पाकिस्तान में सेना का बढ़ता प्रभाव: असिम मुनीर की कूटनीति और लोकतंत्र पर खतरे

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पाकिस्तान में सेना का बढ़ता प्रभाव: असिम मुनीर की कूटनीति और लोकतंत्र पर खतरे

सारांश

पाकिस्तान में सेना का प्रभाव नागरिक सरकार पर बढ़ रहा है। असिम मुनीर की भूमिका से स्पष्ट होता है कि रावलपिंडी का नियंत्रण विदेश नीति पर गहरा हो रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो रहा है। क्या यह पाकिस्तान के भविष्य की दिशा को बदल देगा?

Key Takeaways

  • पाकिस्तान में सेना का बढ़ता प्रभाव
  • असिम मुनीर की कूटनीतिक भूमिका
  • रावलपिंडी का विदेश नीति पर नियंत्रण
  • लोकतांत्रिक व्यवस्था पर खतरा
  • संविधानिक संशोधन के प्रभाव

नई दिल्ली, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में एक बार फिर से नागरिक सरकार पर सेना का प्रभाव बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर की महत्वपूर्ण भूमिका ने यह स्पष्ट किया है कि विदेश नीति पर रावलपिंडी का नियंत्रण मजबूत हो रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

ब्रिटिश समाचार पत्र द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच एक अप्रत्याशित मध्यस्थ के रूप में उभरने की कोशिश की है, जिसमें असिम मुनीर को मुख्य व्यक्ति माना गया है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि मुनीर उन चुनिंदा व्यक्तियों में से हैं जो अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क स्थापित करने में सक्षम हैं और दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

इस रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इन वार्ताओं का संचालन इस्लामाबाद (संसद का केंद्र) के बजाय रावलपिंडी (सेना मुख्यालय) से किया जा रहा है, जो सेना के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने कहा कि इस प्रक्रिया में सेना प्रमुख मुख्य संचालक हैं और उनके बिना ये बातचीत संभव नहीं थी। उन्होंने कहा, “विदेश मंत्रालय केवल एक जूनियर पार्टनर है और सरकार के मंत्री तो महज सहायक की भूमिका में हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, 18 जून 2025 को असिम मुनीर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी, जो अपने आप में एक असामान्य घटना थी क्योंकि वह किसी राजनीतिक पद पर नहीं थे। बताया गया है कि अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बजाय मुनीर के साथ अधिक संवाद किया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जब इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बैठक हुई, तब मुनीर तीसरे पक्ष के रूप में उपस्थित थे और वार्ता को दिशा दे रहे थे।

पाकिस्तान में नवंबर 2025 में पारित 27वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से सेना की शक्ति और बढ़ गई है। इस संशोधन के तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का पद बनाया गया, जो सेना प्रमुख के पास रहेगा और उसे नौसेना एवं वायुसेना पर भी नियंत्रण देगा। इसके साथ ही, पांच सितारा अधिकारियों को आजीवन कानूनी छूट भी प्रदान की गई है।

इससे नागरिक शासन की कमजोरी और स्पष्ट हो गई है और भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष के दमन जैसी चिंताएं बढ़ी हैं।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सार्वजनिक रूप से मुनीर की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में “महत्वपूर्ण” बताया है। हाल ही में मुनीर तेहरान भी गए, जहां उन्होंने वार्ता के अगले दौर को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मध्यस्थता सफल होती है, तो मुनीर का प्रभाव और बढ़ेगा और नागरिक सरकार कमजोर हो जाएगी। वहीं, विफल होने की स्थिति में शहबाज शरीफ सरकार को आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में सेना का यह बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरा है और इससे चुनी हुई सरकार की स्वायत्तता लगातार सीमित होती जा रही है।

Point of View

यह स्पष्ट है कि सेना की भूमिका बढ़ती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। असिम मुनीर की कूटनीति इस बात का संकेत है कि रावलपिंडी का नियंत्रण नागरिक सरकार पर बढ़ रहा है।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

असिम मुनीर की भूमिका क्या है?
असिम मुनीर पाकिस्तान के सेना प्रमुख हैं और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पाकिस्तान में सेना का प्रभाव बढ़ने का क्या कारण है?
पाकिस्तान में सेना का प्रभाव बढ़ने का कारण राजनीतिक अस्थिरता और सेना की कूटनीतिक गतिविधियाँ हैं।
क्या यह लोकतंत्र के लिए खतरा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सेना का बढ़ता प्रभाव लोकतांत्रिक संतुलन के लिए खतरा है।
नवीनतम संवैधानिक संशोधन का क्या प्रभाव है?
नवीनतम संवैधानिक संशोधन से सेना की शक्ति में वृद्धि हुई है, जो नागरिक शासन को कमजोर कर सकता है।
क्या असिम मुनीर की कूटनीति सफल होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि असिम मुनीर की कूटनीति सफल होती है, तो उनकी शक्ति बढ़ेगी।
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