। उनके अनुसार यह सब केवल भरोसेमंद और पारदर्शी साझेदारी से ही संभव है।
क्वाड की कार्यक्षेत्र और हालिया प्रगति
क्वाड में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका शामिल हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन, जरूरी खनिज, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास, आपदा राहत और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है। जयशंकर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में क्वाड अधिकारियों ने समुद्री सुरक्षा, नई तकनीकों, आर्थिक मजबूती और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में उथल-पुथल है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। क्वाड के चारों सदस्य देश आने वाले महीनों में साझा पहलों को और विस्तार देने पर सहमत बताए जा रहे हैं। यह बैठक इस बात का संकेत है कि क्वाड अब केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि एक सक्रिय और व्यावहारिक सहयोग तंत्र के रूप में विकसित हो रहा है।