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पाकिस्तान की 'रेड बुक' में मसूद अजहर पर ₹70 लाख इनाम, FATF बैठक से पहले दिखावटी कार्रवाई पर सवाल

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पाकिस्तान की 'रेड बुक' में मसूद अजहर पर ₹70 लाख इनाम, FATF बैठक से पहले दिखावटी कार्रवाई पर सवाल

सारांश

FATF की अक्टूबर बैठक से पहले पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया — लेकिन भारतीय खुफिया विश्लेषण कहता है वह सिंध के नवाबशाह में छिपा है। कागज़ी कार्रवाई और ज़मीनी सच्चाई के बीच यह खाई पाकिस्तान की 'दोहरी नीति' पर एक बार फिर उंगली उठाती है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की FIA ने नई 'रेड बुक' में मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित कर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए किया, जो 2021 में 50 लाख था।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के छह महीने के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार मसूद अजहर सिंध प्रांत के नवाबशाह में छिपा है।
26-11 मुंबई हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम सूची में; दो — मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान — की तस्वीरें और लश्कर-ए-तैयबा से संबंध की जानकारी हटाई गई।
पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड सूची 2021 के 1,330 से बढ़कर 1,804 हुई — करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि।
यह घटनाक्रम अक्टूबर 2026 में होने वाली FATF पूर्ण बैठक से ठीक पहले आया है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक जाँच और गिरफ्तारी के बिना इनाम घोषणा महज अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश है।

पाकिस्तान की संघीय जाँच एजेंसी (FIA) ने अपनी नई 'रेड बुक' में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित कर उसके सिर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए का इनाम रखा है — जो वर्ष 2021 के 50 लाख रुपए के इनाम से पाँच वर्ष बाद की बढ़ोतरी है। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब अक्टूबर में वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की पूर्ण बैठक होने वाली है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम वास्तविक कार्रवाई नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की पाकिस्तान की परिचित रणनीति है।

मसूद अजहर: कागज़ पर भगोड़ा, ज़मीन पर मौजूद?

पाकिस्तान वर्ष 2021 से यह दावा करता आया है कि मसूद अजहर उसके क्षेत्र में नहीं है और अफगानिस्तान भाग चुका है। परंतु भारतीय खुफिया एजेंसियों के पिछले छह महीनों के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक वह सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में सक्रिय रूप से छिपा हुआ है। ऐसे में महज इनाम की राशि बढ़ाने और उसे कागजों पर भगोड़ा दर्ज करने को लेकर पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

26/11 हमले से जुड़े आतंकियों की सूची में खामियाँ

FIA की नई रेड बुक में 26-11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम शामिल हैं — जिन्होंने हमलावरों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुँचाने, आर्थिक सहायता देने या अभियान के प्रबंधन में भूमिका निभाई थी। इनमें से 17 के साथ तस्वीर और भूमिका का विवरण दिया गया है। हालाँकि दो मामलों — मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान — में अहम जानकारियाँ हटा दी गई हैं। वर्ष 2021 की FIA सूची में दोनों की तस्वीर, लश्कर-ए-तैयबा से संबंध और हमले में उनकी भूमिका का पूरा विवरण दर्ज था — नई सूची में यह सब गायब है।

आर्थिक सहायता देने वाले आतंकियों का ब्यौरा

रेड बुक में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 11 आतंकियों के नाम हैं, जिन पर अल-हुसैनी और अल-फौज नौकाओं के ज़रिए हमलावरों की समुद्री यात्रा में सहायता का आरोप है। सूची में उन छह आतंकियों का भी उल्लेख है जिन्होंने 26-11 हमले के लिए आर्थिक मदद दी थी। इनमें मुहम्मद इफ्तिखार अली पर वीओआईपी संपर्क तैयार करने में 70 हज़ार पाकिस्तानी रुपए खर्च करने का आरोप है। मोहम्मद जिया ने 80 हज़ार, मोहम्मद अब्बास नासिर ने 2 लाख 53 हज़ार, जावेद इकबाल ने 1 लाख 86 हज़ार 430 और मुख्तार अहमद ने 2 लाख 98 हज़ार 47 रुपए देने का आरोप है। अहमद सईद पर अभियान के लिए 21 लाख रुपए देने का आरोप है। FIA के अनुसार ये सभी 17 आतंकी पिछले 18 वर्षों से फरार हैं — हालाँकि भारतीय खुफिया सूत्रों का दावा है कि ये अभी भी पाकिस्तान में मौजूद हैं।

मोस्ट वांटेड सूची में 35 प्रतिशत की वृद्धि

पाकिस्तान की रेड बुक में शामिल मोस्ट वांटेड आतंकियों की कुल संख्या वर्ष 2021 में 1,330 थी, जो अब बढ़कर 1,804 हो गई है — यानी पाँच वर्षों में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी। विशेषज्ञ इस वृद्धि को उपलब्धि नहीं, बल्कि विफलता का प्रमाण मानते हैं: सूची लंबी होती जा रही है, गिरफ्तारियाँ नहीं।

रक्षा विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आतंकियों को मोस्ट वांटेड सूची में डालना तभी सार्थक है जब उनके विरुद्ध वास्तविक जाँच, गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई हो। केवल इनाम घोषित कर नाम सूची में जोड़ने से पाकिस्तान की आतंकवाद-विरोधी प्रतिबद्धता प्रमाणित नहीं होती। गौरतलब है कि यह तीसरी बार नहीं है जब पाकिस्तान ने FATF समीक्षा से ठीक पहले इस तरह के कदम उठाए हों — और हर बार ज़मीनी परिणाम सवालों के घेरे में रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अक्टूबर की FATF बैठक में इन कदमों को कितनी गंभीरता से आँका जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पाकिस्तान के लिए कागज़ी अनुपालन और असली संरक्षण साथ-साथ चलाना आसान रहेगा।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान की 'रेड बुक' में मसूद अजहर पर कितना इनाम रखा गया है?
पाकिस्तान की FIA ने नई 'रेड बुक' में मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया है, जो वर्ष 2021 में 50 लाख रुपए था। इसके साथ ही उसे औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित किया गया है।
क्या मसूद अजहर वाकई पाकिस्तान से बाहर है?
पाकिस्तान का दावा है कि मसूद अजहर 2021 से अफगानिस्तान में है। हालाँकि भारतीय खुफिया एजेंसियों के पिछले छह महीनों के तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक वह सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में सक्रिय रूप से छिपा है।
FATF बैठक से इस घटनाक्रम का क्या संबंध है?
अक्टूबर 2026 में FATF की पूर्ण बैठक निर्धारित है, जिसमें आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान की समीक्षा होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बैठक से ठीक पहले यह सूची जारी करना अंतरराष्ट्रीय निगरानी और संभावित कार्रवाई से बचने की परिचित रणनीति है।
26-11 मुंबई हमले के संदर्भ में नई रेड बुक में क्या खामियाँ पाई गई हैं?
नई रेड बुक में 26-11 हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम हैं, लेकिन दो आरोपियों — मुहम्मद खान और अब्दुल रहमान — की तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से उनके संबंध और हमले में उनकी भूमिका का विवरण हटा दिया गया है, जो 2021 की सूची में मौजूद था।
पाकिस्तान की मोस्ट वांटेड सूची में कितनी वृद्धि हुई है?
पाकिस्तान की रेड बुक में मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या 2021 के 1,330 से बढ़कर अब 1,804 हो गई है, यानी पाँच वर्षों में करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि। रक्षा विशेषज्ञ इसे उपलब्धि नहीं, बल्कि वास्तविक कार्रवाई की अनुपस्थिति का संकेत मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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