15 जुलाई 2026
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क्या पाकिस्तान में असीम मुनीर का सीडीएफ बनना संस्थागत गिरावट का प्रतीक है?

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क्या पाकिस्तान में असीम मुनीर का सीडीएफ बनना संस्थागत गिरावट का प्रतीक है?

सारांश

शफी बुरफत ने पाकिस्तान के असीम मुनीर की कड़ी आलोचना की है, यह कहते हुए कि उनका पद एक संस्थागत गिरावट का संकेत है। यह बयान पाकिस्तान की सैन्य शक्ति और राजनीति के प्रति गंभीर चिंताओं को उजागर करता है।

मुख्य बातें

असीम मुनीर की सीडीएफ के रूप में नियुक्ति एक संस्थागत गिरावट का प्रतीक है।
बुरफत का कहना है कि सैन्य शक्ति पेशेवर कौशल के बजाय दबाव पर निर्भर है।
धर्म पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास पर देशों की नींव होती है।
पाकिस्तान की सैन्य तकनीक विदेशी समर्थन पर निर्भर है।
राजनीतिक स्थिति गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है।

बर्लिन, 23 दिसंबर (IANS) जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने मंगलवार को पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और डिफेंस फोर्सेज के प्रमुख असीम मुनीर की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि वह एक ऐसे देश की संस्थागत गिरावट का प्रतीक हैं, जहाँ सुरक्षा प्रतिष्ठान ने अपना कब्जा जमा लिया है।

शफी बुरफत ने कहा कि असीम मुनीर की सीडीएफ के रूप में प्रमोशन पेशेवर कौशल नहीं, बल्कि बेतरतीब सैन्य शक्ति का प्रमाण है। उन्होंने न तो कोई अंतर्राष्ट्रीय युद्ध लड़ा है और न ही जीता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शफी बुरफत ने लिखा, “कौशल के बजाय दबाव से प्राप्त ओहदे अक्सर मनोवैज्ञानिक असुरक्षा को दर्शाते हैं। मुनीर का उच्च सैन्य रैंक और धार्मिक प्रतीकों के प्रति जुड़ाव आत्मविश्वास नहीं, बल्कि शक्ति के माध्यम से खुद को साबित करने की एक नाजुक मानसिकता को दर्शाता है। इतिहास में ऐसे लोग शायद ही कभी देश निर्माण में सहायक होते हैं।”

असीम मुनीर ने यह भी कहा कि विभिन्न धार्मिक रिवाजों के कारण हिंदू और मुसलमान अलग-अलग देश हैं। बुरफत ने इस बयान को राजनीति विज्ञान में एक बुनियादी गलतफहमी के रूप में उजागर किया।

उन्होंने कहा, “किसी देश की नींव धर्म पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास, भूगोल, सामूहिक स्मृति और राजनीतिक भविष्य पर होती है। इस तरह के बयानों ने पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व में मौजूद बौद्धिक शून्यता को उजागर किया है।”

हाल ही में असीम मुनीर ने दावा किया कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच जो झड़प हुई, उसमें अल्लाह की मदद महसूस हुई। बुरफत ने कहा कि असल में पाकिस्तान चीनी सैन्य तकनीकों, इंटेलिजेंस, ड्रोन क्षमताओं और अमेरिकी वित्तीय मदद पर अत्यधिक निर्भर था।

उन्होंने कहा, “भू-राजनीतिक समर्थन को ईश्वरीय हस्तक्षेप बताना आस्था नहीं, बल्कि सोची-समझी गलत जानकारी है। वैश्विक पारदर्शिता के इस युग में ऐसी बातें जनता की समझ का अपमान हैं।”

जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (जेएसएमएम) के अध्यक्ष शफी बुरफत ने कहा, “बलूचिस्तान में खुला विरोध जारी है। सैन्य ऑपरेशन के प्रति पश्तूनों का गुस्सा अच्छी तरह से डॉक्यूमेंटेड है। पंजाब में भी, प्रदर्शनकारियों ने कोर कमांडरों के घरों पर हमला किया है, जो सिविल-मिलिट्री के बीच की दरार का संकेत देता है।”

बुरफत ने वैश्विक समुदाय से पाकिस्तान को गंभीरता से देखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद, अस्थिरता और वैश्विक ताकतों के लिए किराए के बिचौलिए के तौर पर काम करने के अलावा, पाकिस्तान के पास इस क्षेत्र या अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली को देने के लिए कुछ नहीं है। पाकिस्तान की भूमिका एक जिम्मेदार देश के बजाय हिंसा के सब कॉन्ट्रैक्टर की रही है।

सिंधी नेता ने कहा, “असीम मुनीर के बयान कोई रणनीतिक सोच नहीं हैं। ये एक बिगड़ी हुई सोच के लक्षण हैं। उनकी बातों में धार्मिक नारों और सेना की बहादुरी से छिपा हुआ दिमागी खालीपन स्पष्ट है। ऐसी बातें न तो देश बनाती हैं और न ही ऐतिहासिक रास्ते बदलती हैं।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असीम मुनीर की नियुक्ति पर शफी बुरफत का क्या कहना है?
बुरफत ने कहा कि मुनीर की नियुक्ति एक संस्थागत गिरावट का प्रतीक है, जो पेशेवर कौशल के बजाय दबाव के माध्यम से हुई है।
क्या मुनीर का बयान हिंदू-मुस्लिम विभाजन को दर्शाता है?
बुरफत ने इसे राजनीति विज्ञान में एक गलतफहमी के रूप में बताया है, जो साझा इतिहास और भूगोल की अनदेखी करता है।
पाकिस्तान की सैन्य शक्ति पर बुरफत की क्या राय है?
बुरफत मानते हैं कि पाकिस्तान की सैन्य शक्ति विदेशी समर्थन और तकनीकों पर निर्भर है, जो उसकी स्थिरता के लिए खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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