10 अक्टूबर 2026
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नगांव उपचुनाव में BJP की जीत के बाद CM हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस पर तीखा हमला

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नगांव उपचुनाव में BJP की जीत के बाद CM हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस पर तीखा हमला

सारांश

नगांव उपचुनाव में BJP की जीत के बाद CM हिमंत बिस्वा सरमा ने विपक्ष को दोहरे मोर्चे पर घेरा — एक तरफ चुनाव आयोग पर हमलों को 'हारने की आदत' बताया, दूसरी तरफ कथित बांग्लादेशी घुसपैठ को मतदाता सूची की शुचिता से जोड़ते हुए ECI की जवाबदेही का सवाल उठाया।

मुख्य बातें

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 9 अक्टूबर 2026 को नगांव उपचुनाव में BJP की जीत के बाद कांग्रेस व विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
सरमा ने कहा कि विपक्ष हर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग (ECI) को निशाना बनाता है, जनता के बीच काम नहीं करता।
उन्होंने दावा किया कि गुवाहाटी में 100 कथित बांग्लादेशियों को पकड़ा गया और ऐसे लोगों के मतदाता सूची में शामिल होने की आशंका जताई।
नगांव सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी संख्या है और पिछले दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस यहाँ जीती थी।
सरमा ने विपक्षी नेताओं को दिल्ली में प्रदर्शन की बजाय असम आकर ज़मीनी हालात देखने की चुनौती दी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 9 अक्टूबर 2026 को नगांव लोकसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के बाद कांग्रेस समेत समूचे विपक्ष पर जोरदार हमला बोला। गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल जनता के बीच जाने की बजाय चुनाव आयोग (ECI) को निशाना बनाने में ज़्यादा रुचि रखते हैं।

मुख्य आरोप और बयान

सरमा ने कहा कि जब भी BJP कोई चुनाव जीतती है, विपक्ष सबसे पहले चुनाव आयोग पर सवाल उठाना शुरू कर देता है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे शोर-शराबे की बजाय ज़मीनी स्तर पर काम करें और लोगों की समस्याओं का समाधान ढूँढें। उनके अनुसार, चुनाव परिणाम को चुनौती देना और संस्थाओं पर दोष मढ़ना विपक्ष की 'आदत' बन चुकी है।

कथित अवैध घुसपैठ का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि 9 अक्टूबर को गुवाहाटी में करीब 100 बांग्लादेशियों को पकड़ा गया। उन्होंने कहा, 'यदि किसी कारण से वे पुलिस की पकड़ में नहीं आते, तो छह महीने बाद उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं।' सरमा ने यह भी दावा किया कि पिछले एक वर्ष में असम से कई कथित अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जा चुका है, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकारी ऐसे मामलों का केवल एक हिस्सा ही पकड़ पाते हैं।

चुनाव आयोग की जवाबदेही पर सवाल

सरमा ने चुनाव आयोग की भूमिका पर एक अहम तर्क रखा। उनके अनुसार, ECI की ज़िम्मेदारी केवल योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ने तक सीमित नहीं है — कानून के तहत अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना भी उसी का दायित्व है। उन्होंने कहा, 'यदि नाम जोड़ना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, तो नाम हटाना भी उसकी जिम्मेदारी है।' भारतीय चुनाव कानून के अनुसार, मतदाता पंजीकरण प्राधिकरणों की ज़िम्मेदारी है कि मतदाता सूची नागरिकता सहित सभी कानूनी पात्रता मानकों के अनुरूप हो।

दिल्ली प्रदर्शनों पर निशाना

मुख्यमंत्री ने विपक्षी नेताओं की उस रणनीति की भी आलोचना की, जिसके तहत वे लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रदर्शन करा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे प्रदर्शनों का मकसद अधिकारियों पर दबाव बनाना है। सरमा ने विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया कि वे पहले असम आएँ और यहाँ के लोगों की 'दर्द और पीड़ा' को समझें। उन्होंने कहा, 'दिल्ली में अपनी ताकत दिखाने से पहले असम आइए और यहाँ के लोगों का दर्द देखिए। तब आपको देश की वास्तविक स्थिति समझ में आएगी।'

नगांव उपचुनाव का महत्त्व

नगांव लोकसभा सीट इसलिए चर्चा में है क्योंकि इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी संख्या है और पिछले दो लोकसभा चुनावों में यहाँ कांग्रेस को जीत मिली थी। ऐसे में BJP की यह जीत राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मतदाता सूचियों, कथित अवैध घुसपैठ और ECI की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विवाद गहराया हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संस्थागत तटस्थता की कसौटी पर खरा उतरना मुश्किल बना देता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि ECI की जवाबदेही की माँग और घुसपैठ के दावे — दोनों को एक साथ उठाना — चुनाव आयोग पर ही एक नया राजनीतिक दबाव है, भले ही भाषा उसके 'बचाव' की लगे।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नगांव उपचुनाव में BJP की जीत क्यों महत्त्वपूर्ण है?
नगांव लोकसभा सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की बड़ी संख्या है और पिछले दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस यहाँ जीती थी। ऐसे में BJP की यह जीत असम में पार्टी की बदलती राजनीतिक पकड़ का संकेत मानी जा रही है।
CM सरमा ने चुनाव आयोग के बारे में क्या कहा?
सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल योग्य मतदाताओं के नाम जोड़ना नहीं, बल्कि कानून के तहत अयोग्य व्यक्तियों के नाम हटाना भी है। उन्होंने कहा कि नाम जोड़ना और हटाना — दोनों ECI के दायित्व हैं।
सरमा ने कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में क्या दावा किया?
उन्होंने दावा किया कि 9 अक्टूबर को गुवाहाटी में करीब 100 कथित बांग्लादेशियों को पकड़ा गया। उन्होंने यह भी कहा कि जो पकड़ में नहीं आते, वे छह महीने बाद मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं, हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि अधिकारी ऐसे मामलों का केवल एक हिस्सा ही पकड़ पाते हैं।
विपक्ष के दिल्ली प्रदर्शनों पर सरमा का क्या रुख है?
सरमा ने विपक्षी नेताओं की उस रणनीति की आलोचना की, जिसके तहत वे लोगों को दिल्ली ले जाकर प्रदर्शन करा रहे हैं। उनके अनुसार ऐसे प्रदर्शन अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए होते हैं और नेताओं को असम आकर यहाँ के लोगों की समस्याएँ समझनी चाहिए।
असम में मतदाता सूची विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
असम में वर्षों से कथित अवैध घुसपैठ और मतदाता सूची की शुचिता को लेकर राजनीतिक विवाद चला आ रहा है। भारतीय चुनाव कानून के अनुसार, मतदाता पंजीकरण प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है कि सूची नागरिकता सहित सभी कानूनी पात्रता मानकों के अनुरूप हो, और यही मुद्दा अब नगांव उपचुनाव के बाद फिर चर्चा में है।
राष्ट्र प्रेस
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