नौगांव लोकसभा उपचुनाव: गौरव गोगोई बोले— भाजपा की डर की राजनीति के खिलाफ जनता का साहस होगा कसौटी पर
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने असम की नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को भाजपा की कथित 'डर और धमकी की राजनीति' के विरुद्ध जनसाहस की परीक्षा करार दिया है। 14 सितंबर 2026 को गोगोई ने कहा कि इस चुनाव में असली सवाल यह है कि भाजपा का भय-आधारित शासन जीतता है या नौगांव की जनता का लोकतांत्रिक साहस।
गोगोई का मुख्य बयान
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, 'मुख्य राजनीतिक मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच होगा। यह चुनाव इस बात की परीक्षा होगी कि क्या बीजेपी की डर और डराने-धमकाने की राजनीति जीतती है या फिर बीजेपी के खिलाफ लोगों का साहस दिखाई देता है।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमारा पूरा विश्वास है कि आज भाजपा जिस प्रकार से एक डर का माहौल बना रही है, उस डर के माहौल को नौगांव के लोग उखाड़ फेंकेंगे।'
गोगोई ने आगे जोड़ा कि आज नागरिक सरकार से अपने अधिकारों की माँग करते हैं, सम्मान की माँग करते हैं — और भय व धमकी की राजनीति को नकारते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा ने पहले ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जबकि कांग्रेस की ओर से नाम अभी तय नहीं हुआ।
सीट क्यों हुई खाली
नौगांव लोकसभा सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई है। गौरतलब है कि यह असम की राजनीतिक दृष्टि से अहम सीट रही है, और उपचुनाव का परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए रणनीतिक संकेत देगा।
भाजपा का उम्मीदवार तय, कांग्रेस अभी मौन
भाजपा ने देबाशीष शर्मा को नौगांव उपचुनाव में अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं, कांग्रेस ने अभी तक इस सीट पर अपने उम्मीदवार के नाम का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। इस पर गोगोई ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारे आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा की जानी चाहिए।' उनका यह बयान पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर प्रतीक्षा और दबाव दोनों का संकेत देता है।
मतदान और मतगणना की तारीख
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, नौगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और 9 अक्टूबर 2026 को वोटों की गिनती की जाएगी। इस उपचुनाव के नतीजे न केवल असम बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों दलों के लिए सांकेतिक महत्व रखते हैं।
आगे क्या होगा
कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही नौगांव में प्रचार अभियान पूरे जोर पर आने की उम्मीद है। गोगोई का यह आक्रामक बयान पार्टी की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है — भाजपा को 'डर की राजनीति' के कटघरे में खड़ा कर नागरिक अधिकारों के इर्द-गिर्द वोट माँगना। 6 अक्टूबर को होने वाला मतदान बताएगा कि असम की जनता इस आख्यान को कितना स्वीकार करती है।