28 जुलाई 2026
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यूपी में KPI से बदलेगी स्कूली शिक्षा, योगी सरकार ने जुलाई–सितंबर 2026 के लिए परिणाम-आधारित व्यवस्था लागू की

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यूपी में KPI से बदलेगी स्कूली शिक्षा, योगी सरकार ने जुलाई–सितंबर 2026 के लिए परिणाम-आधारित व्यवस्था लागू की

सारांश

योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा को KPI के दायरे में ला दिया है — जिला से लेकर विद्यालय तक हर स्तर पर मासिक प्रदर्शन समीक्षा और पोर्टल-आधारित जवाबदेही अनिवार्य। निपुण भारत से लेकर ऑपरेशन कायाकल्प तक, सभी प्रमुख योजनाएँ अब एक मापनीय ढाँचे के अधीन हैं।

मुख्य बातें

योगी सरकार ने 28 जुलाई 2026 को बेसिक शिक्षा विभाग में KPI-आधारित परिणाम व्यवस्था लागू की।
जुलाई, अगस्त और सितंबर 2026 की तिमाही के लिए समग्र शिक्षा के तहत KPI निर्धारित किए गए।
जिला, ब्लॉक और विद्यालय तीनों स्तरों पर मासिक प्रदर्शन मूल्यांकन अनिवार्य होगा।
निपुण भारत मिशन, ऑपरेशन कायाकल्प, बाल वाटिका, RTE, पीएम श्री विद्यालय और समेकित शिक्षा सभी KPI के दायरे में।
प्रेरणा पोर्टल, दीक्षा, NBMC और U-DISE पर समयबद्ध डेटा अपडेट अनिवार्य किया गया।
महानिदेशक मोनिका रानी ने सभी मंडलीय और जिला स्तरीय अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 28 जुलाई 2026 को प्रदेश की विद्यालयी शिक्षा प्रणाली को परिणाम-आधारित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया। बेसिक शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत जुलाई, अगस्त और सितंबर 2026 की तिमाही के लिए 'की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स' (KPI) निर्धारित कर दिए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति को पूर्व-निर्धारित मानकों पर परखा जाएगा और लक्ष्य से पीछे रहने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई अनिवार्य होगी।

मुख्य घटनाक्रम

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, DIET प्राचार्यों, जिला समन्वयकों और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करना होगा।

नई व्यवस्था के अंतर्गत जिला, ब्लॉक और विद्यालय तीनों स्तरों पर लक्ष्यों के सापेक्ष कार्यों की नियमित समीक्षा होगी। अधिकारियों को समस्त गतिविधियों की प्रगति संबंधित पोर्टलों पर समय-सीमा के भीतर दर्ज करना अनिवार्य होगा, और प्रत्येक माह जिलों के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाएगा।

KPI में शामिल प्रमुख संकेतक

निपुण भारत मिशन के अंतर्गत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी, कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता वृद्धि, कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता और अधिगम स्तर का मूल्यांकन KPI के केंद्र में हैं। इसके अतिरिक्त प्रेरणा पोर्टल, दीक्षा, NBMC और U-DISE जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समयबद्ध डेटा अपडेट अनिवार्य किया गया है।

विद्यालय निर्माण, ऑपरेशन कायाकल्प, जर्जर भवनों के निस्तारण, आधारभूत सुविधाओं और फर्नीचर की उपलब्धता की नियमित समीक्षा भी KPI में शामिल है। बाल वाटिका के अंतर्गत नामांकन, विद्यालय तैयारी कार्यक्रम, TLM की उपलब्धता और गतिविधि-आधारित शिक्षण को भी इसमें जगह दी गई है।

समावेशी शिक्षा और सामुदायिक भागीदारी

आरटीई (RTE) के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों का सत्यापन, स्कूल से बाहर बच्चों का चिह्नांकन एवं नामांकन, शारदा कार्यक्रम, विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रियता और सामुदायिक सहभागिता भी KPI के दायरे में आती है। पीएम श्री विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियों की भी नियमित समीक्षा की जाएगी।

समेकित शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता और U-DISE अद्यतन को भी सतत मॉनिटरिंग के अंतर्गत रखा गया है।

वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही

मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (MIS), पोर्टलों पर डेटा की गुणवत्ता, वित्तीय प्रगति, समयबद्ध व्यय, लंबित प्रकरणों का निस्तारण और विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन — ये सभी KPI ढाँचे का हिस्सा हैं। पोर्टल-आधारित मॉनिटरिंग और गैप एनालिसिस के ज़रिए कमज़ोर कड़ियों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता और सरकारी विद्यालयों में नामांकन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। मोनिका रानी के अनुसार, KPI व्यवस्था विभाग में परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को मज़बूत करेगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा प्रशासनिक जवाबदेही को नई गति देगी। अगले तीन माह में इस व्यवस्था की प्रभावशीलता जिलों के मासिक प्रदर्शन मूल्यांकन से स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तर प्रदेश में पोर्टल-आधारित रिपोर्टिंग की पुरानी प्रवृत्ति यह बताती है कि डेटा दर्ज करना और वास्तविक सुधार — दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं। गौरतलब है कि निपुण भारत मिशन के लक्ष्य वर्ष 2026-27 हैं, और KPI को अभी उसी समय-सीमा में परखा जा रहा है — यानी परिणाम दिखने का दबाव तत्काल है। असली कसौटी यह होगी कि मासिक गैप एनालिसिस के बाद सुधारात्मक कार्रवाई कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर दिखे। बिना स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन के, यह व्यवस्था एक और 'पोर्टल पर हरा निशान' बनकर रह सकती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में शिक्षा KPI व्यवस्था क्या है?
यह बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा समग्र शिक्षा के अंतर्गत लागू की गई परिणाम-आधारित निगरानी प्रणाली है, जिसमें जुलाई–सितंबर 2026 की तिमाही के लिए 'की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स' निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत जिला, ब्लॉक और विद्यालय स्तर पर मासिक प्रदर्शन समीक्षा और पोर्टल-आधारित जवाबदेही अनिवार्य है।
KPI में कौन-कौन सी योजनाएँ शामिल हैं?
KPI में निपुण भारत मिशन, फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी, कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, ऑपरेशन कायाकल्प, बाल वाटिका, RTE नामांकन, शारदा कार्यक्रम, पीएम श्री विद्यालय और समेकित शिक्षा शामिल हैं। इसके अलावा प्रेरणा पोर्टल, दीक्षा, NBMC और U-DISE पर डेटा अपडेट भी अनिवार्य है।
KPI व्यवस्था से जिला अधिकारियों पर क्या असर पड़ेगा?
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को निर्धारित समय-सीमा में सभी गतिविधियों की प्रगति पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। लक्ष्य प्राप्ति में कमी मिलने पर तत्काल सुधारात्मक कार्य-योजना लागू करना अनिवार्य होगा।
महानिदेशक मोनिका रानी ने KPI को लेकर क्या कहा?
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने कहा कि KPI व्यवस्था विभाग में परिणाम-आधारित कार्यसंस्कृति को मज़बूत करेगी तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को नई गति देगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को समय-सीमा का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए KPI में क्या प्रावधान है?
समेकित शिक्षा के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता, U-DISE अद्यतन और समावेशी शिक्षा से जुड़े सभी संकेतकों की सतत मॉनिटरिंग KPI ढाँचे में शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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