पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड हमजा बुरहान पीओके के मुजफ्फराबाद में ढेर
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 21 मई 2026 को मुजफ्फराबाद में अज्ञात बंदूकधारियों ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या कर दी। ताबड़तोड़ गोलियों से बुरी तरह घायल इस आतंकी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क पर पहले से ही भारी दबाव बना हुआ है।
कौन था हमजा बुरहान
हमजा बुरहान का असली नाम अरजुमंद गुलजार डार था, जिसे 'डॉक्टर' के नाम से भी जाना जाता था। वह पुलवामा के रत्नीपोरा, खारबतपोरा क्षेत्र का निवासी था और जन्म के समय उसकी उम्र 23 वर्ष बताई गई थी। 2017 में वह उच्च शिक्षा का बहाना बनाकर पाकिस्तान चला गया, जहाँ वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हो गया और शीघ्र ही उसका कमांडर बन गया।
2022 में भारत सरकार ने उसे गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित किया था। सरकारी अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया था कि वह यूएपीए के अंतर्गत प्रतिबंधित संगठन अल-बद्र का सहयोगी सदस्य है।
दक्षिण कश्मीर में फैला था आतंकी नेटवर्क
अल-बद्र में शामिल होने के बाद हमजा बुरहान कश्मीर लौटा और दक्षिण कश्मीर में अपना नेटवर्क फैलाया। उस पर पुलवामा से शोपियां तक युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने और उन्हें आतंकी संगठनों में भर्ती कराने का आरोप था। अधिकारियों के अनुसार उसका नेटवर्क मुख्य रूप से दक्षिण कश्मीर के ज़िलों में सक्रिय था और वह पाकिस्तान-आधारित आतंकी ढाँचे की एक महत्वपूर्ण कड़ी था।
पुलवामा हमला: एक संक्षिप्त पृष्ठभूमि
14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के लेथपोरा क्षेत्र में एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदे वाहन से केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले की बस को टक्कर मारी थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। हमलावर की पहचान आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी और इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हवाई हमला किया था। हमजा बुरहान इस हमले के प्रमुख मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित था।
पाकिस्तान में आतंकियों पर बढ़ते हमले
रिपोर्टों के अनुसार बीते दो वर्षों में पाकिस्तान और पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों द्वारा आतंकी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान सरकार ने इन घटनाओं पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और जाँच के मामले में भी खामोशी बरकरार रखी है।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है। आलोचकों का कहना है कि शीर्ष आतंकी नेताओं को इस तरह निशाना बनाए जाने से इन संगठनों को दोबारा संगठित होने में गंभीर कठिनाइयाँ आ रही हैं और नई भर्तियों की संख्या भी घटी है।
आतंकी नेटवर्क पर असर
हमजा बुरहान की मौत को पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाओं ने इन संगठनों के मनोबल को गहरी चोट पहुँचाई है। आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन सुरक्षा एजेंसियाँ करती रहेंगी।