उत्तर प्रदेश में साक्ष्य-आधारित शिक्षा सुधार: टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 से तय होगी कक्षा-कक्ष की नई रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने 30 जून 2025 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित एक महत्वपूर्ण नीति-संवाद कार्यक्रम में बुनियादी शिक्षा सुधारों की दिशा स्पष्ट करते हुए कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शैक्षणिक नीति का केंद्रबिंदु घोषित किया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) उत्तर प्रदेश रिपोर्ट-2025 का विमोचन किया गया, जो प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य और निपुण भारत मिशन के ज़मीनी नतीजों को एक मंच पर लाती है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग' में नीति-निर्माता, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ और शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए। स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
प्रारंभिक सत्र में क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव और अधिगम गुणवत्ता सुधार की रणनीतियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। इसमें प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर और निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।
टीएलपीएस रिपोर्ट-2025: साक्ष्यों का दस्तावेज़
विमोचित टीएलपीएस उत्तर प्रदेश रिपोर्ट-2025 प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को सुदृढ़ करने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज़ है। यह अध्ययन नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किया गया।
रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएँ, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास और सतत अकादमिक मेंटरिंग की ज़रूरतों की पहचान की गई है।
पैनल चर्चा: ज़मीनी आवाज़ें
'स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज फॉर फाउंडेशनल लर्निंग' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने ज़मीनी अनुभव साझा किए।
चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पिछड़े बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियाँ अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मज़बूत करने और कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
अपर मुख्य सचिव का सीधा संवाद
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।
आगे की राह
समापन सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, मज़बूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे — यह संदेश उत्तर प्रदेश की शैक्षणिक नीति की भावी दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।