आसिम मुनीर की नीतियाँ पाकिस्तान को भारी पड़ रहीं, यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में आत्मचिंतन की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की आक्रामक नीतियाँ और बयानबाज़ी देश को भारी पड़ रही हैं — यह निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण पत्रिका यूरेशिया रिव्यू में 9 जून 2026 को प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट में मुनीर को सलाह दी गई है कि वे बाहरी शक्तियों पर दोषारोपण की बजाय अपनी नीतियों के वास्तविक प्रभाव का गंभीरता से मूल्यांकन करें।
रिपोर्ट के मुख्य तर्क
यूरेशिया रिव्यू में प्रकाशित इस लेख के लेखक सेवानिवृत्त भारतीय सेना अधिकारी निलेश कुंवर हैं। उनका दावा है कि मुनीर ने 2024 के आम चुनावों को प्रभावित कर अपनी राजनीतिक और सैन्य स्थिति को और मज़बूत किया। कुंवर के अनुसार, पाकिस्तान के 27वें संवैधानिक संशोधन के बाद फील्ड मार्शल मुनीर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) के रूप में देश की सशस्त्र सेनाओं के वास्तविक सर्वोच्च कमांडर बन गए हैं।
कुंवर ने लिखा, 'इस संशोधन के तहत सीडीएफ पद को व्यापक अधिकार दिए गए हैं और उन्हें आजीवन कानूनी कार्रवाई से संरक्षण भी प्राप्त है। ये लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए असामान्य सी बात है। इससे जवाबदेही के बिना अत्यधिक शक्तियाँ एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रित हो जाती हैं।'
अफगानिस्तान नीति पर सवाल
रिपोर्ट में अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते संबंधों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुंवर का तर्क है कि सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले और इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
उन्होंने लिखा, 'यदि पाकिस्तान का यह दावा सही भी मान लिया जाए कि अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लड़ाकों को शरण मिल रही है, तब भी अफगान क्षेत्र में कथित ठिकानों पर हवाई हमलों से सैन्य स्तर पर बहुत सीमित परिणाम ही हासिल हो सकते थे।' कुंवर के अनुसार, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होने के नाते मुनीर इस सीमा से भलीभाँति परिचित रहे होंगे।
आंतरिक सुरक्षा की बिगड़ती तस्वीर
रिपोर्ट में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ पीस स्टडीज (PIPS) के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि 2025 में देश में हुई कुल आतंकवादी घटनाओं में से 71 प्रतिशत अकेले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में दर्ज की गईं। इसके साथ ही बलूचिस्तान में जारी अशांति को भी प्रमुख आंतरिक सुरक्षा चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया है।
कुंवर ने यह भी तर्क दिया कि अफगान क्षेत्र में हवाई हमलों से अफगानिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच नज़दीकियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे डूरंड रेखा के आसपास पहले से मौजूद सुरक्षा चुनौतियाँ और जटिल हो सकती हैं।
बलूचिस्तान और पीओजेके पर चिंता
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा नीतियों के कारण बलूचिस्तान में स्थानीय असंतोष बढ़ा है। साथ ही पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है।
विशेषज्ञ की सलाह: आत्मचिंतन ज़रूरी
लेखक कुंवर ने अपने विश्लेषण का समापन करते हुए लिखा, 'आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए बाहरी शक्तियों को ज़िम्मेदार ठहराने के बजाय पाकिस्तान के नेतृत्व को अपनी नीतियों की प्रभावशीलता पर विचार करना चाहिए।' उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता को लंबे समय तक भ्रमित नहीं रखा जा सकता — और सुझाया कि मुनीर इस पर विचार करना चाहें। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा — तीनों मोर्चों पर एक साथ दबाव झेल रहा है।