नवरोज 2026: राष्ट्रपति मुर्मु, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और PM मोदी ने पारसी नववर्ष पर दी शुभकामनाएँ
सारांश
मुख्य बातें
पारसी नववर्ष नवरोज के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों ने पारसी समुदाय को हार्दिक बधाई दी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस पावन पर्व पर शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'पारसी नववर्ष नवरोज के शुभ अवसर पर, मैं भारत और विदेशों में रहने वाले सभी देशवासियों, और विशेष रूप से पारसी भाई-बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देती हूँ।' उन्होंने आगे लिखा कि नवरोज नई शुरुआत और नई उम्मीद का प्रतीक है तथा पारसी समुदाय ने अपनी उद्यमशीलता और परोपकार की भावना से भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पर्व सभी नागरिकों को एक समावेशी और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरित करेगा।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की शुभकामनाएँ
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा, 'पारसी नववर्ष, नवरोज के शुभ अवसर पर मैं अपने सभी पारसी भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ।' उन्होंने कामना की कि यह नया साल प्रत्येक परिवार के लिए शांति, समृद्धि और खुशियाँ लाए। उपराष्ट्रपति ने आस्था, करुणा और सेवा के शाश्वत मूल्यों को साझा विरासत की धरोहर बताते हुए 'नवरोज मुबारक' कहा।
प्रधानमंत्री मोदी और अन्य नेताओं के संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी शुभकामनाओं में पारसी समुदाय के योगदान को रेखांकित करते हुए लिखा, 'विभिन्न क्षेत्रों में पारसी समुदाय के शानदार योगदान ने हमारे देश को अनगिनत तरीकों से समृद्ध किया है। आने वाला साल सभी के लिए शांति, खुशी, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य से भरा हो।' विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि यह नया वर्ष सभी के लिए शांति, समृद्धि, अच्छा स्वास्थ्य और नई शुरुआत लेकर आए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नवरोज को पारसी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताते हुए 'नवरोज मुबारक' की शुभकामनाएँ दीं।
नवरोज का महत्व और पारसी समुदाय का योगदान
नवरोज पारसी पंचांग के अनुसार नए वर्ष का पहला दिन है, जो वसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के नवीनीकरण का प्रतीक माना जाता है। गौरतलब है कि भारत में पारसी समुदाय की संख्या सीमित होने के बावजूद उद्योग, कला, विज्ञान और समाजसेवा में उनका योगदान असाधारण रहा है। यह ऐसे समय में है जब देश विविधता में एकता के अपने संवैधानिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने की दिशा में अग्रसर है। शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की एकसाथ शुभकामनाएँ इस अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति राष्ट्रीय सम्मान को दर्शाती हैं।
आगे की राह
नवरोज का यह पर्व भारत के बहुलतावादी सामाजिक ताने-बाने को और मजबूत करने का अवसर है। देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे नेताओं की एकजुट शुभकामनाएँ इस संदेश को और व्यापक बनाती हैं कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।