आसिम मुनीर की नीतियों से पाकिस्तान बहुमोर्चीय संकट में, सैन्य नेतृत्व पर गंभीर सवाल: रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नीतियाँ देश को घरेलू और वैश्विक — दोनों मोर्चों पर संकट की ओर धकेल रही हैं। 'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तमाम कूटनीतिक प्रयासों और प्रचार के बावजूद पाकिस्तान को कोई ठोस कूटनीतिक सफलता नहीं मिली है और मुनीर की नेतृत्व क्षमता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आर्थिक और ऊर्जा संकट की गहरी मार
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई दर 300 प्रतिशत तक पहुँचने का दावा किया गया है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र लगभग ठप होने की कगार पर बताया जा रहा है। ये आँकड़े रिपोर्ट के हैं और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ कठिन वित्तीय शर्तों पर बातचीत कर रहा है और आम नागरिक बढ़ती महँगाई की चपेट में हैं।
मध्य पूर्व में कूटनीतिक भूमिका 'केवल संदेशवाहक' तक सीमित
रिपोर्ट में कहा गया है, 'फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मध्य पूर्व में प्रभाव बढ़ाने और अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए कई महीनों तक तथाकथित कूटनीतिक प्रयास किए, लेकिन पाकिस्तान की भूमिका केवल संदेशवाहक तक सीमित रही। इस भूमिका का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रचार के लिए किया गया।'
ईरान-अमेरिका मध्यस्थता के मुद्दे पर भी पाकिस्तान की भूमिका बेहद सीमित रही, जिससे शांति वार्ता में उसकी प्रासंगिकता कमज़ोर पड़ती दिखी।
सेना पर बहुमोर्चीय दबाव, आतंकी संगठनों की धमकियाँ भी
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना इस समय कई मोर्चों पर दबाव झेल रही है। बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा, कट्टरपंथी तत्वों की बढ़ती सक्रियता और पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों की मौजूदगी सेना के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन कथित तौर पर आसिम मुनीर को धमकियाँ दे रहे हैं, यदि पाकिस्तान इज़रायल के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
पहलगाम हमला और भारत-पाक सैन्य टकराव का संदर्भ
रिपोर्ट में पिछले वर्ष हुए पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया गया है, जिसके लिए पाकिस्तान समर्थित संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट को जिम्मेदार बताया गया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच 88 घंटे तक चले सैन्य टकराव का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि इस संघर्ष में पाकिस्तान की सैन्य प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा।
गौरतलब है कि यह पाकिस्तान के लिए किसी एक घटना का नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक विफलताओं की कड़ी का हिस्सा बताया जा रहा है।
मुशर्रफ-शैली की रणनीति की ओर मुड़ सकते हैं मुनीर
रिपोर्ट में कहा गया है, 'अब मुनीर फिर से घरेलू और वैश्विक — दोनों मोर्चों पर पॉलीक्राइसिस के कगार पर खड़े दिख रहे हैं, जिससे पाकिस्तान की आर्मी में मुनीर की लीडरशिप पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, साथ ही मध्यस्थता का ड्रामा भी कूटनीति के बजाय सैन्य प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा कर खत्म हुआ।'
विश्लेषकों के अनुसार, बढ़ती चुनौतियों के बीच आसिम मुनीर पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की तरह सीमित स्तर के तनाव और प्रचार-आधारित रणनीति अपना सकते हैं — ताकि घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी जा सके।