राम मंदिर चढ़ावा विवाद: केजरीवाल का आरोप — 'ताकतवर लोगों को बचाया जा रहा है, जांच महज दिखावा'
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 3 जुलाई को गोवा दौरे के दौरान राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में 'ताकतवर लोगों' को बचाने की कोशिश की जा रही है और अब तक की गई कार्रवाई — एसआईटी, एफआईआर, गिरफ्तारियाँ — केवल औपचारिकता है।
केजरीवाल के मुख्य आरोप
केजरीवाल ने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धाभाव से दान दिया था। लेकिन कथित तौर पर मंदिर से जुड़े जमीन सौदों में अनियमितता, निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी और चढ़ावे की चोरी की खबरों ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई है। उनके अनुसार, करोड़ों रुपए के चढ़ावे के साथ-साथ सोने-चाँदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुओं के गायब होने की बातें सामने आई हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि सीसीटीवी फुटेज में कई बार चोरी की घटनाएँ दर्ज होने के बावजूद मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से ही मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई कुछ जमीनों में अनियमितताएँ सामने आई थीं और कथित तौर पर कुछ जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। उनके अनुसार, इन मामलों से जुड़े दस्तावेज पहले भी सार्वजनिक हो चुके हैं, फिर भी किसी बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।
ट्रस्ट और सरकार पर सवाल
केजरीवाल ने तर्क दिया कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की देखरेख में हुआ और ट्रस्ट सदस्यों का चयन शीर्ष स्तर पर किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतने बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताएँ हुईं, तो सरकार को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई। उनके अनुसार, यदि सरकार को पहले से जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई, और यदि नहीं थी तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है।
जांच पर सवालिया निशान
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT), दर्ज एफआईआर और कुछ लोगों की गिरफ्तारी महज औपचारिक कदम हैं। उनका कहना था कि जांच की धार केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रखी जा रही है, जबकि बड़े पदों पर बैठे कथित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
AAP की मांग
केजरीवाल ने माँग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जाए तथा किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता साबित होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से सीधे जुड़ा है और पारदर्शी जांच ही उनके विश्वास को बहाल कर सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे प्रकरण पर स्पष्ट जवाब देने की माँग की।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से यह देश की सबसे संवेदनशील धार्मिक-राजनीतिक परियोजनाओं में से एक बनी हुई है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।