मुरादाबाद में दोहरी मतदाता प्रविष्टि पर 14 लोगों पर मुकदमा, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि कराने वाले 14 व्यक्तियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 31 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने 6 जुलाई को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में इस कार्रवाई की जानकारी दी। यह कदम विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान सामने आई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच के दौरान पाया गया कि इन 14 व्यक्तियों के नाम पहले से किसी एक मतदाता सूची में दर्ज थे, फिर भी उन्होंने भ्रामक जानकारी देकर किसी अन्य मतदेय स्थल पर भी अपना नाम जुड़वा लिया। यह सीधे तौर पर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है।
गौरतलब है कि फॉर्म-6 भरते समय प्रत्येक आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार नाम दर्ज करा रहा है और उसका नाम किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में शामिल नहीं है। इस घोषणा का उल्लंघन करने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
कानूनी प्रावधान और दंड
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा 31 के अनुसार गलत जानकारी देकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना दंडनीय अपराध है, जिसमें कारावास और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। यह कानून मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया था और इसके तहत यह एक उल्लेखनीय कार्रवाई है।
जिला निर्वाचन अधिकारी की अपील
डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि किसी मतदाता का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज है, तो वे प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए एक स्थान से अपना नाम हटवा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम स्वेच्छा से उठाने पर किसी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।'
आम जनता पर असर
यह कार्रवाई उन मतदाताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है जो जानबूझकर या अनजाने में दो स्थानों पर नाम दर्ज करा चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दोहरी प्रविष्टि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करती है और मतदान के दिन फर्जी मतदान की संभावना बढ़ाती है। यह अभियान आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को त्रुटिमुक्त बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
क्या होगा आगे
दर्ज मुकदमों की सुनवाई सक्षम न्यायालय में होगी। जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान जारी रहेगा और यदि और मामले सामने आए तो उन पर भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।