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क्या चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष है? यूपी में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम काटने पर भाजपा नेताओं की राय

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क्या चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष है? यूपी में ड्राफ्ट मतदाता सूची से 2.89 करोड़ नाम काटने पर भाजपा नेताओं की राय

सारांश

उत्तर प्रदेश में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.89 करोड़ नामों को हटाने के निर्णय पर भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता की सराहना की है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लोगों से सूची में अपने नाम चेक करने की अपील की। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा गया है।

मुख्य बातें

2.89 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग का कार्य निष्पक्षता से किया गया है।
लोगों को अपने नाम चेक करने और सुधारने का अवसर दिया गया है।
विपक्ष पर भी आरोप लगाए गए हैं कि वे हारे हुए हैं।
बिहार सरकार के मंत्री ने भी चुनाव आयोग की सराहना की है।

नई दिल्ली, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के अंतर्गत जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में लगभग 2.89 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। भाजपा नेताओं ने इस प्रक्रिया की सराहना करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का कार्य पूर्णत: निष्पक्ष है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "ड्राफ्ट मतदाता सूची उपलब्ध है। सभी बूथ कार्यकर्ताओं को इसे ध्यान से पढ़कर, चुनाव आयोग की मदद करनी चाहिए ताकि सुचिता और पारदर्शिता के साथ मतदाता सूची तैयार की जा सके।"

प्रदेशवासियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा, "वह अपने नाम मतदाता सूची में अवश्य देखें। अगर कोई त्रुटि है तो उसे सुधारने का अभी भी अवसर है। ऐसे योग्य लोग जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें इसे शामिल कराना चाहिए।" उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, "अखिलेश यादव अपनी संभावित हार का सामना कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के गुंडाराज को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।"

भाजपा सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। लोगों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है, और लोग अपने-अपने केंद्रों पर नाम चेक कर रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से स्पष्ट होता है कि वोटर लिस्ट काफी समय से अपडेट नहीं हुई थी।

उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग का कार्य निष्पक्ष है। वैध मतदाताओं को नाम जोड़ने के लिए एक महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है। जो लोग आपत्ति या दावा दर्ज नहीं कराएंगे, उनके वोट मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे। योगेंद्र चंदोलिया ने यह भी बताया कि हटाए गए मतदाताओं में रोहिंग्या, मृतकों के नाम और शिफ्टेड लोगों के नाम शामिल हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची पर बिहार सरकार में मंत्री लखेंद्र कुमार पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से कार्य करता है और सही फैसले लेता है। वोटर लिस्ट में पारदर्शिता बहुत आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "बिहार में हाल के चुनावों में देखा गया कि 15-20 साल पहले मर चुके लोगों के नाम भी वोटर लिस्ट में पाए गए थे। पहले विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि 'वोट चोरी' हो रही है, लेकिन जनता की प्रतिक्रिया के बाद वो आरोप झूठे साबित हुए हैं। उत्तर प्रदेश या किसी भी अन्य राज्य में ऐसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए और जनता को सही जानकारी प्रदान करनी चाहिए।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम क्यों हटाए गए हैं?
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम हटाने का उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
लोग अपने नाम कैसे चेक कर सकते हैं?
लोग अपने नाम को चेक करने के लिए अपने स्थानीय मतदान केंद्र पर जा सकते हैं।
क्या यह प्रक्रिया पारदर्शी है?
भाजपा नेताओं का मानना है कि यह प्रक्रिया पूर्णत: पारदर्शी और निष्पक्ष है।
राष्ट्र प्रेस
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