8 जुलाई 2026
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पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान इस्लामाबाद में दफन, जनाजे में सलाहुद्दीन समेत कई खूंखार आतंकी मौजूद

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पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान इस्लामाबाद में दफन, जनाजे में सलाहुद्दीन समेत कई खूंखार आतंकी मौजूद

सारांश

पुलवामा के 40 से अधिक शहीदों की साजिश रचने वाला हमजा बुरहान अब इस्लामाबाद की मिट्टी में है — लेकिन उसके जनाजे में सलाहुद्दीन जैसे खूंखार आतंकियों और कथित आईएसआई अधिकारियों की मौजूदगी यह सवाल उठाती है कि पाकिस्तान की धरती पर आतंकी नेटवर्क कितनी खुलेआम सक्रिय हैं।

मुख्य बातें

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान (उर्फ अर्जुमंद गुलजार डार , कोडनेम 'डॉक्टर' ) को 23 मई 2026 को इस्लामाबाद में दफनाया गया।
उसे पीओके के मुजफ्फराबाद में एक कॉलेज परिसर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने गोली मारी; सिर में कई गोलियाँ लगीं।
जनाजे में हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन , अल-बद्र सरगना बख्त जमीन खान और कथित आईएसआई अधिकारी शामिल हुए।
फरवरी 2019 के पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे; भारत के गृह मंत्रालय ने बुरहान को 2022 में आतंकवादी घोषित किया था।
यह घटना ऑपरेशन सिंदूर और 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में हुई।

पुलवामा हमले का मुख्य साजिशकर्ता हमजा बुरहान — जिसे अर्जुमंद गुलजार डार और कोडनेम 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता था — को 23 मई 2026 को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उसके जनाजे में हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, अल-बद्र सरगना बख्त जमीन खान समेत कई प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के कैडर और कथित तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े अधिकारी भी शामिल हुए।

कैसे हुई हत्या

स्थानीय पुलिस के मुताबिक, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मुजफ्फराबाद के एक निजी कॉलेज परिसर से बाहर निकलते समय गुरुवार सुबह अज्ञात हमलावरों ने हमजा बुरहान पर करीब से गोलीबारी की, जिसमें उसके सिर में कई गोलियाँ लगीं। हत्या के अगले दिन उसे इस्लामाबाद में दफनाया गया। वह हाल के वर्षों में पीओके में गुप्त रूप से रह रहा था और उस कॉलेज में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत था।

जनाजे में हथियारबंद आतंकियों की मौजूदगी

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में जनाजे के दौरान एके-47 और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस लोग दिखाई दिए। रिपोर्टों के अनुसार, कई प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के हथियारबंद कैडर भी समारोह में मौजूद थे। यह दृश्य उस पैटर्न की याद दिलाता है जो मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकियों के जनाजों में देखा गया था, जहाँ ताबूतों को पाकिस्तानी झंडे में लपेटकर सैन्य सम्मान दिया गया था।

हमजा बुरहान: पुलवामा से पीओके तक

हमजा बुरहान को फरवरी 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता था, जिसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। भारत के गृह मंत्रालय ने उसे 2022 में जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था। अधिकारियों के अनुसार, वह युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और पाकिस्तान संचालित अल-बद्र संगठन के लिए फंडिंग जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों की पहचान कर हत्या की, जिसमें 26 लोगों की जान गई। इस हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। हमजा बुरहान की हत्या इस व्यापक संदर्भ में हुई है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। हमजा बुरहान के जनाजे में आतंकी नेताओं और कथित खुफिया अधिकारियों की उपस्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि पाकिस्तान की धरती पर आतंकी नेटवर्क किस हद तक सक्रिय हैं।

आगे क्या

हमजा बुरहान की हत्या के पीछे किसने हाथ है, इसका अभी तक कोई दावा सामने नहीं आया है। पीओके पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की है, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, इस हत्या के बाद पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के भीतर हलचल बढ़ गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हमजा बुरहान कौन था और पुलवामा से उसका क्या संबंध था?
हमजा बुरहान — जिसे अर्जुमंद गुलजार डार और कोडनेम 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता था — को फरवरी 2019 के पुलवामा आत्मघाती हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। भारत के गृह मंत्रालय ने उसे 2022 में आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया था।
हमजा बुरहान की हत्या कैसे और कहाँ हुई?
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, पीओके के मुजफ्फराबाद में एक निजी कॉलेज परिसर से बाहर निकलते समय गुरुवार सुबह अज्ञात हमलावरों ने उस पर करीब से गोलीबारी की, जिसमें उसके सिर में कई गोलियाँ लगीं। अभी तक किसी संगठन ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है।
हमजा बुरहान के जनाजे में कौन-कौन शामिल हुए?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, जनाजे में हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन, अल-बद्र सरगना बख्त जमीन खान, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के हथियारबंद कैडर और कथित तौर पर आईएसआई से जुड़े अधिकारी मौजूद थे।
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले से इस घटना का क्या संबंध है?
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या की थी, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उस दौरान मारे गए एलईटी और जेईएम आतंकियों के ताबूतों को पाकिस्तानी झंडे में लपेटकर सैन्य सम्मान दिया गया था — हमजा बुरहान का जनाजा उसी पैटर्न का विस्तार माना जा रहा है।
हमजा बुरहान पीओके में क्या कर रहा था?
रिपोर्टों के अनुसार, हमजा बुरहान हाल के वर्षों में पीओके में गुप्त रूप से रह रहा था और मुजफ्फराबाद के एक निजी कॉलेज में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वह शिक्षक की आड़ में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और अल-बद्र के लिए फंडिंग जुटाने का काम कर रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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